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हेमंत ने कहा “अध्यक्ष तो भीष्म पितामह बन जाते हैं”, तो प्रदीप यादव ने कहा “विधायक CM और CS की चापलूसी कर रहे हैं”

Ranchi : सदन का दूसरा दिन भी हंगामेदार रहा. मुख्य सचिव राजबाला वर्मा और डीजीपी डीके पांडेय को पदमुक्त कराने की मांग को लेकर सदन नहीं चलने दिया गया. करीब 12 बजे विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने सदन को भोजन अवकाश यानि दो बजे तक के लिए निलंबित कर दिया. इस बीच कई ऐसी चीजें हुई जो देखने लायक थी.

जानिए क्या क्या हुआ सदन के अंदर

जैसे ही विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव सदन में प्रवेश करते हैं प्रदीप यादव अपनी कुर्सी छोड़ कर खड़े हो जाते हैं उनका साथ राजकुमार यादव देते हैं. दोनों एक साथ पदाधिकारियों पर कार्यवाही की मांग को लेकर शोर करने लगते हैं. इसी बीच सरयू राय जो संसदीय कार्य मंत्री हैं, वह खड़े होकर सदन चलने की अपील विधायकों से करते हैं. वह कहते हैं कि जो सदन का सदस्य नहीं है उसके बारे में हंगामा करना गलत है. सरकार मामले पर गतिशील है, सरकार काम कर रही है, सरकार के काम पर चर्चा हो ना कि ऐसी बातों पर हो जो कि सदन का हिस्सा नहीं है.

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सदन का हो रहा चीरहरण : हेमंत

 सरयू राय के बाद हेमंत सोरेन नेता प्रतिपक्ष के तौर पर खड़े होते हैं और कहते हैं कि पूरे देश और राज्य में जलियांवाला बाग जैसी हालात है, और हम बैठे कर ताली  बजा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सदन का चीरहरण हो रहा है सदन के नेता गाली-गलौच करते हैं. लिखित शिकायत विधानसभा अध्यक्ष को दी जाती है. लेकिन, कार्रवाई नहीं होती है. इतना होने के बाद भी सदन के नेता पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई. क्यों उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द नहीं कर दी गई. हेमंत सोरेन ने अध्यक्ष पर भी उंगलियां उठायी और उन्होंने कहा कि आप हर मामले में भीष्म पितामह बन कर शांत हो जाते हैं. आपको कार्रवाई करनी चाहिये. हम इतने असहाय कैसे हो सकते हैं. आप शांत क्यों रहते हैं. सदन के नेता आप पर उंगली उठा कर आंखें तरेर कर आपकी तरफ बात करते हैं और आप कुछ नहीं करते. जब सदन में गरीबों की आवाज नहीं सुनी जा रही है तो ऐसे में सदन क्यों चलने दिया जाए. हेमंत सोरेन ने सदन भोजनावकाश तक स्थगित होने तक चार बार अध्यक्ष को भीष्म पितामह कहा. उन्हें चार बार कहा कि आप शांत क्यों हो जाते हैं. आप भीष्म पितामह क्यों बन जाते हैं. हेमंत सोरेन ने यह भी कहा कि सदन के नेता सदन को अपनी जेब में रखते हैं. उन्होंने कहा कि पदाधिकारियों पर कार्यवाही इसलिए नहीं करना चाह रहे हैं क्योंकि अगर कार्यवाही हुई तो आंच उन पर भी आयेगी इसलिए वह चुप बैठते हैं. अगर मामला बढ़ा तो सीएम के गिरेबान पर भी कार्रवाई की आंच जा सकती है. साथ ही कहा कि कार्रवाई इस लिए नहीं होती है क्योंकि अगर कार्रवाई हुई तो मोमेंटम झारखंड के द्वारा आने वाले निवेशक झारखंड में नहीं आयेंगे और सीएम रघुवर दास सारे मामले के जद में आ जायेंगे. हेमंत ने कहा कि झारखंड सरकार का हेड ऑफिस ही सड़ा हुआ है.

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विधायक सीएम और सीएस की चापलूसी करते हैं : प्रदीप यादव

कारवाई की मांग विपक्ष लगातार कर रहा था, इसी बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक शुरू हो गयी. जिसके बाद प्रदीप यादव ने कहा कि हम अपना दायित्व निभा रहे हैं. हम कुछ गलत मांग नहीं कर रहे हैं. सत्ता पक्ष के विधायक इसलिए पदाधिकारियों का साथ दे रहे हैं क्योंकि वह सीएम रघुवर दास और सीएस राजबाला वर्मा की चापलूसी करते हैं. इस पर हंगामा जोरदार हो गया और सत्ता पक्ष के विधायकों ने आरोप लगाया कि प्रदीप यादव ने अपशब्द का इस्तेमाल किया है.

कार्य स्थगन प्रस्ताव ही गलत : राधाकृष्ण किशोर

सत्ता पक्ष की तरफ से राधाकृष्ण किशोर ने अपनी बात सदन में रखी. उन्होंने कानूनी हवाला देते हुए कहा कि जो मुद्दा न्यायालय में निलंबित है इस मुद्दे को कार्य स्थगन में नहीं लाया जा सकता है. विपक्ष फिर भी ऐसा कर रहा है जो कि गलत है. इस पर प्रदीप यादव ने पुलिस मैनुअल का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी भ्रष्ट पदाधिकारी को पदमुक्त किया जा सकता है और उनपर कार्रवाई की जा सकती है.

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