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सुप्रीम कोर्ट में असम के अवैध प्रवासियों की पहचान के मुद्दे पर सुनवाई सोमवार को

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NewDelhi  :  असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के अंतिम मसौदे के प्रकाशन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर उच्चतम न्यायालय सोमवार को सुनवाई करेगा. कुछ दिन पहले एनआरसी के राज्य समन्वयक ने कहा था कि राज्य में बाढ़ के हालात को देखते हुए मसौदे को तय तारीख 30 जून को जारी करना संभव नहीं होगा.  एनआरसी तैयार करने की वजह असम में अवैध प्रवासियों की पहचान करना है. इस काम से संबंधित प्रक्रिया की निगरानी न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति रोहिन्टन फली नरीमन की पीठ कर रही है. पीठ ने पहले आदेश दिया था कि एनआरसी के अंतिम मसौदे का प्रकाशन 30 जून तक पूरा हो जाना चाहिए. उन्होंने समयसीमा को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था.  हालांकि एनआरसी के राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला ने 28 जून को कहा था कि अंतिम मसौदा तय तारीख पर जारी नहीं किया जा सकेगा, क्योंकि राज्य की बराक घाटी में भारी बाढ़ आयी हुई है.  शीर्ष अदालत में एक याचिका भी दायर की गयी है जिसमें अंतिम मसौदा तैयार करने के लिए और समय देने की मांग की गयी है.  हजेला ने कहा था कि मसौदे को 30 जून तक प्रकाशित करना संभव नहीं हो पायेगा क्योंकि बराक घाटी के कचार , करीमगंज और हैलाकांडी जिलों में बाढ़ आयी है.

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मौलिक भारतीयों के नाम राज्य के नागरिकों की सूची में शुमार किये जायेंगे

करबी आंगलोंग और होजई में भी बाढ़ आयी है.  राज्य में बाढ़ से सात जिलों में पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं और अब तक 25 लोगों की जान जा चुकी है.  असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा था कि सभी मौलिक भारतीयों के नाम राज्य के नागरिकों की सूची में शुमार किये जायेंगे.  उन्होंने इस आशंका से इनकार किया था कि एनआरसी के प्रकाशन के बाद हिंसा हो सकती है .  उन्होंने कहा था कि किसी भी तरह के हालात से निपटने के लिए राज्य भर में पर्याप्त बल को तैनात किया गया है. एनआरसी का पहला मसौदा दिसंबर माह के अंत में प्रकाशित किया गया था.  शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि 31 दिसंबर 2017 तक पहला मसौदा तैयार हो जाना चाहिए.

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