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शहरवासियों की सेहत के साथ खिलवाड़, घरों में पहुंच रहा मटमैला कोयल नदी का दूषित पानी

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Daltongunj: डालटनगंज शहरवासियों की सेहत के साथ इन दिनों भयंकर खिलवाड़ किया जा रहा है. जलसंकट से जूझ रहे शहरी क्षेत्र में कोयल नदी का गंदा, बदबूदार और मटमैला दूषित पानी की सीधी आपूर्ति की जा रही है. बरसात के इस मौसम में इस पानी के सेवन से डायरिया सहित अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.

क्यों हो रही गंदे पानी की सप्लाई?
दरअसल बारिश होने के कारण कोयल नदी का जलस्तर बढ़ गया है. नदी का पानी गंदा, बदबूदार और मटमैला हो गया है. ऐसे में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग पानी को साफ किए बिना, कोयल नदी में बने इंकट वेल से सीधे पानी की आपूर्ति कर दे रहा है.  नतीजा, घरों में दूषित पानी पहुंच रहा है. यह सिलसिला पिछले दो-तीन दिनों से चल रहा है, लेकिन इसमें सुधार के लिए ना तो पेयजल एवं स्वच्छता विभाग कोई दिलचस्पी दिखा रहा है और न ही नगर निगम.

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पीएचइडी के पास मेटेरियल का फंड नहीं, नगर निगम का ध्यान नहीं
गंदे जलापूर्ति को लेकर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और नगर निगम आमने-सामने आ गये हैं. पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता अजय सिंह का कहना है कि विभाग के पास पानी साफ करने का मेटेरियल नहीं है. जबतक नगर निगम, विभाग को राशि उपलब्ध नहीं करायेगा, मेटेरियल नहीं आ सकता. वहीं, नगर निगम का कहना है कि अगर पीएचइडी के पास मेटेरियल खत्म हो गया था तो निगम को समय रहते सूचना देनी थी. अगर हमें समय पर बताया जाता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती. मामला कागजी प्रक्रिया में जाकर फंस जा रहा है. कागजी कार्रवाई कर राशि देने में कम से कम तीन से चार दिन लगेंगे. तब तक लोगों को गंदे पानी की ही आपूर्ति की जायेगी.

 

शहरवासियों में आक्रोश
लगातार तीसरे दिन गंदे पानी की आपूर्ति होने से शहरवासियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है. शहर के हमीदगंज निवासी कमलेश पांडेय और बेलवाटिका निवासी शिव कुमार बताते हैं कि लगातार गंदा पानी आने के कारण उनके समक्ष भारी संकट पैदा हो गया है. पानी इतना गंदा है कि उसे ना तो पी सकते हैं और न ही उससे कपड़े धोए जा सकते हैं.

जल्द हो जायेगा सुधार: पीएचइडी कनीय अभियंता
इस बीच पीएचइडी के कनीय अभियंता रणविजय सिंह का कहना है कि कोयल नदी में लाल पानी आने के कारण जलापूर्ति प्रभावित हुई है. साफ करने का मेटेरियल ज्यादा मिलाने से लोगों को डायरिया हो सकता है. लेकिन जल्द ही इसे सुधारने का प्रयास किया जा रहा है.

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