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सरकार ने परमवीर का भी नहीं रखा सम्मान : अल्बर्ट एक्का के स्मारक पर बेरुखी क्यों ?

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News Wing Desk

शहीद को कब मिलेगा सम्मान ?

एक समय वो था जब लांसनायक अल्बर्ट एक्का की समाधि से स्मृति अवशेष के तौर पर अगरतला से मिट्टी लायी गई थी. भव्य आयोजन किया गया था. शहीद की पत्नी बलमदीना एक्का के लिए सरकार ने पलकें बिछायी थी. मगर ये तामझाम और सम्मान एक सियासी माइलेज वाला स्टंट के सिवा और कुछ न निकला. अगर ऐसा नहीं होता तो परमवीर चक्र विजेता शहीद अल्बर्ट एक्का का स्मारक उनके गुमला स्थित पैतृक गांव जारी में बनकर तैयार हो गया होता. मगर सरकारी तंत्र की बेरुखी ही है, जो उस स्थल पर अब तक एक ईंट भी नहीं जोड़ी जा सकी है, जहां शहीद की समाधि से लायी गई मिट्टी को रखा गया था. तंत्र की उदासीनता से अल्बर्ट एक्का के परिवार ही नहीं, जारी गांव के लोग भी दुखी हैं, लिहाजा अब सामाजिक स्तर पर जन समर्थन से धन जुटाकर स्मारक के निर्माण को लेकर अभियान शुरू होने जा रहा है. अभियान के तहत अल्बर्ट एक्का फाउंडेशन ने परमवीर अल्बर्ट एक्का के परिजनों समेत गांव वालों और विभिन्न संगठनों की सहायता से यह काम पूरा करने का संकल्प लिया है. शहीदों के मान-सम्मान तथा उनके गांवों में विकास को लेकर झारखंड में सरकार कई मौके पर प्रतिबद्धता जाहिर करती रही है, लेकिन हकीकत निराशाजनक है. परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का के स्मारक की नींव रखे जाने के 27 महीने बाद भी राज्य सरकार ने कोई पहल नहीं की. इस बेरुखी से शहीद के परिजन और ग्रामीणों को काफी तकलीफ हुई है.

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अल्बर्ट का स्मारक

जारी गांव में उमड़ा था सरकारी तंत्र

झारखंड की राजधानी रांची से 160 किलोमीटर दूर गुमला जिले में पहाड़ों-जंगलों से घिरा  है जारी गांव. साल 2015 के नवंबर में सरकार ने पहली दफा अगरतला स्थित अल्बर्ट एक्का के समाधि स्थल से वहां की मिट्टी मंगवाई थी. अल्बर्ट एक्का की शहादत के 44 साल बाद यह संभव हो सका था. 3 दिसंबर 2015 को अल्बर्ट एक्का की पुण्यतिथि पर मिट्टी भरा कलश उनके परिवार वालों को सौंपने के लिए रांची से गुमला ले जाया गया था. उस दिन जारी गांव में आयोजित सरकारी समारोह में मुख्यमंत्री के साथ सरकार की आदिवासी कल्याण मंत्री लुईस मरांडी, भाजपा के कई विधायक समेत सरकारी पदाधिकारी शरीक हुए थे. समारोह में अल्बर्ट की पत्नी बलमदीना एक्का को सरकार ने सम्मानित भी किया गया. उसी मौके पर जारी गांव में समाधि स्मारक-शौर्य स्थल बनाने के लिए आधारशिला रखी गई. लेकिन आज तक वहां निर्माण शुरू नहीं हो पाया. लोगों के हिस्से आया तो सिर्फ इंतजार. गौरतलब है कि तीन दिसंबर 2015 को सरकारी समारोह में मिट्टी को लेकर परिजनों ने सवाल खड़े किये थे. इसके बाद अल्बर्ट एक्का के परिजनों की खुशी और संतुष्टि के लिए सरकार ने अपने खर्चे पर रतन तिर्की और अल्बर्ट के पुत्र विसेंट एक्का की अगुवाई में दस लोगों को फिर से मिट्टी लाने अगरतला भेजा. 16 जनवरी 2016 को ये लोग अगरतला के धुलकी गांव स्थित अल्बर्ट की समाधि स्थल से मिट्टी लेकर झारखंड वापस हुए.

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1971 में शहीद हुए थे अल्बर्ट

लांस नायक अल्बर्ट एक्का भारत-पाकिस्तान युद्ध (1971) में महज 29 वर्ष की आयु में वीरगति को प्राप्त हुए थे. झारखंड की मिट्टी के इस जांबाज सपूत की वीरता का सच्चा सम्मान अगर सरकार करना चाहती है, तो उसे शहीद के परिजनों और जारी गांव के लोगों की भावना का भी सम्मान करना चाहिए.

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