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सीएम की बीजेपी विधायकों ने नहीं सुनी, स्पीकर के चार बार दोहराने के बाद भी लटका स्कूली फीस में वृद्धि का मामला

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Ranchi : झारखंड विधानसभा शीतकालीन सत्र का तीसरा दिन कई मायनों में खास रहा. सदन की कार्यवाही खत्म होने से पहले सदन के अंदर ऐसा कुछ हुआ जो शायद ही कभी किसी राज्य के विधानसभा में होता हो. सदन की कार्यवाही दिन में तीन बार स्थगित की गयी. आखिरी बार जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो दिन भर सदन में अनुपस्थित रहे सीएम रघुवर दास ने सदन में एंट्री मारी. विपक्ष भूमि अधिग्रहण बिल और स्थानीय नीति को लेकर लगातार नारेबाजी कर रहा था. शोर-गुल के माहौल में सदन की कार्यवाही चल रही थी. संसदीय कार्य मंत्री सरयू राय ने झारखंड विनियोग (संख्या-04) विधेयक, 2017 सदन में रखा और ध्वनिमत से पास हो गया. फिर भू-राजस्व एवं खेल मंत्री अमर बाउरी ने झारखंड राज्य खेल विश्वविद्यालय विधेयक, 2017, झारखंड अनिवार्य विवाह निबंधन विधेयक, 2017 और कोर्ट फीस (झारखंड संशोधन) विधेयक 2017 का प्रस्ताव सदन में रखा. सभी विधेयक शोर और हंगामे के बीच पास हो गए. लेकिन, जब शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने झारखंड शिक्षा न्यायाधिकार (संशोधन) विधेयक, 2017 सदन में रखा तो, सच मानिए कुछ ऐसा रोमांच देखने को मिला जैसे क्रिकेट का एकदिवसीय मैच हो. आखिरी ओवर और जीतने के लिए बस एक रन चाहिए, वो भी चार गेंदों पर. फिर भी मजबूत टीम हार जाए.

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राजनीति में डेब्यू करने वाले विधायक बादल पत्रलेख के सामने बीजेपी हार गयी

जैसे ही मंत्री नीरा यादव ने झारखंड शिक्षा न्यायाधिकार (संशोधन) विधेयक, 2017 सदन में रखा. मामला गर्म हो गया. विधेयक में कुछ संशोधन के लिए प्रस्ताव कांग्रेसी विधायक बादल पत्रलेख ने विधानसभा में दाखिल कर रखा था. श्री पत्रलेख का कहना था कि विधेयक को प्रवर समिति में भेजा जाए. श्री पत्रलेख ने पहला एतराज 10 फीसदी अधिकतम फीस वृद्धि पर जताया. दूसरा एतराज स्कूलों में किताबों के नहीं बेचे जाने को लेकर था. बहुमत में होने की वजह से ये दोनों वजहें सदन में खारिज हो गयी. तीसरा मामला था कि जिला स्तर पर जो समिति शिक्षा न्यायाधिकार (संशोधन) विधेयक के मुताबिक बननी है, उसमें विधायक सदस्य क्यों नहीं हैं. इसी पर पेंच फंसा और विधायक बादल पत्रलेख ने सदन का रुख ही बदल दिया.

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सीएम ने आंख दिखायी, दूसरे बीजेपी विधायकों ने डांटा, स्पीकर ने चार बार दोहराया

दरअसल कई बीजेपी विधायक श्री पत्रलेख के तीसरे संशोधन प्रस्ताव के मामले पर अंदर ही अंदर राजी थे. वो भी चाहते थे कि विधायक जिला समिति के सदस्य हों. स्पीकर ने जब पहली बार पूछा कि कितने विधायक पक्ष में हैं, तो लगभग सभी बीजेपी विधायकों ने विपक्ष के साथ हांमी भर दी. इस पर स्पीकर चौंके और सीएम ने विधायकों की तरफ देखा. टेक्निकली अगर एक भी मामले पर सदन में ज्यादा विधायक पक्ष में हां करते हैं, तो विधेयक प्रवर समिति में चला जाता. इसलिए स्पीकर ने दोबारा पूरे मामले को पढ़ा और फिर पूछा पक्ष में हां या ना. फिर से बीजेपी के कई विधायकों ने हां कर दिया. विपक्ष को बात समझ में आ गयी और अपनी मांगों को लेकर शोर करना बंद कर दिया. पूरा विपक्ष अब इसी मामले पर फोकस हो गया. बीजेपी के कई विधायक हां करने वाले विधायकों को डांटने लगे. इस पर मंत्री नीरा यादव से स्पीकर ने दो बार सफाई देने को कहा. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. स्पीकर ने तीसरी बार फिर से पूरे मामले को दोहराया. नतीजा वही, बीजेपी के चार से पांच विधायकों ने फिर से पक्ष में हां कर दिया.

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जैसे आखिरी बॉल पर हार गयी हो बीजेपी

आखिरी और चौथी बार जब स्पीकर ने पूरे मामले को दोहराया तो इस बार भी बीजेपी के दो से तीन विधायकों ने पक्ष में हांमी भर दी. विपक्ष सत्तधारी बीजेपी पर टूट पड़ा. स्पीकर को अपने अधिकार का इस्तेमाल करने का हवाला विपक्ष की तरफ से दिया जाने लगा. आखिर में सदन में बीजेपी की बहुमत होने के बावजूद विपक्ष का पलड़ा भारी पड़ा. स्पीकर को झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2017 को प्रवर समिति में भेजना पड़ा. स्पीकर ने प्रवर समिति से 15 दिनों के अंदर इस मामले पर जवाब देने को कहा है. मामले को लेकर विपक्ष और पत्रकार दीर्घा में बैठे पत्रकार जीतने वालों जैसी शक्ल बना रहे थे. वहीं सत्ता पक्ष को जवाब नहीं सूझ रहा था.  

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