न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट से पहले मायावती सरकार ने SC/ST एक्ट के दुरुपयोग पर जताई थी चिंता, किया था संशोधन

36

NewDelhi: एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भले ही बीएसपी समेत तमाम विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार को घेर रही हो, और केंद्र की सरकार भी मामले को लेकर बैकफुट पर है. लेकिन हकीकत ये है कि सुप्रीम कोर्ट से पहले मायावती की सरकार ने भी SC/ST एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए, इस कानून में संशोधन किया था. उत्तर प्रदेश में मायावती के शासन के दौरान न सिर्फ संशोधित किया गया था, बल्कि इस कानून को हल्का भी किया गया था. मजेदार बात यह है कि यही संशोधित कानून उत्तर प्रदेश में आज भी लागू है. आज भी यूपी में एससी-एसटी एक्ट को अलग तरीके से लागू किया जाता है, जिसके तहत अब सीधे गिरफ्तारी नहीं होती है.

इसे भी पढ़ें:आखिर क्यों नाराज हैं सिमरिया विधायक गणेश गंझू !

2007 में ही किया था संशोधन

2007 में मायावती सरकार का सरकारी आदेश एक बार फिर सामने आया है. जिसमें एससी-एसटी एक्ट को न सिर्फ संशोधित किया गया, बल्कि उसमें एक धारा 182 लगाकर यह आदेश पारित किया गया कि अगर कोई इसका दुरुपयोग करेगा, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी. इतना ही नहीं, एससी-एसटी एक्ट में गिरफ्तारी तभी होगी, जब सीओ स्तर का कोई अधिकारी अपनी विवेचना में मामले को सही पाएगा. मायावती के शासन में 20 मई 2007 को तत्कालीन मुख्य सचिव प्रशांत कुमार ने एक सरकारी आदेश निकालकर अनुसूचित जाति-जनजाति में कुछ बड़े बदलाव किए थे, जिसके तहत हत्या और बलात्कार जैसे मामलों में इस एक्ट को लगाने से पहले एसपी या एसएसपी को अपनी विवेचना करनी होती है. सरकारी आदेश में साफ-साफ लिखा था कि किसी भी निर्दोष को इस एक्ट के तहत न तो परेशान किया जाना चाहिए और न ही फंसाया जाना चाहिए और अगर कोई ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ धारा 182 के तहत कार्रवाई होगी. बड़ी बात ये है कि मायावती के शासन में निकाला गया यह सरकारी आदेश आज भी उत्तर प्रदेश में अमल में है.

2 अप्रैल को बंद हुआ हिंसक

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को भारत बंद बुलाया था. जिसे लगभग तमाम विपक्षी दलों का समर्थन था. जिसमें मायावती की पार्टी बसपा भी शामिल थी. फैसले के विरुद्ध बुलाये गये बंद के दौरान कई इलाकों में हिंसक प्रदर्शन हुआ. इसमें 12 लोगों की मौत हो गयी थी. कई जगहों पर गाड़ियों में आग लगा दी गयी. दो दिन बाद भी इस हिंसा का असर देश के कई हिस्सों में दिख रहा है. बुधवार को मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के महाराजपुर थाने इलाके में कर्फ्यू में थोड़ी ढील दी गई है. जबकि राजस्थान के हिंडौन में अभी भी कर्फ्यू जारी है, दोपहर 1 बजे तक के लिए कर्फ्यू को बढ़ाया गया है. इलाके में बस, स्कूल और इंटरनेट की सुविधा बंद है.  इसके अलावा वहां पर इंटरनेट सर्विस भी दोबारा चालू कर दी गई है. वही उत्तर प्रदेश में सड़कों पर हुई हिंसा  में गिरफ्तार लोगों में कई नेता बहुजन समाज पार्टी के हैं. मायावती खुद भी अब खुलकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में हैं, लेकिन उनके शासन के दौरान का उनका ही आदेश अलग कहानी कहता है. 

इसे भी पढ़ें:लातेहार: सुरक्षा बलों-माओवादियों में मुठभेड़, 5 माओवादी ढेर

बीजेपी हुई हमलावर

मायावती के इस आदेश की कॉपी के सामने आने के बाद से बीजेपी ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती पर हमला तेज कर दिया है और खुलकर मायावती पर यह आरोप लगा रही है कि दलितों और आदिवासियों के लिए बनाए गए इस एक्ट को सबसे पहले और सबसे ज्यादा कमजोर खुद मायावती ने किया है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हर बात का बिंदुवार जवाब देने वाली मायावती अपने ही इस सरकारी आदेश के सामने आने के बाद क्या तर्क सामने रखती है?

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: