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सीएम के पीए अंजन सरकार की शादी और रघुवर दास का असम दौरा महज एक संयोग !

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Ranchi : क्या इसे महज एक संयोग कह सकते हैं? कह भी सकते हैं. सीएम गए थे असम में सौ साल पहले झारखंड छोड़ चुके आदिवासियों का भला करने और उन्हें मालूम चला कि उनके पीए अंजन सरकार की शादी है. या फिर सीएम गए थे अपने पीए अंजन सरकार की शादी में और उन्हें मालूम चला कि यहां सौ साल पहले झारखंड छोड़ कर आए आदिवासियों को एसटी का दर्जा नहीं मिल रहा है. अगर ये दोनों बात गलत है, तो हो सकता है कि सीएम रघुवर दास आठ लोगों का वीवीआईपी काफिला लेकर. करीब पांच लाख रुपए हवाई जहाज सेवा पर खर्च कर. अक्षयपात्र का मॉडल किचन देखने गए हों. अगर इन तीनों बात को आप बेतुका कहेंगे तो ये साबित होता है कि सीएम का असम दौरा और उनके पीए अंजन सरकार की शादी महज एक संयोग है. ये सारी बात इसलिए कही जा रही है कि क्योंकि सीएम कार्यालय का दस्तावेज बता रहा है कि सीएम किसी लोकल प्रोग्राम में शामिल होने गए थे. ना ही उनका कोई प्रोग्राम असम के उच्च अधिकारियों से मिलने का था और ना ही किसी किचन शेड देखने का और किसी शादी में शामिल होने का तो हरगिज नहीं.

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क्या कहता है सीएम कार्यालय का दस्तावेज

सीएम कार्यालय के टुअर प्रोग्राम के मुताबिक सीएम रघुवर दास दोपहर 1:40 में विधानसभा से निकले. 2.00 बजे रांची एयरपोर्ट से गुवाहाटी के लिए निकले. दो घंटे की हवाई यात्रा के बाद असम पहुंचे. करीब चार बजे वो गुवाहाटी के स्टेट गेस्ट हाउस पहुंचे. उसके बाद उनके टुअर प्रोग्राम में लिखा है कि वो किसी लोकल प्रोग्राम में शामिल होंगे. फिर सुबह 10.20 में गुवाहाटी से उड़ान और करीब 12 बजे रांची. सीएम रघुवर दास का कार्यालय की तरफ से तय प्रोग्राम ये था. तो ऐसे में कहा ही जा सकता है कि बाकी जो भी हुआ वो महज संयोग था.

हवाई सेवा पर खर्च हुए करीब पांच लाख सरकारी रुपए

सीएम रघुवर दास और उनके वीवीआईपी दल स्पाइन एयर की सेवा लेकर असम गए थे. ये एयर लाइंस एक घंटे के उड़ान का एक लाख रुपए चार्ज करती है. चार घंटे से ज्यादा स्पाइन एयर ने ऊड़ान भरी. करीब पांच लाख का बिल हुआ. ये बताना लाजिमी है कि सीएम के इस संयोग भरे दौरे का खर्च सरकारी खजाने से हुआ.

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लेकिन पीआरडी विभाग का कहना है कि

मुख्यमंत्री की पहल पर झारखंड के संताल और उरांव आदिवासी जो पिछले सौ वर्ष से अधिक समय से असम में रह रहे हैं. असम के चाय बागानों में काम कर रहे हैं. कई पीढ़ियों से वहीं बस गए हैं. उन्हें बहुत जल्द ही असम के अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त होगा. मामले को लेकर सीएम ने असम के मुख्य सचिव, कार्मिक सचिव तथा टी ट्राइब के प्रधान सचिव ने मुलाकात की. इसके बाद मुख्यमंत्री ने गुवाहाटी में अक्षयपात्र किचन का जायजा लिया. अक्षय पात्र वही एनजीओ है जिसे रांची जिले में सिर्फ एक रुपए में 62.26 एकड़ जमीन दे दी गयी है.

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