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हजारीबागः रेलवे ने लाइन बिछाने के नाम पर रैयतों से खरीदी जमीन, NTPC से 4 गुणा ज्यादा पैसे लेकर जमीन पर बनवा दी कोल-साइडिंग

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News Wing Hazaribag, 01 December: हजारीबाग में रेलवे ने लाइन बिछाने के नाम पर जमीन का अधिग्रहण किया, लेकिन उस जमीन पर रेलवे लाइन न बिछाकर उसे एनटीपीसी को कोल साइडिंग बनाने के लिए दे दिया. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि हजारीबाग-शिवपुरी रेलवे लाइन बनाने के लिए उनकी जमीन का अधिग्रहण रेलवे ने किया. इसके बाद अधिग्रहित जमीन का पैसा लेकर रेलवे ने उसे एनटीपीसी को कोल साइडिंग बनाने के लिए दे दिया. मामला कोडरमा-रांची वाया हजारीबाग-बरकाकाना/हजारीबाग–शिवपुर प्रस्तावित रेलवे लाइन से जुड़ा है. वन विभाग से क्लीयरेंस न मिलने के कारण हजारीबाग-शिवपुर रेलवे लाइन प्रोजेक्ट को रेलवे ने स्थगित कर दिया था. इसके स्थगन के बाद रेलवे ने कोयला लोडिंग के लिए साइडिंग बनाने हेतु 2012 में उक्त जमीन एनटीपीसी को 92 करोड़ 43 लाख रुपये में दे दिया. एनटीपीसी ने उसी समय 36 करोड़ 36लाख 20 हजार रूपये रेलवे को अग्रिम दे दिया.

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रेलवे ने ग्रामीणों से 4,800 रुपये कट्ठा खरीदी जमीन, एनटीपीसी को 20,000 की दर से बेच दिया

ग्रामीणों का आरोप है कि इस राशि में एनटीपीसी ने अधिग्रहित भूमि का अधिग्रहण मूल्य से कहीं ज्यादा राशि भी रेलवे को दी है. उनकी शिकायत है कि रेलवे ने रेलवे लाइन बिछाने के नाम पर 4,800 रुपए प्रति कठ्ठे की दर से मुआवजा देकर उनसे स्थानीय प्रशासन के माध्यम से जमीन ली और उसी जमीन की कीमत करीब 20,000/-रूपये प्रति कठ्ठे की दर से एनटीपीसी से लेकर अधिकार उन्हें दे दिया है.

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नियम के विरूद्ध एनटीपीसी को बेची गयी जमीन

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जब पश्चिम पूर्व रेलवे के उप-प्रमुख अभियंता, निर्माण ने 25.7.2013 को लिखित रूप से यह कहा था कि अधिग्रहित भूमि रेलवे न तो बेचेगी, न ट्रांसफर करेगी और न ही लीज पर किसी को देगी और अधिग्रहण का नियम भी यही है, तब किस परिस्थिति में एनटीपीसी को साइडिंग बनाने के लिए रेलवे ने यह दे दिया. यह नियम के खिलाफ है. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि समय-समय पर 2012 से अबतक उनलोगों ने इस बाबत स्थानीय प्रशासन से लेकर सबको ज्ञापन देकर शिकायत किया, लेकिन अबतक कोई सुनवाई नहीं हुई.

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