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सुपरसोनिक मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ का पोखरण में किया गया सफल परीक्षण

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Jaipur :   गुरुवार 22 मार्च की सुबह भारतीय सेना ने Su-30  यानी सुखोई-30  से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल दाग कर इतिहास रच दिया है. समाचार एजेंसी एएनआई ने जानकारी दी है कि राजस्थान के पोखरन परीक्षण रेंज से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का सफल परीक्षण सेना ने किया है. मिसाइल की गति ध्वनि की गति से 2.8 गुना ज़्यादा (Mach 2.8) है, और इसकी रेंज 290 किलोमीटर है. बताया गया है कि भारत और रूस द्वारा मिलकर बनायी गयी ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज अब 400 किलोमीटर तक बढ़ायी जा सकती है.   इसका कारण  वर्ष 2016 में भारत के मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) का पूर्ण सदस्य बन जाने के चलते उस पर लागू होने वाली कुछ तकनीकी पाबंदियां हटा लिया जाना है.  बता दें कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों को 40 सुखोई युद्धक विमानों में जोड़ने का काम जारी है,  

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2006  में ही भारतीय नौसेना तथा थलसेना का हिस्सा बन चुका है ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 2006  में ही भारतीय नौसेना तथा थलसेना का हिस्सा बन चुकी हैं. लेकिन नया वर्जन ज़्यादा कारगर बताया गया है,  क्योंकि धीमी गति से चलने वाले युद्धक पोतों के स्थान पर इसे तेज़ गति से उड़ने वाले सुखोई से दागा जा सकता है, जो लक्ष्य की ओर 1,500 किलोमीटर तक उड़ने के बाद मिसाइल दाग सकता है, और फिर लक्ष्य तक बकाया 400 किलोमीटर मिसाइल खुद तय करती है. सुखोई, यानी Su-30 और ब्रह्मोस मिसाइलों का यह गठजोड़ हो जाने का अर्थ है कि अब भारतीय वायुसेना किसी भी लक्ष्य को मिनटों में ध्वस्त कर सकती है, जबकि युद्धक पोत से दागे जाने के लिए पहले पोत को लक्ष्य की दिशा में समुद्र में काफी आगे बढ़ना होता था, जिसमें काफी समय लगता है. 

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ब्रह्मपुत्र तथा मोस्क्वा नदी के नाम पर है ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 

भारत और रूस ने मिलकर  ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल को विकसित किया है.  इसका नाम दो नदियों ब्रह्मपुत्र तथा मोस्क्वा को जोड़कर बनाया गया है.  दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के हवा से लॉन्च किये जाने वाले संस्करण का सुखोई-30 लड़ाकू विमान से सफल परीक्षण 22 नवंबर को किया गया था. यह परियोजना 2020 तक पूरी हो जायेगी.

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