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सवाल के बदले नकद घोटाले में 11 पूर्व सांसदों पर 12 जनवरी से चलेगा मुकदमा

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News Wing New Delhi, 07 December: दिल्ली की एक अदालत ने 2005 के सवाल के बदले नकद घोटाला मामले में 11 पूर्व सांसदों पर गुरुवार को भ्रष्टाचार और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप तय किए. विशेष न्यायाधीश किरण बंसल ने 11 पूर्व सांसदों और एक अन्य व्यक्ति पर मुकदमा चलाने के आदेश दिए. यह मुकदमा 12 जनवरी से शुरू होगा. इस मामले में तत्कालीन सांसद वाई जी महाजन (भाजपा), छत्रपाल सिंह लोढ़ा (भाजपा), अन्ना साहेब एम के पाटिल (भाजपा), मनोज कुमार (राजद), चंद्र प्रताप सिंह (भाजपा), राम सेवक सिंह (कांग्रेस), नरेन्द्र कुमार कुशवाहा (बसपा), प्रदीप गांधी (भाजपा), सुरेश चंदेल (भाजपा), लाल चंद्र कोल (बसपा) और राजा रामपाल (बसपा) को आरोपी बनाया गया है.

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12 दिसंबर 2005 को प्रसारित हुआ था स्टिंग ऑपरेशन

दो पत्रकारों ने तत्कालीन सांसदों के खिलाफ एक स्टिंग ऑपरेशन किया था, जो 12 दिसंबर 2005 को एक निजी समाचार चैनल पर प्रसारित हुआ था. यह स्टिंग जिसमें संसद में सवाल पूछने के बदले में नकद लेने की बात सामने आई, इसे सवाल के बदले नकद घोटाला के नाम से जाना जाता है.

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सभी सांसदों को किया गया था संसद से निष्कासित

इसके बाद दिसंबर 2005 में लोकसभा ने 10 सदस्यों को निष्काषित कर दिया था, जबकि लोढ़ा को राज्य सभा से हटाया गया था. अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलों के समर्थन में सीडी और डीवीडी पेश की, जिसमें आरोपियों और अन्य के बीच हुई बातचीत कैद है. विशेष लोक अधिवक्ता अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि अदालत ने रामपाल के तत्कालीन निजी सहायक रविंद्र कुमार के खिलाफ भी आरोप तय किए हैं.

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आरोपी विजय फोगाट की हो चुकी थी मौत

एक अन्य आरोपी विजय फोगाट के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि उसकी मौत हो चुकी है. फोगाट ने इस मामले में कथित तौर पर एक बिचौलिए की भूमिका निभाई थी. अदालत ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत आपराधिक षड्यंत्र रचने और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप तय किए हैं.

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दिल्ली पुलिस ने 2009 में किया था आरोप पत्र दाखिल

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में वर्ष 2009 में आरोप पत्र दाखिल किया था. पूर्व सांसदों के अलावा दो पत्रकारों का भी नाम आरोप पत्र में शामिल किया गया था, जिनपर भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत कथित रूप से अपराध को बढ़ावा देने के आरोप थे. निचली अदालत ने उन्हें समन भेजा था, लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ जांच को रद्द कर दिया था.

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