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शिवसेना का तंज – भ्रष्टाचार पर बोलने से क्या RSS प्रमुख पर भी लगेगा देश विरोधी होने का ठप्पा

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Mumbai : शिवसेना ने सोमवार को तंज किया कि देश को भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन की आवश्यकता संबंधी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के बयान के लिए क्या उनपर ‘‘देश विरोधी’’ अथवा‘‘ हिंदू विरोधी’’ होने का ठप्पा लगेगा. पार्टी ने कहा कि सर संघचालक ने उसी मुद्दे पर स्पष्ट राय रखी है जिसे शिवसेना उठाती रही है और देश के हालात को देखते हुए यह आशा की किरण साबित हो सकती है.

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RSS सर संघचालक ने इशारा किया है कि प्रशासन कमजोर हुआ है : शिवसेना

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा कि आरएसएस सर संघचालक ने इशारा किया है कि प्रशासन कमजोर हुआ है और देशभर में भ्रष्टाचार व्याप्त है. चूंकि उन्होंने ( देश में) भ्रष्टाचार की बात को स्वीकार किया है, क्या उन पर देश विरोधी अथवा हिंदू विरेाधी होने का ठप्पा लगेगा? इसमें कहा गया है कि भ्रष्टचार पर आवाज उठाने वाली शिवसेना पहली पार्टी थी और अब भागवत ने भी वहीं मुद्दे उठाएं हैं. भागवत ने मराठा शासक शिवाजी के शासन का आह्वान किया था और कहा था कि जहां महिला की सुरक्षा की गारंटी नहीं है ऐसे बदलते हुए वक्त का दोषारोपण किस पर किया जाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि भारत को भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन की जरूरत है. वह 17 वीं शताब्दी के मराठा शासक की पुण्यतिथि पर पिछले सप्ताह आयोजित एक कार्यक्रम पर लोगों को संबोधित कर रहे थे.

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साइबर ठगों ने  पूर्व सीजेआई आरएम लोढा को निशाना बनाते हुए एक लाख रुपए ठग लिये.  खबर है कि ठगों ने जस्टिस आरएम लोढा के करीबी दोस्त के ईमेल अकाउंट से संदेश भेजकर एक लाख रुपए  की ठगी कर ली.

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केन्द्र में भाजपा नीत सरकार है वास्तविक नियंत्रण नागपुर में है : शिवसेना

शिवसेना ने कहा कि देश ने शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे तथा राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ प्रमुख के रूख को हमेशा गंभीरता से लिया है. इन दो कद्दावर नेताओं ने कभी चुनाव नहीं लड़ा लेकिन उन्होंने जनता की आवाज उठाने वाले दक्षिणपंथी संगठनों को मजबूत करने का काम किया है. संपादकीय में कहा गया कि हालांकि केन्द्र में भाजपा नीत सरकार है वास्तविक नियंत्रण नागपुर में है. और अब आरएसएस प्रमुख ने खुद ही यह मुद्दा उठा दिया है. इसमें कहा गया है कि शिवसेना जातियों और उनके तनाव को दरकिनार करने की भागवत की अपील का स्वागत करती है. संपादकीय में पश्चिम बंगाल में हिंसा तथा शिक्षा तंत्र से जु्डे मुद्दे पर भी विचार रखे गए.

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