न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में वीवीपीएटी पर्चियों की गणना की कांग्रेस की याचिका ठुकराई

16

New Delhi: उच्चतम न्यायालय ने गुजरात विधान सभा चुनाव में प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में ईवीएम में डाले गये मतों के साथ ही कम से कम 20 प्रतिशत कागज की पचिर्यों की इसके साथ ही गणना करने का आग्रह करते हुए दायर राज्य कांग्रेस की याचिका पर विचार से आज इंकार कर दिया. शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इसमें उस समय तक हस्तक्षेप नहीं कर सकता जब तक निर्वाचन आयोग का ईवीएम-वीवीपीएट कागज की पर्ची को प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में एक मतदान केन्द्र तक सीमित करने का निर्णय ‘मनमाना’, ‘गैरकानूनी’ अथवा ‘दुर्भावनापूर्ण’ साबित नहीं हो जाये.

चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद ही चुनाव सुधारों पर बहस
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की खंडपीठ ने गुजरात कांग्रेस के नेता मोहम्म्द आरिफ राजपूत को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुये उन्हें बाद में चुनाव सुधारों के बारे में विस्तृत याचिका दायर करने की छूट प्रदान कर दी. शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य में चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद ही चुनाव सुधारों के बारे में बहस हो सकती है. राजपूत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ईवीएम से हुये मतदान के साथ ही प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम 20 प्रतिशत मतदान केन्द्रों की वीवीपीएटी कागज की पर्चियों की गणना चुनाव की निष्पक्षता के प्रति जनता को फिर से आश्वस्त करेंगी.

इसे भी पढ़ें : देखिये-सुनिये सीएम रघुवर दास ने सदन में विपक्षी विधायकों को कौन सी गाली दी
पीठ ने यह जानना चाहा कि याचिकाकर्ता ने किस हैसियत से याचिका दायर की है और सिंघवी से पूछा कि वह किसका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह गुजरात में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के सचिव हैं. इस पर पीठ ने सिंघवी से कहा कि उनका मुवक्किल तो यहां निजी हैसियत से आया है. सिंधवी ने कहा, ‘‘राज्य में पार्टी का एक पदाधिकारी हूं.’’ पीठ ने कहा कि प्रत्याशी को चुनाव अधिकारी के समक्ष गणना किये गये मतों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है. पीठ ने कहा कि यह न्यायालय इसमें उस समय तक हस्तक्षेप नहीं कर सकता जबतक ईवीएम-वीवीपीएटी कागज पर्ची के प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के एक मतदान केन्द्र में औचक जांच का फैसला मनमाना, गैरकानूनी या दुर्भावनापूर्ण साबित नहीं हो जाये.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें
स्वंतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकट लगातार गहराता जा रहा है. भारत के लोकतंत्र के लिए यह एक गंभीर और खतरनाक स्थिति है.इस हालात ने पत्रकारों और पाठकों के महत्व को लगातार कम किया है और कारपोरेट तथा सत्ता संस्थानों के हितों को ज्यादा मजबूत बना दिया है. मीडिया संथानों पर या तो मालिकों, किसी पार्टी या नेता या विज्ञापनदाताओं का वर्चस्व हो गया है. इस दौर में जनसरोकार के सवाल ओझल हो गए हैं और प्रायोजित या पेड या फेक न्यूज का असर गहरा गया है. कारपोरेट, विज्ञानपदाताओं और सरकारों पर बढ़ती निर्भरता के कारण मीडिया की स्वायत्त निर्णय लेने की स्वतंत्रता खत्म सी हो गयी है.न्यूजविंग इस चुनौतीपूर्ण दौर में सरोकार की पत्रकारिता पूरी स्वायत्तता के साथ कर रहा है. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इसमें आप सब का सक्रिय सहभाग और सहयोग हो ताकि बाजार की ताकतों के दबाव का मुकाबला किया जाए और पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा करते हुए जनहित के सवालों पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए. हमने पिछले डेढ़ साल में बिना दबाव में आए पत्रकारिता के मूल्यों को जीवित रखा है. इसे मजबूत करने के लिए हमने तय किया है कि विज्ञापनों पर हमारी निभर्रता किसी भी हालत में 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो. इस अभियान को मजबूत करने के लिए हमें आपसे आर्थिक सहयोग की जरूरत होगी. हमें पूरा भरोसा है कि पत्रकारिता के इस प्रयोग में आप हमें खुल कर मदद करेंगे. हमें न्यूयनतम 10 रुपए और अधिकतम 5000 रुपए से आप सहयोग दें. हमारा वादा है कि हम आपके विश्वास पर खरा साबित होंगे और दबावों के इस दौर में पत्रकारिता के जनहितस्वर को बुलंद रखेंगे.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Open

Close
%d bloggers like this: