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सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में वीवीपीएटी पर्चियों की गणना की कांग्रेस की याचिका ठुकराई

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New Delhi: उच्चतम न्यायालय ने गुजरात विधान सभा चुनाव में प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में ईवीएम में डाले गये मतों के साथ ही कम से कम 20 प्रतिशत कागज की पचिर्यों की इसके साथ ही गणना करने का आग्रह करते हुए दायर राज्य कांग्रेस की याचिका पर विचार से आज इंकार कर दिया. शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इसमें उस समय तक हस्तक्षेप नहीं कर सकता जब तक निर्वाचन आयोग का ईवीएम-वीवीपीएट कागज की पर्ची को प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में एक मतदान केन्द्र तक सीमित करने का निर्णय ‘मनमाना’, ‘गैरकानूनी’ अथवा ‘दुर्भावनापूर्ण’ साबित नहीं हो जाये.

चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद ही चुनाव सुधारों पर बहस
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की खंडपीठ ने गुजरात कांग्रेस के नेता मोहम्म्द आरिफ राजपूत को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुये उन्हें बाद में चुनाव सुधारों के बारे में विस्तृत याचिका दायर करने की छूट प्रदान कर दी. शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य में चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद ही चुनाव सुधारों के बारे में बहस हो सकती है. राजपूत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ईवीएम से हुये मतदान के साथ ही प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम 20 प्रतिशत मतदान केन्द्रों की वीवीपीएटी कागज की पर्चियों की गणना चुनाव की निष्पक्षता के प्रति जनता को फिर से आश्वस्त करेंगी.

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पीठ ने यह जानना चाहा कि याचिकाकर्ता ने किस हैसियत से याचिका दायर की है और सिंघवी से पूछा कि वह किसका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह गुजरात में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के सचिव हैं. इस पर पीठ ने सिंघवी से कहा कि उनका मुवक्किल तो यहां निजी हैसियत से आया है. सिंधवी ने कहा, ‘‘राज्य में पार्टी का एक पदाधिकारी हूं.’’ पीठ ने कहा कि प्रत्याशी को चुनाव अधिकारी के समक्ष गणना किये गये मतों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है. पीठ ने कहा कि यह न्यायालय इसमें उस समय तक हस्तक्षेप नहीं कर सकता जबतक ईवीएम-वीवीपीएटी कागज पर्ची के प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के एक मतदान केन्द्र में औचक जांच का फैसला मनमाना, गैरकानूनी या दुर्भावनापूर्ण साबित नहीं हो जाये.

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