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सूबे में गर्भवती महिलाओं की स्थिति चिंताजनक, प्रसव के दौरान प्रति लाख महिलाओं में से 208 की हो जाती है मौत

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Ranchi : झारखंड में एक लाख की आबादी पर 208 माताओं की मौत गर्भावस्था के दौरान या प्रसव के 40 दिनों को अंदर हो जाती है. हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि यह आंकड़ा भी सही नहीं है. यह और ज्यादा हो सकता है. ऐसे में मामले में कई बार माताओं की मौत हो जाती है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में उसका रिकॉर्ड दर्ज नहीं हो पाती है. 

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सूचना देने वालों को दिये जायेंगे 500 रुपये

अब सरकार यह व्यवस्था करने की जा रही है कि किसी माता की मौत होने पर सूचना देने वालों को 500 रुपये दिये जायेंगे. मौत के तत्काल बाद सूचना दिये जाने पर अस्पताल में इसकी जांच की जायेगी. यह पता किया जायेगा कि मौत की वजह क्या है. स्वास्थ विभाग द्वारा मातृ मृत्यु की रिपोटिंग के लिए 4.37 लाख रुपये की स्वीकृति दी गयी है. विभाग द्वारा लिखा गया है कि किसी भी देश या राज्य की मातृ मृत्यु दर वहां के स्वास्थ व्यवस्था की स्थिति को दर्शाने के लिए एक संयुक्त सूचकांक है. झारखंड की मातृ मृत्यु दर 1999-2001 में 400 प्रति लाख थी,  जो अब घटकर 208 हो गयी है. फिर भी यह राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है. विभाग द्वारा इस वर्ष 1750 गर्भवती महिलाओं की मृत्यु का अनुमान लगाया गया है. 

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क्या है मातृ मृत्यु 

गर्भपात या प्रसव के 42 दिनों के अंदर अगर गर्भावस्था से संबंधित किसी बीमारी या अन्य कारणों से महिला की मृत्यु हो जाती है, तब उसे मातृ  मृत्यु कहते हैं. विभाग का मानना है कि उपयुक्त समय पर समुचित उपचार के द्वारा अधिंकाश माताओं को बचाया जा सकता है. भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रत्येक मातृ मृत्यु की रिपोटिंग एंव समीक्षा अनिवार्य है. रिपोटिंग का मुख्य उद्देश्य मातृ मृत्यु के कारणों की समीक्षा कर उसके अनुरुप योजना बनाने से मातृ मृत्यु की दर में कमी लाना है.

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2030 तक दर मृत्यु दर 90 करना है

झारखंड को सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल का अनुसार, प्रति लाख मातृ मृत्यु दर 2020 तक 175,2025 तक 120 और 2030 तक 90 करना है. विभाग द्वारा कहा गया है कि मातृ मृत्यु की प्रथम रिपोटिंग का दायित्व सहिया का है, परन्तु शत प्रतिशत रिपोटिंग सुनिश्चित करने के लिए अन्य स्त्रोतों से भी सूचना प्राप्त करने के लिए उपाय जरुरी है. यही वजह है कि सहिया के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति मातृ मृत्यु की रिपोटिंग फोन द्वारा जिला आरसीएच पदाधिकारी, सिविल सर्जन या 104 टॉल फ्री नंबर पर देता है, तो एएनएम द्वारा सत्यापित कर दिये जाने के बाद उस व्यक्ति को 500 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जायेगी.

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