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साहिबगंज: रैयतों ने रैली निकाल जताया विरोध, कहा- मर जायेंगे लेकिन सरकार को नहीं देंगे अपनी जमीन

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Sahebganj, 30 November: जिले में आज आदिवासी भूमि संरक्षण समिति के बैनर तले सागरमल योजना के तहत, बंदरगाह व गंगा पुल के बीच प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र व स्मार्ट सीटी बनाने को लेकर ग्रामीणों ने विरोध किया. दरअसल स्मार्ट सिटी बनाने के लिए 5000 एकड़ कृषि योग्य रैयती ज़मीन नहीं देने को लेकर ग्रामीणों ने रैली निकालकर प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में 39 गांवों के रैयत शामिल हुए. रैयतों ने  विशाल रैली को माधयम से अपनी मंशा को साफ कर दिया कि वह किसी भी कीमत पर अपनी कृषि योग्य भूमि सरकार को देकर विस्थापित नहीं होना चाहते हैं. इस रैली में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग अपने पूरे परिवार के साथ पारंपरिक हथियार लिये शामिल हुए.

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जान दें देंगे लेकिन अपनी जमीन नहीं देंगे – ग्रामीण 

वहीं रैयतों के द्वारा निकाली गयी रैली स्थानीय झंडा मेला मैदान से निकल कर जिला समाहरणालय पहुंचा और वहां उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया. इसके बाद रैली शहर भ्रमण करते हुऐ स्थानीय रेलवे मैदान में सभा में तब्दील हो गयी. रैयतों के इस आंदोलन का नेतृत्व बालदेव उरांव ने किया. इस मौके पर बालदेव ने कहा कि 39 मोजा के 5000 एकड़ कृषि योग्य भूमि को औद्योगिक हब व स्मार्ट सीटी के अधिग्रहण के लिये चिन्हित किया गया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो भी जमीन चिन्हित किये गये हैं, उनमें से ज़मीन के 90% रैयत आदिवासी है. इसके अलावा 10% रैयत गैरआदिवासी हैं और इनकी जीविका का मुख्य साधन कृषि और पशुपालन है. वहीं वीरेद्र मुर्मू ने कहा की जो ज़मीन सरकार ने चिन्हित किया है, वे सभी बहुफसली भूमि हैं. इससे आगे उन्होंने कहा कि, हम जान दे देंगे. अपनी  लेकिन ज़मीन नहीं देंगे. जबकि पौलुस मुर्मु ने कहा की सरकार मुआवजा एक बार देती है, जमीन हमें अनाज सालों भर देती है, हम मेहनत करगें और जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे.

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रैली में  मौजूद लोग

 रैली में बालदेव उरांव, गंगा सोरेन, होपन सोरेन, वीरेद्र मुर्मु, पौलुस सोरेन, बौका मुंडा के अलावा बड़ा तोफीर, शोलबंदा, बड़ा तेतरीया, छोटा तेतरीया, लोह्न्डा  व अन्य आदिवासी गाँव के लोग शामिल थे.

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