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श्रीनिवासन के बीसीसीआई चुनाव लड़ने पर लगी रोक

नई दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय ने आईपीएल मामले में अहम फैसला सुनाते हुए गुरुवार को कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के निर्वासित अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन ‘हितों के टकराव’ की स्थिति में रहते हुए बीसीसीआई अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ सकते। बीसीसीआई को वार्षिक चुनाव करवाने के लिए छह सप्ताह का समय देते हुए न्यायमूर्ति टी. एस. ठाकुर और न्यायमूर्ति फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलिफुल्ला की पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, “एन. श्रीनिवासन सहित ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसका बीसीसीआई के किसी आयोजन में वाणिज्यिक हित हो वह बीसीसीआई में किसी भी पद के लिए चुनाव लड़ने की पात्रता नहीं रखता।”

न्यायालय ने अपने 230 पृष्ठों के फैसले में कहा, “हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि बीसीसीआई में चुनाव लड़ने की अयोग्यता उन लोगों पर लागू होगी जिनके बीसीसीआई के किसी आयोजन में किसी तरह के वाणिज्यिक हित हों, और वह तब तक चुनाव नहीं लड़ सकता जब तक उसके बीसीसीआई में वाणिज्यिक हित हों या बीसीसीआई की समिति उसे उचित सजा न दे दे।”

उल्लेखनीय है कि श्रीनिवासन के पास इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की फ्रेंचाइजी चेन्नई सुपर किंग्स का मालिकाना हक है। न्यायालय ने कहा कि अब समय आ गया है जब श्रीनिवासन को अध्यक्ष पद या फिर चेन्नई सुपर किंग्स में से किसी एक को चुनना होगा। अदालत के फैसले के बाद चेन्नई सुपर किंग्स का भविष्य भी अंधकारमय दिख रहा है।

न्यायालय ने हालांकि श्रीनिवासन को सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग मामले को छिपाने के आरोप से बरी कर दिया।

सर्वोच्च न्यायालय ने इसके अलावा बीसीसीआई के उस नियम में किए गए संशोधन की भी आलोचना की, जिसके तहत बीसीसीआई के अधिकारियों को आईपीएल, चैम्पियंस लीग टी-20 टूर्नामेंट और बीसीसीआई द्वारा आयोजित अन्य आयोजनों में वाणिज्यिक हित रखने की अनुमति दी गई है।

न्यायालय ने कहा, “बीसीसीआई के नियम 6.2.4 में संशोधन कर शामिल किए गए वाक्य ‘आईपीएल या चैम्पियंस लीग टी-20 जैसे आयोजनों को छोड़कर’ को अब से अमान्य एवं अप्रभावी घोषित किया जाता है।”

न्यायालय ने श्रीनिवासन के दामाद और चेन्नई सुपर किंग्स के अधिकारी गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान राॉयल्स के सह-मालिक राज कुंद्रा को सट्टेबाजी का दोषी करार दिया और कहा कि सिर्फ उन्हें ही दंडित नहीं किया जाएगा बल्कि उनके खिलाफ भी फैसला सुनाया जाएगा जिन फ्रेंचाइजी का वे प्रतिनिधित्व करते हैं।

न्यायालय ने मयप्पन और कुंद्रा को ‘टीम अधिकारी’ कहा है।

न्यायालय ने अन्य मामलों के अतिरिक्त मयप्पन और कुंद्रा की सजा तय करने के लिए पूर्व प्रधान न्यायाधीश आर. एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय समिति गठित की है। न्यायमूर्ति आर. वी. रावींद्रन और न्यायमूर्ति अशोक भान समिति के दो अन्य सदस्य हैं।

समिति गठित करने के अपने फैसले पर न्यायालय ने कहा, “इससे न सिर्फ पक्षपात या किसी तरह के प्रभाव में फैसला करने की शंका समाप्त हो जाती है, बल्कि पूरी प्रक्रिया को यह वस्तुनिष्ठ और पारदर्शी बनाती है, खासकर तब जब हम बेहद ईमानदार एवं उच्च न्यायिक मानदंडों वाले व्यक्तियों को समिति में शामिल करते हैं।”

न्यायालय ने कहा कि मयप्पन और कुंद्रा की सजा तय करते हुए समिति सभी लोगों को नोटिस जारी करेगी।

इसके अलावा यह समिति बीसीसीआई के नियमों की समीक्षा करेगी और बीसीसीआई चुनाव में खड़े होने के लिए प्रत्याशी की पात्रता और उपयुक्तता से संबंधित नियमों में बदलाव के सुझाव भी देगी।

न्यायालय ने समिति से बीसीसीआई अधिकारी सुंदर रमन की इस मामले में सभी गतिविधियों की पड़ताल करने और जरूरत पड़ने पर मुद्गल समिति की सहायता के लिए गठित जांच दल की मदद लेने के लिए भी कहा।

न्यायालय ने श्रीनिवासन से बीसीसीआई से दूरी बनाए रखने का भी आदेश दिया है।

न्यायालय ने हालांकि पूर्व खिलाड़ी सुनील गावस्कर और मौजूदा भारतीय क्रिकेट टीम के निदेशक रवि शास्त्री के कमेंटेटर के तौर पर सेवाएं देने के संदर्भ में हितों के टकराव और पेशेवर हित में स्पष्ट अंतर व्यक्त किया।

आईएएनएस ने जब श्रीनिवासन से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा, “मैं अभी बात नहीं कर रहा।”

श्रीनिवासन ने तो न्यायालय के फैसले पर चुप्पी साधे रखी, लेकिन कई पूर्व खिलाड़ियों, प्रशासकों एवं वकीलों ने न्यायालय के फैसले की सराहना की है।

सर्वोच्च न्यायालय के कंपनी, बीमा एवं प्रतिस्पर्धा कानून के विशेषज्ञ वकील डी. वरदराजन ने फोन पर आईएएनएस से कहा कि न्यायालय ने आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग एवं सट्टेबाजी मामले में इंडिया सीमेंट्स के कारोबारी आवरण की परवाह न कर इसके प्रबंध निदेशक एन. श्रीनिवासन को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर सही किया।

उन्होंने यह भी कहा कि बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों को अब अपनी हिस्सेदारियां घोषित कर देनी चाहिए। साथ ही उन्हें आईपीएल से जुड़े बीसीसीआई की निर्णय प्रक्रियाएं से भी दूरी बना लेनी चाहिए।

बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि न्यायालय का फैसला ‘हितों के टकराव’ जैसे विवादित मुद्दे की पड़ताल की दिशा में अहम फैसला है।

इसके अलावा पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी, आईपीएल के पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी और प्रख्यात टेलीविजन खेल प्रस्तोता हर्षा भोगले ने भी ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं और न्यायालय के फैसले की सराहना की।

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