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सीबीएसई के गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे रांची के निजी स्‍कूल, कैसे रुकेगी मनमानी

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Subhash Shekhar

Ranchi, 06 December: सीबीएससी से मान्‍यता प्राप्‍त निजी स्‍कूल शैक्षणिक सत्र के बीच में कभी भी फीस नहीं बढ़ा सकते हैं. जब भी निजी स्‍कूल बच्‍चों की पढ़ाई के लिए फीस बढ़ायेंगे इसके लिए राज्‍य सरकार के शिक्षा विभाग से उसकी मंजूरी जरूर लेंगे. निजी स्‍कूलों में एडमिशन के दौरान किसी भी तरह का डोनेशन भी गैरकानूनी है. इन सभी शर्तों को सभी निजी स्‍कूलों को सीबीएसई से मान्‍यता प्राप्‍त करने के दौरान स्‍वीकार करना जरूरी होता है. यदि कोई भी निजी स्‍कूल इन नियमों के खिलाफ स्‍कूल फीस की बढ़ोतरी करता है तो अर्थ दंड का प्रावधान है और लगातार दूसरी गलती पुनरावृति होती है तो स्‍कूल की मान्‍यता भी रद्द हो सकती है. हैरानी की बात है कि झारखंड में सीबीएससी के इस गाइडलाइन का अब तक अनुपालन नहीं हुआ. झारखंड सरकार के पास निजी स्‍कूलों के फीस को नियंत्रित करने के लिए 17 सालों में कोई कानून नहीं बना. इसका मतलब यह नहीं कि निजी स्‍कूलों के किसी तरह के फी की बढ़ोतरी नहीं की. निजी स्‍कूलों जब मन किया खूब फी बढ़ाये और उन पर कोई कार्रवाई भी नहीं हुई.

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नये कानून से भी नहीं रुकेगी स्‍कूलों की मनमानी

अभिभावक संघर्ष समिति के अध्‍यक्ष अमृतेश पाठक की मानें तो झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम के प्रभावी होने के बाद भी निजी स्‍कूलों की मनमानी और फीस बढ़ोतरी पर नकेल लगाना आसान नहीं होगा. उन्‍होंने इस नये अधिनियम के स्‍कूल स्‍तरीय समिति की संरचना और गठन पर सवाल उठाया है. 10 प्रतिशत स्‍कूल फीस बढ़ोतरी के लिए जो स्‍कूल समिति में प्रेसीडेंट मैनेजमेंट के लोग होते हैं, स्‍कूल के प्रिंसिपल को सेक्रेटरी बनाने का प्रावधान है. स्‍कूल के तीन शिक्षक और 4 अभिभावकों को इस समिति में जगह दी गई है. इस समिति में स्‍कूल प्रबंधन का पलड़ा हमेशा भारी रहेगा. जो 4 अभिभावक इस स्‍कूल समिति में रहते हैं वह स्‍कूल के बाकी अभिभवकों को पता भी नहीं होता है. फिर वो कैसे सभी अभिभावकों का प्रतिनिधित्‍व करते हैं.

अमृतेष पाठक सीबीएसई के गाइडलाइंस का हवाला देते हुए बताते हैं कि जब कोई स्‍कूल प्रबंधन घाटे में चलने लगे तभी वह निजी स्‍कूल बच्‍चों की फीस बढ़ा सकता ह.। मेरी जानकारी में रांची में अभी तक ऐसा कोई स्‍कूल नहीं है जो किसी साल घाटे में रहा है. बावजूद इसके हर साल इन स्‍कूलों की फीस बढ़ती है.

अभिभावकों की राय

रातू रोड निवासी अजय कुमार महतो बताते हैं कि मेरे दो बच्‍चे ऐसे स्‍कूल में पढ़ते हैं जो किसी बोर्ड से मान्‍यता प्राप्‍त नहीं है. यहां स्‍कूल वाले कभी भी फीस बढ़ा देते हैं. जब भी फीस बढ़ती है उसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी जाती है. स्‍कूल बच्‍चों की फीस बढ़ाने से पहले कभी यह नहीं बताती है कि क्‍यों बढ़ाई जा रही है.  

यशवंत मिश्रा बताते हैं कि स्‍कूलों की मनमानी बेलगाम हो गई है. स्‍कूलों के लिए सीबीएसई ने पहले से ही कई गाइडलाइंस बनाये हुए हैं. इसके बावजूद इसका खुल्‍लम-खुल्‍ला उल्‍लंघन किया जाता है. जब तक सरकारी सिस्‍टम दुरूस्‍त होकर उनपर कार्रवाई न करे सिर्फ कानून बनने से सुधार नहीं हो सकता है.

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शीतकालीन सत्र में विधेयक पास करे सरकार

अभिभावक मंच के अध्‍यक्ष अजय राय झारखंड में स्‍कूलों के लिए नियमावली बनने से काफी खुश हैं। उन्‍होंने इसे पिछले तीन साल की लड़ाई का नतीजा बताया है और सरकार के प्रति आभार व्‍यक्‍त किया है. अजय राय बताते हैं कि कोर्ट के निर्देश पर इसके लिए एक कमिटी गठित कर ड्राफ्ट तैयार की गई थी. निजी स्‍कूलों के लिए ड्राफ्ट तैयार करने के लिए चार राज्‍यों दिल्‍ली, महाराष्‍ट्र, कर्नाटक और राजस्‍थान के नियमावली का अध्‍ययन किया गया था और एक बेहतर ड्राफ्ट तैयार कर झारखंड सरकार को सौंपा गया था. स्‍कूलों के मनमाने बेसिक फीस के सवाल पर उन्‍होंने बताया कि सभी स्‍कूल शिक्षा की गुणवत्‍ता और सुविधाओं के अनुसार अपनी फीस नियमानुकूल तय करते हैं, जो सीबीएससी गाईडलाइन में दिया हुआ है, इसलिए सभी निजी स्‍कूलों के फीस के स्‍ट्रक्‍चर में अंतर भी होता है.  

क्‍या कहते हैं अधिकारी

रांची जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि हमारे पास कोई कानून नहीं होता था, इसलिए निजी स्‍कूल पर नकेल नहीं कस पाते थे. नियम के बन जाने से अब कार्रवाई भी होगी.

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