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सेबी का फैसला : 500 बड़ी कंपनियां 1 अप्रैल 2020 तक चेयरमैन और एमडी/सीईओ का पद करें अलग, अंबानी और प्रेमजी को भी छोड़ना पड़ेगा एक पद 

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Mumbai : देश के बड़े-बड़े उद्योगपतियों का अपनी कंपनी में एक साथ दो पदों पर बने रहना अब मुश्किल होने जा रहा है. पूंजी बाजार रेगुलेटर सेबी ने कॉरपोरेट गवर्नेंस पर उदय कोटक समिति की कई सिफारिशें मंजूर कर ली हैं. इनमें से एक में मार्केट कैप के लिहाज से 500 बड़ी कंपनियों को 1 अप्रैल 2020 तक चेयरमैन और एमडी/सीईओ का पद अलग करने को कहा गया है. फॉर्चून पत्रिका के मुताबिक, इन 500 कंपनियों का कुल टर्नओवर भारत के सकल घरेलू उत्पाद के 60 फीसदी से ज्यादा है. ऐसे में चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर तैनात देश के बड़े उद्योगपतियों को इनमें से एक पद छोड़ना होगा. ऐसे उद्योगपतियों की फेहरिस्त में रिलायंस के मुकेश अंबानी और विप्रो के अजीम प्रेमजी भी शामिल हैं.

कोटक समिति का तर्क

कोटक समिति का कहना है कि चेयरमैन और एमडी का पद एक शख्स के पास होने से मैनेजमेंट की स्वतंत्रता कम होती है. जबकि दोनों पद अलग-अलग शख्स को देने से गवर्नेंस का ढांचे को संतुलित किया जा सकता है. गौर करने की बात है कि किसी भी कंबनी में चेयरमैन बोर्ड ऑफ डायरेक्टर का प्रमुख होता है.इसका फोकस विजन और लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर होता है. जबकि सीईओ-सीएमडी पर कंपनी के दैनिक के कामकाज की जिम्मेदारी होती है. लिहाजा इस पद की चेयरमैन से ज्यादा अहमियत होती है.

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सेबी

कमजोर चेयरमैन बनाने का बढ़ सकता है प्रचलन

गौरतलब है कि जो प्रमोटर कंपनी पर अपनी पकड़ ढीली नहीं करना चाहते, वे एमडी या सीईओ का पद अपने पास रख किसी कमजोर शख्स को चेयरमैन बना सकते हैं. इस तरह दोनों पदों का कंट्रोल उन्हीं के पास रहेगा.

ज्यादा शेयरहोल्डिंग वाले प्रमोटरों के लिए हो सकती है परेशानी

यह फैसला कंपनी में ज्यादा शेयरहोल्डिंग वाले प्रमोटरों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है. देश की 91 फीसदी कंपनियों में प्रमोटर या उनके परिजनों के पास बहुमत शेयरहोल्डिंग है. वहीं, सेबी ने बोर्ड मीटिंग में म्यूचुअल फंड स्कीमों में अतिरिक्त खर्च की सीमा 0.15% घटाने का भी फैसला किया है.

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