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अप्रैल-मई 2017 में बड़े पैमाने पर नरेगा मज़दूरी लंबित

रांची: 3,045 करोड़ रुपये की नरेगा मज़दूरी के फंड ट्रांसफर ऑर्डर (FTOs) अभी तक भारत सरकार के नैशनल इलेक्ट्रौनिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम (NEFMS) द्वारा प्रौसेस नहीं हुए हैं। स्थिति पिछले दो महीनों में अत्यंत गंभीर हुई है चूंकि प्रौसेस न होने वाले 63 प्रतिशत FTOs अप्रैल-मई के हैं। अभी तो FTOs न के बराबर प्रौसेस हो रहे हैं। स्थिति सबसे खराब केरल व उत्तराखंड के लिए है जिनके एक भी FTO 15 अप्रैल 2017 से प्रौसेस नहीं हुए हैं (अनुबंध देखें)।

यह समस्या पहली बार नहीं हो रही है; मार्च – अप्रैल 2017 में भी 20 दिनों के लिए लगभग कोई FTO प्रौसेस नहीं हुआ था। इस गड़बड़ी के कारण स्पष्ट नहीं हैं चूंकि ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

साथ ही, हालांकि मज़दूरी भुगतान में विलम्ब की गणना कार्य सप्ताह समाप्त होने के 16वें दिन से शुरू होकर मज़दूर के खाते में मज़दूरी पहुँचने तक होनी चाहिए, नरेगा का मैनेजमेंट इन्फौर्मेशन सिस्टम इस विलम्ब की गलत प्रकार से गणना करता है। विलम्ब की गणना केवल ‘भुगतान तिथि’ तक की जाती है, और न कि मज़दूर के खाते में मज़दूरी भुगतान पहुँचने तक। भुगतान तिथि मतलब जब FTO पर द्वितीय हस्ताक्षरी द्वारा हस्ताक्षर किया गया हो। कई बार इस प्रक्रिया व मज़दूर के खाते तक मज़दूरी जाने में कई दिनों का विलम्ब होता है (जैसा कि वर्तमान में FTO NEFMS द्वारा प्रौसेस न होने की समस्या) जिसके लिए मज़दूरों को मुआवज़ा नहीं दिया जाता।

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रोज़गार गारंटी कानून में हो रही समस्याओं के विरुद्ध आवाज़ उठाने के लिए हाल ही में गठित नरेगा संघर्ष मोर्चा निम्न मांगे करता है:
– नरेगा मज़दूरी भुगतान के लिए सरकार ऐसी प्रणाली अपनाए जो सुदृढ़ हो व जिसमें बार बार FTO प्रौसेस न होने जैसी गंभीर समस्याएं न हो।

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– मंत्रालय FTO प्रौसेस न होने जैसी समस्याओं के बारे में तुरंत राज्यों को सूचना दे व यह जानकारी नरेगा की सरकारी वेबसाईट पर भी उपलब्ध हो।

– मज़दूरों को विलम्ब के पूरे समय के लिए मुआवज़ा मिले, यानी जबतक उनकी मज़दूरी उनके खाते में नहीं पहुँचती।

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