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सीएम जनसंवाद का सच है सुनेजा बेवा की कहानी, न्याय तो दूर कार्रवाई भी नसीब नहीं, और अब सुनवाई के लिए नंबर ही नहीं आता

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Akshay Kumar Jha

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Ranchi, 28 November:  हर बार सीएम जनसंवाद की शुरुआत में कुछ ऐसे लोगों को मीडिया के सामने लाया जाता है, जो सीएम का धन्यवाद करते हैं. धन्यवाद इसिलए क्योंकि जनसंवाद में शिकायत करने के बाद उनका काम हो गया. वो एक रटी-रटायी स्क्रिप्ट भी पढ़ते हैं. लेकिन, उसी वक्त सूचना भवन के बाहर कुछ ऐसे लोग भी खड़े होते हैं, जो सीएम से सिर्फ ये कहना चाहते है कि “साहब आपका आदेश होने के बाद भी किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई.” कुछ ऐसा ही माहौल मंगलवार को भी सूचना भवन के बाहर था. इस कड़ाके की ठंड में साहेबगंज से रात भर ट्रेन के जनरल डब्बे में सफर करते हुए विधवा महिला सुनेजा बेवा अपने इकलौते बेटे को पतली सी चादर से गर्मी देने की कोशिश करते हुए, बस इस आस में रांची आयी, कि इस बार के सीएम जनसंवाद में जब उसे बोलने का मौका मिलेगा, तो वो अपनी दिल की सारी बात सीएम के सामने रख देगी. वो सोच रही थी कि क्या पता इस बार मेरा काम हो जाए. लेकिन, जैसे ही गेट पर उसे कहा गया कि इस बार तो उसका नाम लिस्ट में है ही नहीं, उसके सारे आरमां चकनाचूर हो गए. वो हर चेहरे को इस भाव से देखने लगी जैसे किसी चेहरे को उसके उतरे हुए चेहरे पर तरस आ जाए. लेकिन, ऐसा कुछ नहीं हुआ.

रात में कहा गया था आपका नाम लिस्ट में है, सुबह बताएंगे

करीब एक साल पहले सुनेजा बेवा को किसी मंगलवार के ही दिन अपनी बात सीएम के सामने रखने का मौका मिला था. उसके साथ हुए हादसे के बाद शायद वही वो दिन था, जिस दिन उसने अपनी किस्मत को कोसा नहीं था. उस दिन उसे भरोसा, आश्वासन, तसल्ली और हिम्मत सब एक साथ मिली. उसके साथ हुए हादसे को सुनते हुए सीएम ने तुरंत कार्रवाई का आदेश दिया. हर अधिकारी ने सीएम के आदेश के बाद हुंकारी भरी. लेकिन, उसी दिन के बाद से उसने फिर से एक बार अपने लिए ये तय किया कि वो वाकई बदनसीब है. हर सोमवार वो अपने मोबाइल को अपने आस-पास ही रखती. मोबाइल की हर घंटी पर चौंक कर देखना अब उसकी आदत में शुमार हो चुका है. लेकिन, जनसंवाद से उसे दोबारा कभी कॉल नहीं आया. इस सोमवार उसने खुद से फोन किया. जनसंवाद केंद्र से उसे जवाब मिला कि हां इस बार उसका नाम है. लेकिन, सुबह क्लियर होगा. अब ऐसे में वो अपने-आप को कैसे रोक पाती. सुबह क्लियर होगा तो कैसे वो एक घंटे से साहेबगंज से रांची आ जाएगी. यही सब सोच कर वो रात को ही चल पड़ी.

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मेरे पति की हत्या एक बाहुबली ने कर दी हैः सुनेजा बेवा

सुनेजा बेवा का कहना है कि चार साल पहले किसी पार्टी से जुड़े एक बाहुबली ने उसके पति की हत्या कर दी. पुलिस से उसे किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली. एक साल पहले सीएम जनसंवाद में उसने शिकायत की. सीएम की तरफ से उसे बुलावा मिला. उसने जनसंवाद में अपनी सारी बात रख दी. सीएम ने तत्काल साहेबगंज के  एसपी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया. कार्रवाई हुई. पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर लिया. बस बात यहीं खत्म हो गयी. एक साल बीतने को है. सीएम जनसंवाद के बाद वो अपने भाई के साथ अधिकारियों के चक्कर काट रही है. पांच बार सीएम सचिवालय से कार्रवाई के लिए आदेश जा चुका है. लेकिन, एक बार भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. और आखिरी सच ये भी कि मंगलवार की रात फिर से एक बार इस कड़ाके की ठंड में वो हताश, मायूस और बेसहारापन महसूस करते हुए. ट्रेन के जनरल डब्बे में अपनी किस्मत को कोसते हुए. वही पतली सी चादर में अपने और अपने बेटे के लिए गर्मी तलाशते हुए, साहेबगंज पहुंच जाएगी.     

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