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श्रीनिवासन पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला सुरक्षित

नई दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के निर्वासित चल रहे अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन पर बोर्ड के अगले चुनाव में खड़े होने और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से चेन्नई सुपर किंग्स की फ्रेंचाइजी खत्म किए जाने की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। श्रीनिवासन की कंपनी इंडिया सीमेंट्स के पास चेन्नई सुपर किंग्स का स्वामित्व है और हितों के टकराव के आधार पर उन्हें चुनाव में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित किए जाने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता बिहार क्रिकेट संघ (सीएबी) ने चेन्नई सुपर किंग्स के टीम प्रिंसिपल और श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन को आईपीएल-6 में सट्टेबाजी में लिप्त रहने का दोषी पाए जाने के आधार पर आईपीएल से चेन्नई सुपर किंग्स की फ्रेंचाइजी रद्द किए जाने की मांग भी की।

सीएबी ने इसके अलावा बीसीसीआई द्वारा 2008 में किए गए नियम 6.2.4 में किए गए संशोधन को भी चुनौती दी है। इस संशोधन के लिए बोर्ड के अधिकारियों को बोर्ड द्वारा आयोजित कार्यक्रम में वाणिज्यिक हित रखने से छूट प्रदान की गई है।

न्यायमूर्ति टी. एस. ठाकुर और न्यायमूर्ति फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलिफुल्ला की पीठ ने सभी पक्षों की आखिरी दलील सुनने के बाद श्रीनिवासन के भाग्य पर फैसला सुरक्षित कर लिया।

बीसीसीआई के वकील सी. ए. सुंदरम ने बोर्ड कानून में किए गए संशोधन पर न्यायालय को बताया कि आईपीएल और चैम्पियंस लीग के मद्देनजर यह बदलाव किए गए ताकि क्रिकेट के विशेषज्ञ इसका हिस्सा बन सकें।

इस संदर्भ में सुंदरम ने कई दिग्गज खिलाड़ियों जैसे सुनील गावस्कर, सौरभ गांगुली, अनिल कुंबले, रवि शाष्त्री, लाल चंद राजपूत, वेंकटेश प्रसाद और कृष्णमचारी श्रीकांत के उदाहरण पेश किए, जो आईपीएल और बीसीसीआई दोनों में सक्रिय हैं।

इस पर न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा कि गावस्कर ने एक कमेंटेटर के तौर पर अपनी विशेषज्ञता प्रदान की, लेकिन मैच के परिणाम से उनका कोई अतिरिक्त लाभ नहीं जुड़ा था, जबकि श्रीनिवासन के हित सीएसके से जुड़े हुए थे।

श्रीनिवासन के वकील कपिल सिब्बल ने इस पर अदालत से कहा, “न्यायालय को अगर लगता है कि बीसीसीआई का अध्यक्ष होते हुए सीएसके का मालिक होने के नाते श्रीनिवासन के हितों का टकराव असंगत है तो मेरे खिलाफ फैसला दें।” आईएएनएस

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