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शादियों में खाप पंचायतों का दखल पूरी तरह से गैरकानूनी : सुप्रीम कोर्ट

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New Delhi :  सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायतों जैसी अवैध सभाओं की ओर से दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से शादी करने में दखल देने को‘‘ पूरी तरह से गैरकानूनी’’ करार दिया है और ऐसी दखलंदाजी रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वेच्छा से अंतर-जातीय और अंतर-आस्था विवाह करने वाले वयस्कों के मामले में खाप पंचायत जैसे गैरकानूनी समूहों के दखल को पूरी तरह गैरकानूनी है.

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2011 में एनजीओ शक्ति वाहिनी ने किया था दायर याचिका

देश के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविल्करएवं न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि संसद द्वारा उचित कानून ना बनाए जाने तक ये दिशा-निर्देश लागू रहेंगे. शीर्ष न्यायालय ने एनजीओ शक्ति वाहिनी की याचिका पर यह आदेश दिया. एनजीओ ने प्रेमी जोड़ों की ऑनर किलिंग से रक्षा करने की मांग करते हुए वर्ष 2011 में न्यायालय का रुख किया था. इस संगठन ने ऐसे दपंतियों को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था ताकि इज्जत के नाम पर उनकी हत्या नहीं की जा सके. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर ओर न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस तरह के हस्तक्षेप को रोकने के लिये दिशा निर्देश प्रतिपादित किये हैं और कहा है कि इस संबंध में संसद से कानून बनने तक ये प्रभावी रहेंगे.

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कोई रिश्तेदार या तीसरा पक्ष नहीं कर सकता है हस्तक्षेप

पीठ ने इस महीने के प्रारंभ में जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुये टिप्पणी की थी कि जब अलगअलग धर्म, जाति, पृष्टभूमि वाले दो वयस्क परस्पर सहमति से विवाह करते हैं तो कोई भी रिश्तेदार या तीसरा पक्ष इसमें न तो हस्तक्षेप कर सकता है ओर न ही उन्हें धमकी दे सकता है या हिंसा का सहारा ले सकता है.

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