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सरकार को आपके 100 रूपये का भी चाहिए हिसाब, लेकिन उनकी पार्टी के करोड़ों के विदेशी चंदे की नहीं होगी कोई जांच, फैसले पर उठ रहे सवाल

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Newdelhi: भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ की नीति वाली मोदी सरकार के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं. सोशल मीडिया पर सरकार के फैसले को ट्रोल किया जा रहा है. दरअसल केंद्र सरकार ने विदेशी चंदा नियमन कानून (एफसीआरए) में संशोधन किया है. जिसके तहत 1976 के बाद राजनीतिक पार्टियों को मिले विदेशी फंड की जांच नहीं की जा सकेगी. बीजेपी सरकार ने पहले वित्त विधेयक 2016 के जरिए एफसीआरए में संशोधन किया था जिससे दलों के लिए विदेशी चंदा लेना आसान कर दिया गया. अब 1976 से ही राजनीतिक दलों को मिले चंदे की जांच की संभावना को समाप्त करने के लिए इसमें आगे और संशोधन कर दिया गया है. इस संबंध में कानून में संशोधन को लोकसभा ने बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया. लोकसभा ने बुधवार को विपक्षी दलों के विरोध के बीच वित्त विधेयक 2018 में 21 संशोधनों को मंजूरी दे दी. उनमें से एक संशोधन विदेशी चंदा नियमन कानून, 2010 से संबंधित था. यह कानून विदेशी कंपनियों को राजनीतिक दलों को चंदा देने से रोकता है. जन प्रतिनिधित्व कानून, जिसमें चुनाव के बारे में नियम बनाए गए हैं, राजनीतिक दलों को विदेशी चंदा लेने पर रोक लगाता है.

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बीजेपी-कांग्रेस विदेशी चंदे में दोषी

मोदी सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक दलों के लिए विदेशों से चंदा लेना आसान हो गया है. वही 2014 में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों को दिल्ली हाईकोर्ट ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेग्यूलेशन एक्ट (एफसीआरए) के उल्लंघन का दोषी माना था. लेकिन बिल में संशोधन से अब दोनों पार्टियों को राहत मिल गई है. वित्त कानून 2016 में उपबंध 233 के पारित होने के बाद बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील वापस ले ली.

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FCRA में कैसे परिभाषित हुई कंपनियां?

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बीजेपी सरकार ने वित्त अधिनियम 2016 के जरिए विदेशी कंपनी की परिभाषा में भी बदलाव किया. इसमें कहा गया कि अगर किसी कंपनी में 50 फीसदी से कम शेयर पूंजी विदेशी इकाई के पास है तो वह विदेशी कंपनी नहीं कही जाएगी. इस संशोधन को भी सितंबर 2010 से लागू किया गया.

इसे भी पढ़ें:संसद में मोदी सरकार की पहली अग्निपरीक्षा, TDP आज लायेगी अविश्वास प्रस्ताव

सोशल मीडिया में सरकार पर उठे सवाल

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सोशल मीडिया पर खुद को राष्ट्रवादी पार्टी कहनेवाली पार्टी की सरकार के फैसले पर अब लोग सवाल उठा रहे हैं. सोशल मीडिया पर सरकार के फैसले को ट्रोल किया जा रहा है. सरकार को आपकी पायी-पायी का हिसाब चाहिए, लेकिन पोलिटिकल पार्टियों के करोड़ों के विदेशी फंडिंग की जांच उन्हें स्वीकार नहीं. ट्विटर पर लोगों के तरह-तरह के कमैंट्स आ रहे हैं, राकेश शर्मा नाम के एक पाठक ने लिखा ये कोई भ्रष्टाचार नही है ये तो भाजपा का राष्ट्रवाद है और ऐसा करके ही भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की नौटंकी कर रही है.’ ज्ञानेंद्र कुमार ने लिखा ‘पारदर्शिता का ढ़ोंग करने वाली पार्टियों ने आज खुद की औकात बता ही दी. इस प्रतियोगिता में मोदी जी की भाजपा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया.’ वही कुछ लोग इसे नीरव मोदी, ललित मोदी कांड से भी जुड़ रहे हैं. एक दर्शक ने ट्वीट किया ‘ललित मोदी, माल्या, नीरव मोदी द्वारा जो पैसा विदेश पहुँचाया गया अब उसमें से अपना हिस्सा पार्टी फंड के रूप में लेने की तैयारी शुरू.’

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