न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

शादियों में खाप पंचायतों का दखल पूरी तरह से गैरकानूनी : सुप्रीम कोर्ट

18

New Delhi :  सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायतों जैसी अवैध सभाओं की ओर से दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से शादी करने में दखल देने को‘‘ पूरी तरह से गैरकानूनी’’ करार दिया है और ऐसी दखलंदाजी रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वेच्छा से अंतर-जातीय और अंतर-आस्था विवाह करने वाले वयस्कों के मामले में खाप पंचायत जैसे गैरकानूनी समूहों के दखल को पूरी तरह गैरकानूनी है.

इसे भी पढ़ें: सिब्बल ने बाबरी केस से बनाई दूरी : क्या  कर्नाटक चुनाव को लेकर कांग्रेस हाईकमान ने दिया निर्देश ?

2011 में एनजीओ शक्ति वाहिनी ने किया था दायर याचिका

देश के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविल्करएवं न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि संसद द्वारा उचित कानून ना बनाए जाने तक ये दिशा-निर्देश लागू रहेंगे. शीर्ष न्यायालय ने एनजीओ शक्ति वाहिनी की याचिका पर यह आदेश दिया. एनजीओ ने प्रेमी जोड़ों की ऑनर किलिंग से रक्षा करने की मांग करते हुए वर्ष 2011 में न्यायालय का रुख किया था. इस संगठन ने ऐसे दपंतियों को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था ताकि इज्जत के नाम पर उनकी हत्या नहीं की जा सके. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर ओर न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस तरह के हस्तक्षेप को रोकने के लिये दिशा निर्देश प्रतिपादित किये हैं और कहा है कि इस संबंध में संसद से कानून बनने तक ये प्रभावी रहेंगे.

इसे भी पढ़ें: दो अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जायेंगे IMA के डॉक्टर्स, NMC बिल से हैं नाखुश

कोई रिश्तेदार या तीसरा पक्ष नहीं कर सकता है हस्तक्षेप

पीठ ने इस महीने के प्रारंभ में जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुये टिप्पणी की थी कि जब अलगअलग धर्म, जाति, पृष्टभूमि वाले दो वयस्क परस्पर सहमति से विवाह करते हैं तो कोई भी रिश्तेदार या तीसरा पक्ष इसमें न तो हस्तक्षेप कर सकता है ओर न ही उन्हें धमकी दे सकता है या हिंसा का सहारा ले सकता है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: