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सीएम मजाक मेंः पैसवा दिया नहीं, तो दुकान कहां… शिकायतकर्ताः बाजार सचिव से बोल कर आए हैं, सीएम साहब से पैसवा लेंगे और आपको देंगे

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Ranchi, 28 November: धनबाद जिले के एक फल विक्रेता संजीव कुमार ने सीएम जनसंवाद में सीएम के सामने धनबाद बाजार समिति के सचिव शिव जी तिवारी पर तीन लाख रिश्वत मांगने का आरोप लगाया. संजीव कुमार ने कहा कि बाजार समिति का मैं लाइसेंसधारी हूं. मेरा लाइसेंस नंबर एक है. फिर भी मुझे सचिव दुकान नहीं आवंटित करते हैं. जब भी उनसे दुकान मांगने जाता हूं, वो कहते हैं कि पहले तीन लाख रुपए जमा करो तब जाकर दुकान मिलेगी. इसपर सीएम ने कहा कि क्यों नहीं एसीबी के साथ मिलकर रिश्वत मांगने वाले को गिरफ्तार करवाते हो.

इसपर शिकायतकर्ता ने कहाः वो पैसा कैश में नहीं मांगते हैं. कहते हैं चेक बैंक में जमा करवा दो. वो भी जिस अकाउंट में कहेंगे उसमें. उसके बाद कोई पूजा सिंघल पुरवार है उससे बात कर दुकान दिलवा दूंगा (पूजा सिंघल बगल में ही बैठी थी).

शिकायकर्ता ने सीएम से कहाः हुजूर हमें क्या दुकान नहीं मिलेगी. इसपर सीएम ने मजाक से कहाः पैसवा तुम देबे नहीं किए तो दुकान कहां से….

इस पर शिकायतकर्ता ने कहाः इस बार सचिव को बोल कर आए हैं कि सीएम से पैसा लेकर आएंगे और आपको देंगे. बात को सुनकर खचाखच भरा सूचना भवन का कॉन्फ्रेंस हॉल हंसी और ठहाकों से गूंज उठा.    

सीएम ने इस पर सचिव को तुरंत कार्रवाई करने कहा. कहाः हर बाजार समिति का रिव्यू कीजिए.

सचिव अगर डीसी को कोई भी काम भेजें तो उसका डेडलाइन तय करें – सीएम

राजधानी रांची के सूचना भवन का कॉन्फ्रेंस हॉल खचाखच भरा हुआ था. मौका था सीएम जनसंवाद का. सीएम ने पहले से तैयार 19 शिकायतों को सुना. करीब-करीब हर शिकायत में सचिव स्तर के अधिकारी जवाब में यह कहते कि जिला से काम होते ही शिकायत का समाधान हो जाएगा. शिकायत के जुड़े विभाग के सचिव की कोशिश यह होती थी कि मामले को जिला के ठीकरे फोड़ दी जाए. तो जिले में बैठे डीसी का कहना होता था कि सचिवालय से जवाब नहीं आया है. इस कारण समाधान नहीं हो पा रहा है. तमाम इस तरह के मामले पर सीएम ने सचिवों को निर्देश दिया कि डीसी से अगर कोई जवाब मांगा जाए, या किसी तरह का कोई काम उन्हें सौंपा जाए. तो उसकी एक डेडलाइन तय होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर यह कह कर सचिव बचते रहेंगे कि जैसे ही जिले से जवाब आएगा काम हो जाएगा, तो जवाब कभी नहीं आएगा और काम कभी नहीं होगा. डीसी को जिले में हजारों काम होते हैं. वो किसी एक काम का जवाब देने के लिए नहीं बैठा हुआ है. इसलिए हर काम का डेडलाइन तय करें. डीसी को हर जवाब एक हफ्ते के अंदर सौंपने को कहा जाए.

कम अनुपालन करने वाले छह जिलों के डीसी से सीएम ने की बात

हर जनसुनवाई में छह ऐसे जिलों के नाम तय किया जाता है, जहां सबसे कम अनुपालन हो रहा है. इस बार इस लिस्ट में धनबाद, चतरा, रामगढ़, लातेहार, रामगढ़ और गिरिडीह शामिल थे. सीएम ने बारी-बारी सभी डीसी से बात की. हालांकि कुछ डीसी ने यह शिकायत की कि राज्य स्तर से ऑनलाइन सुधार ना किये जाने की वजह से वो कम अनुपालन करने वाले जिलों में शामिल हो गए हैं. वहीं दूसरे उपायुक्तों ने कहा कि जल्द ही वो अनुपालन करने की रफ्तार को बढ़ाएंगे और अपने रैंकिग सही करेंगे. सीएम ने सभी छह डीसी से कहा कि जितनी जल्दी हो काम करने की रफ्तार को बढ़ाए.

सीएम ने जनसुनवाई में क्या-क्या कहा

– लातेहार डीसी से सीएमः कॉम्पिटिशन की बावन हर जिले के डीसी के अंदर होना चाहिए. आप काम ज्यादा कीजिए बोलिए कम.

– गिरिडीह डीसी से सीएमः जनता तो जागरुक है, शासन को भी जागरुक रहना चाहिए.

– सभी डीसी से सीएमः हफ्ते में एक दिन ऐसा तय कीजिए जिस दिन दो से तीन घंटा उपायुक्त सिर्फ दिव्यांग और विधवा बहनों की शिकायत सुनेंगे.

– चाईबासा डीसी से सीएमः डीसी साहब आप मुझे पहले ज्वाइंट एकाउंट का मतलब समझाएं.

– देवघर डीसी से सीएमः जिसे भी हटाने की सोचते हो उसे पहले बसाना है, जिनके घर उजाड़ रहे हो उसे पीएम आवास योजना से आवास दिलाओ.

– गढ़वा के एक शिकायतकर्ता सेः जो तुम बोलोगे वही करेंगे क्या, संयुक्त सचिव से जांच कराते हैं ठीक है.

– कोडरमा के शहीद की पत्नी को नौकरी और जमीन देने के मामले में: सचिव से कहाः आज के आज नौकरी आवंटित करो. डीसी से कहाः पीड़ित परिवार को जमीन गांव से दूर नहीं बल्कि शहर के पास दो. सिर्फ खानापूर्ति करने के चक्कर में मत रहो.

– हजारीबाग डीसी सेः कोडरमा और हजारीबाग दोनों जगह एक ही सरकार है. पास का जिला है कोडरमा कोऑर्डिनेट किया करो. जब सरकार एक है तो प्रशासन भी एक है.

– अपने प्रधान सचिव सेः माडा के सभी कर्मियों को वीआरएस दो. जितनी नौकरी बची है, वेतन दो और बोलो घर जाकर बैठें. बिना मतलब रोज-रोज हंगामा करते रहते हैं.

– शिक्षा सचिव सेः क्या सारी जिम्मेदारी सरकार की ही है, क्या जिस स्कूल से शिक्षक और प्रिंसिपल वेतन पा रहे हैं. उस स्कूल की सफाई के लिए दो-दो रुपया मिला कर शौचालय साफ नहीं करवा सकते. अगर शौचालय टूट गया है तो मरम्मत नहीं करवा सकते हैं.

– डीएसई सेः सिर्फ ऑफिस में बैठ कर कुर्सी नहीं तोड़े, क्षेत्र में जाए, शिक्षकों से मिलकर हर समस्या का निदान ढूंढे, एक टूअर डायरी बनाए, उसे अपडेट करें, सचिवालय की तरफ से टाइम-टू-टाइम टूअर डायरी की जांच की जाए.

– गृह सचिव सेः उग्रवादी हमले में जितने लोग मारे गए हैं, उसका रिव्यू करें, सभी मामलों को जल्द-से-जल्द निबटाने की कोशिश करें. राज्य भर में ऐसे करीब 50 मामले पेंडिंग हैं. क्या नौकरी तब दोगे जब रिटायरमेंट की उम्र हो जाएगी.   

शहरी लोगों के बीच नहीं बल्कि सुदूर गांव तक पहुंचाए कंबलः सीएम

सीएम संवाद खत्म होते ही सीएम ने कहाः सभी डीसी सुनें. झारखंड बनने के बाद से पहली बार झारक्राफ्ट में काम करने वाली महिला बहनों के हाथों से तैयार करीब पौने नौ लाख कंबर राज्य भर में बंटना है. इनमें से करीब पांच लाख कंबल जिलों को उपलब्ध करा दिए गए हैं. डीसी कंबल का वितरण वहां के जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर जरूरतमंद लोगों के बीच करें. सिर्फ शहर में ही नहीं बल्कि सुदूर गांव तक जाकर जिन्हें जरूरत है उन्हें कंबल दें. 

 

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