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हाल मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र का, CM की भी नहीं सुनते गढ़वा जिला के अधिकारी (देखें वीडियो)

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Chandi Dutta Jha

Ranchi/Garhwa, 01 December : खेती योग्य जमीन पर जहरीला रसायन गिराकर बंजर बनाने वालों पर गढ़वा जिला प्रशासन काफी मेहरबान है. मेहरबानी का आलम यह है कि मुख्यमंत्री के आदेश तक की धज्जियां उड़ाने से नहीं चूक रहे हैं. जमीन मालिक रमना थाना क्षेत्र के कबिसा गांव के रहने वाले अनुराग कुमार पांण्डेय जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री सचिवालय में लगने वाली जनता दरबार या मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र हर जगह मदद की गुहार लगा चुके हैं, पर उन्हें कहीं से भी मदद नहीं मिली. अनुराग अपनी फरियाद लेकर कई बार अधिकारी, मंत्री और मुख्यमंत्री के पास गये पर निराशा ही हाथ लगी. मामले को तीन साल बीत गये हैं पर अब किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गयी, न ही मुआवजा राशि का भुगतान किया गया. 

क्या है मामला

अनुराग कुमार पांडेय बताते हैं कि आदित्य बिरला कैमिकल कंपनी, रेहला एवं आरएल रसायन उद्योग ने उनके खेत में खतरनाक रसायनिक पदार्थ डाल दिया था. उन्होंने बताया कि कंपना ने अवैध तरीके से वर्ष 2015 में कई ट्रैक्टर रसायनिक पदार्थ गिराया था. जिससे पीड़ित की पांच एकड़ जमीन बंजर हो गयी. इस जमीन पर स्थित तालाब का पानी भी जहरीला हो गया और तालाब की सारी मछलियां मर गयी. इसी तालाब का जहरीला पानी पीने से अनुराग कुमार की पांच गाय की भी मृत्यु हो गयी.

दो उपायुक्त से भी नहीं हुआ समाधान

अनुराग कुमार अपनी समस्या लेकर तत्कालीन उपायुक्त मुथू कुमार के पास गए. डीसी जांच करने की बात कह कर टाल मटोल करते रहे. कुछ दिन बाद उपायुक्त मुथू कुमार का ट्रांसफर हो गया. नए उपायुक्त नेहा अरोड़ा ने पदभार ग्रहण कर लिया लेकिन मामले को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की. अनुराग ने बताया कि आज तक जांच पुरा नहीं हुआ है. वर्तमान उपायुक्त भी मामले को लेकर टालमटोटल करते हैं.

मुख्यमंत्री जनसंवाद के सीधी बात में एक वर्ष पूर्व आया था मामला

पीड़ित ने बताया कि एक वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री जनसंवाद के सीधी बात कार्यक्रम में इस मामले को उठाया गया था. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उपायुक्त गढ़वा को मुआवजा दिलाने और तालाब का जीर्णोद्धार कराने की आदेश भी दिया था. जमीन को खेती योग्य बनाने की बात भी जिला प्रशासन को कही गयी थी, लेकिन आज तक इस बात पर अमल नहीं किया गया है. जिस कारण आज तक प्रभावित परिवार को न मुआवजा का भुगतान किया गया है, न ही दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गयी.  

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मैनेज करने का मिलता है दबाब

इस मामले को जब मुख्यमंत्री ने सीधी बात में देखा तो काफी नाराज हुए. उन्होंने समस्या के समाधान का आदेश तो दे दिया, लेकिन कई अधिकारी अनुराग कुमार पर मामले को रफा-दफा करने का दबाब बनाने लगे. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि यह सब करने से कुछ नहीं होगा, मैनेज कर लो सारा समस्या का समाधान हो जायेगा.

हेरफेर करने में लगे हैं अधिकारी तो कैसे मिलेगा मुआवजा

इस मामले को लेकर अनुमंडल पदाधिकारी नगर उंटारी और अंचल अधिकारी ने जांच किया तो आरोप को सही पाया. उक्त पदाधिकारी ने माना कि प्रभावित परिवार का आरोप सही है. इस मामले में जब मुख्यमंत्री ने जांच का आदेश दिया तब तत्कालीन एसी मनोज कुमार ने जमीन को ही गैरमजरूआ बताकर मुआवजा भुगतान का रास्ता बंद कर दिया. सूत्रों ने बताया कि अधिकारी जांच को प्रभावित करने और सरकार को दिगभ्रमित करना चाहते हैं. ताकि मुआवजे का भुगतान नहीं करना पड़े.

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जांच टीम ने माना कि जमीन को नुकसान हुआ है

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के एक टीम का गठन किया गया. इस टीम में डॉ बीके अग्रवाल, डॉ अरविन्द कुमार, डॉ भुपेन्द्र कुमार ने स्थल की जांच की. जांच टीम ने माना कि जमीन पर हानिकारक एसिड गिराया गया है. जमीन से 12 से 15 इंच मिट्टी हटाने के बाद ही जमीन को कृषि योग्य बनाया जा सकता है.

मामले को लेकर एफआईआर किया गया है : डीसी

इस मामले को लेकर जब गढ़वा उपायुक्त नेहा अरोड़ा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मामले को लेकर एफआईआर किया गया है. विस्तृत जानकारी पुलिस अधीक्षक ही दे सकते हैं. वहीं इस मामले में पुलिस अधीक्षक मो अरसी ने बताया कि हमेशा किसी मामले की फाईल लेके नहीं बैठा रहता हूं. पीटीशन लेके भेजिए तभी मामले के बारे में कुछ बताया जा सकता है.

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