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सेंट्रल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने टीटीपीएस को उत्पादन बंद करने को कहा, सिंचाई विभाग से कहा पानी ना दें, सीसीएल से कहा कोयला ना दें

Akshay Kumar Jha

Ranchi : सेंट्रल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने टीटीपीएस (तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन) को उत्पादन बंद करने को कहा है. साथ ही टीटीपीएस को बिजली उत्पादन करने के लिए पानी मुहैया करने वाले सिंचाई विभाग को कहा है कि टीटीपीएस को पानी ना दें. बताया जा रहा है कि सेंट्रल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने टीटीपीएस को बिजली उत्पादन के लिए कोयला देने वाली कंपनी सीसीएल को भी कोयला देने से मना कर दिया है. सेंट्रल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने टीटीपीएस को 21 नवंबर को एक नोटिस दिया था. नोटिस में कहा था कि परियोजना देश भर की सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली कंपनियों में से एक है. सेंट्रल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने टीटीपीएस को था कि कहा पहले प्रदूषण के सभी मानकों को पूरा किया जाए, उसके बाद ही परियोजना में उत्पादन का काम शुरू की जाए. लेकिन टीटीपीएस ने सेंट्रल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सभी मानकों को पूरा नहीं किया. जिसके बाद आजिज होकर सेंट्रल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने सिंचाई विभाग को पानी और सीसीएल को कोयला देने से मना कर दिया है.

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सीपीसीबी की बातों को मानना इतना आसान नही : एमडी

मामले पर टीटीपीएस के कार्यवाहक एमडी सनातन सिंह ने न्यूज विंग को बताया कि नवंबर में जो नोटिस सेंट्रल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की तरफ से आया था, उसके सभी मानकों को पूरा करना इतना आसान नहीं है. बताया कि जितनी चीजें सेंट्रल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने कही थी, उसकी आधी पूरी हुईं हैं. लेकिन पूरा करना इतना जल्दी संभव नहीं है. सभी चीजें काफी आधुनिक तरीके से की जानी है, इसके लिए ई-टेंडर के जरिए कंपनियों को बुलाना है. नए-नए उपकरण लगाने हैं. इतना सब करने में समय लगता है. टीटीपीएस की टीम फिर से सेंट्रल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से बात करेगी. बताया कि जहां तक सीसीएल की बात है, उन्हें हमें करीब 200 करोड़ रुपए देना है. ऐसे में बार-बार वहां से कोयला उत्पादन बंद कर दिया जाता है. वहीं जेवीएनएल के पास हमारा 3400 करोड़ बकाया है. इतना ज्यादा बकाया होने की वजह से हम आगे का काम नहीं कर पा रहे हैं.

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क्या कहा था सीपीसीबी ने टीटीपीएस को

सीपीसीबी ने टीटीपीएस को इन सात बिदुओं पर 15 दिनों के अंदर एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है. कहा गया है कि अगर कंपनी नोटिस का जवाब 15 दिनों के अंदर नहीं देती है, तो सीपीसीबी Environment Protection Act 1986 के कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा.

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नोटिस में और क्या कहा गया    

  • टीटीपीएस बिना Air (Prevention & Control of Pollution) Act, 1981 और Water (Prevention & control of Pollution) Act, 1974 की अनुमति के जनवरी 2016 से उत्पादन कर रही है.
  • Online Continuous Stack Emission Monitoring System तुरंत बहाल हो. जिसके जरिए ऑनलाइन ये पता लगाया जाता है कि चिमनी के जरिए कितना प्रदूषण फैल रहा है.
  • छाई ओवरफ्लो होकर मुरमानावा नाला के जरिए दामोदर नदी में जाकर मिल रहा है. प्लांट के बाहर किसी भी हाल में किसी भी तरह का तरल पदार्थ डिस्चार्ज ना किया जाए. इसके लिए नोटिस इश्यू होने की तारीख से 15 दिनों के अंदर प्लान तैयार कर सीपीसीबी को भेजी जाए. 
  • टीटीपीएस झारखंड प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2016 को पूरी तरह से लागू करे.
  • इएसपी (जिससे धुएं के जरिए हवा को प्रदूषित होने वाले धूल के कण हवा में जाने से पहले खत्म हो जाते हैं) को यूनिट वन के साथ तत्काल प्रभाव से जोड़ा जाए.
  • टीटीपीएस तत्काल प्रभाव से एक Online System बहाल करें, जिससे हवा में होने वाले प्रदूषण और ऐश पॉन्ड की जानकारी सीपीसीबी (सेंट्रल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड) को लगातार मिलता रहे.
  • छाई (कोयले का राख) किसी भी हाल में ऐश पॉन्ड के बाहर ना जाए. इसके लिए Ash Water Recirculation System प्लांट में लगायी जाए.

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