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हजारीबाग जेल में गड़बड़ियों के लिए कैदी, सिपाही से लेकर अधीक्षक तक जिम्मेदार, पर जेलर नहीं

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उठ रहें हैं सवाल कि बंदी, कक्षपाल, जमादार और काराधीक्षक हैं दोषी, तो क्या जेलर की कोई जिम्मेदारी नहीं

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Hazaribag, 09 December: हजारीबाग स्थित जय प्रकाश नारायण केंद्रीय कारा पिछले 10 माह से सुर्खियों में है. जेल के भीतर के गोरखधंधे के खुलासों को लेकर जेल प्रशासन की फजीहत होती रही है. इस दौरान सिपाही से लेकर जेल अधीक्षक तक पर कार्रवाई हुई. गड़बड़ियाों को लेकर कैदी के अलावा जेल के सिपाही से लेकर अधीक्षक तक को जिम्मेदार ठहराया गया. लेकिन जेलर माणिक चंद्र राम को कभी किसी गड़बड़ी को लेकर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया. न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई. 

पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के नौ नंबर सेल से उनके 10 नंबर डिग्री से फोन जब्त होने और उनके ऊपर हजारीबाग सदर थाने में दर्ज प्राथमिकी से होती है. उसके बाद उनको उसी के आधार पर दुमका जेल भेज दिया जाता है. बाद में बड़ा जमादार सहित कुल आठ सिपाहियों पर कार्रवाई की जाती है. तब से लेकर आज तक जेल में जिला प्रशासन ने कई फोन सहित कई आपत्तिजनक सामान बरामद किए. इन मामलों में जेलर पर कोई जिम्मेदारी तय नहीं की गयी.

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पहले नहीं मिला कुछ, फिर बरामद हुआ चार्जर व सिम

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जेल में संदिग्ध गतिविधि की बात तब खुलकर सामने आई, जब 28 नवम्बर की शाम एसडीओ ने जेल में औचक छापेमारी की और कुछ बरामद नहीं हुआ. पुनः रात में औचक छापेमारी में अंडा सेल में बंद कुख्यात सुजीत सिन्हा के पास से और चार नंबर स्पेशल सेल में गुलाब गोप से चार्जर व सिम बरामद हुआ. इसके तुरंत बाद दो दिसंबर को छापेमारी में पांच फोन बरामद हुआ.

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सिपाही के निलंबन से उठ रहे हैं कई सवाल

सात दिसंबर को जिला प्रशासन की औचक छापेमारी में जेल के नौ नंबर सेल से ही पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह, सिंह मेंशन रामाधीर सिंह से फोन और नगदी जब्त किया गया. इस मामले में सिपाही सुरेश राम पर कार्रवाई की गयी है. उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. इस मामले में जेलर माणिक चंद्र राम गवाह बनाए गए हैं. प्रशासन की इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. जेल के कर्मचारी भी इस कार्रवाई को सही नहीं ठहरा रहे हैं. इसकी कई वजहें हैं. पहली यह कि सुरेश राम लंबे समय बाद एक दिसंबर से ड्यूटी पर आया था. आमतौर पर जेल में शाम के पांच बजे सभी बंदियों को वार्डों/सेलों व डिग्रियों में बंद कर दिया जाता है. कैदियों को बंद करने के बाद वार्ड, सेल व डिग्री की चाबियां जेल के मुख्य केंद्र में जेलर की निगरानी में जमा हो जाता है. इस तरह पांच बजे शाम में बंद हुए बंदियों के सेल में रात के 12.00 बजे फोन और नगदी बरामदगी होती है. तो इसके लिए सिर्फ वहीं सिपाही कैसे जिम्मेदार होगा, तो रात के 9.00 बजे ड्यूटी पर आए थे. जो सामान जब्त किए गए क्या उसे सुरेश राम ने ही वहां आपूर्ति कराया था. जबकि जब्त फोन, खाने-पीने के सामान और नगदी पिछले कई दिनों से उपयोग किया जा रहा था. जिसकी सूचना खुफिया विभाग की तरफ से राज्य मुख्यालय को भी भेजी गई थी. एक सवाल यह भी उठ रहा है कि जो सामान सात दिसंबर की रात जब्त किए गए, वह जेल प्रशासन की नियमित तलाशी में क्यों नहीं पकड़ में आया. क्या जेल में कोई नियमित तलाशी होती ही नहीं है ? या सिर्फ तालाशी के नाम पर खानापूर्ति की जाती है. 

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