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शराब और नियोजन नीति को लेकर झारखंड के हमउम्र राज्यों का दौरा करते हैं अधिकारी, शिक्षा व स्वास्थ्य की नहीं कोई फिक्र

Akshay Kumar Jha

Ranchi: झारखंड राज्य में जब कोई विवाद होता हो. राज्य किसी मामले में फंस जाता हो, तो अकसर देखा जाता है कि यहां के अधिकारियों को दूसरे राज्य की नीति समझने के लिए भेज दिया जाता है. हाल के दिनों में नियोजन नीति समझने के लिए यहां से अधिकारियों का एक दल छत्तीसगढ़ और एमपी भेज दिया गया. शराब की बिक्री अपने हाथों में लेने के बाद विभाग को लगातार घाटा हो रहा है. जबकि दूसरे ऐसे कई राज्य है जहां सरकार शराब की बिक्री करती है और उन्हें फायदा होता. इस नीति को भी समझने के लिए चार अधिकारियों का एक दल छत्तीसगढ़ और दिल्ली भेज दिया गया. उन्होंने वहां जाकर यह समझने की कोशिश की कि आखिर दूसरे राज्यों की ऐसी क्या नीति है, जिससे उन्हें फायदा होता है और हमें घाटा.

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स्वास्थ्य और शिक्षा को समझने के लिए कोई पहल नहीं

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नीति आयोग ने हाल ही में शिक्षा, स्वास्थ्य व पोषण जैसे पांच क्षेत्रों के विकास के 49 मानकों पर देश के 101 पिछड़े जिलों की रैंकिंग की है. हालांकि नीति आयोग ने इन्हें पिछड़ा जिला नाम ना देकर आस्पिरेशनल डिस्टि्रक्टनाम दिया है. झारखंड की बात करें तो इन 101 जिलों में 19 जिले इस राज्य के हैं इनमें हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूमि, बोकारो, रामगढ़, रांची, गुमला, दुमका, गढ़वा, चतरा, पलामू, गिरडीह, गौड्डा, नवादा, लातेहार, लोहरदग्गा, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूमि, सिमडेगा, पाकुड़ और साहिबगंज शामिल हैं. बताते चलें कि इन जिलों को स्वास्थ्य और शिक्षा सहित 49 मानकों पर पिछड़ा जिला घोषित किया है. ना कि शराब और नियोजन नीति के आधार पर.

जिसकी उम्र झारखंड जितनी, वहीं से लेते हैं सीख

देखा जाता है कि किसी भी मामले को समझने के लिए सरकार के प्रतिनिधि सबसे पहले हमारे पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ का दौरा करते हैं. जबकि छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड एक साथ ही एक नवंबर 2000 को अलग हुआ था. वहीं स्वास्थ्य और शिक्षा में इतने पिछड़ने के बावजूद कभी सरकार की तरफ से प्रतिनिधियों को शिक्षा में अव्वल केरल या स्वास्थ्य सुविधाओं में अव्वल केरल, पंजाब और तमिलनाडू भेजने की जरूरत नहीं समझी गयी. कभी ये जानने के कोशिश नहीं की गयी कि आखिर क्यों इन राज्यों में स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था दुरुस्त है. लेकिन शराब की नीति को समझने के लिए राज्य के चार आला अधिकारियों को छत्तीसगढ़ और दिल्ली भेज दिया जाता है.

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अपनी उम्र वाले राज्यों में सबसे पिछड़ा है झारखंड

एक नवंबर 2000 को एक साथ तीन राज्यों की स्थापना की गयी थी. उत्तराखंड यूपी से, झारखंड बिहार से और छत्तीसगढ़ एमपी से अलग हुआ था. नीति आयोग के पिछड़ों जिलों की सूची देखें तो चौंकाने वाले हैं. छत्तीसगढ़ में जिलों की संख्या 27 हैं. यानि झारखंड से तीन ज्यादा. लेकिन नीति आयोग के पिछड़े जिलों की फेहरिस्त में उनका एकमात्र जिला सुकमा आता है. यह जिला अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र है. इस जिले को देश के 10 सबसे पिछड़े जिले में शामिल किया गया है. उत्तराखंड एक छोटा सा राज्य है. यहां कुल 13 जिले हैं. इन 13 जिलों में सिर्फ हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर ही ऐसे जिले हैं जिनका नाम पिछड़े जिलों में शामिल हैं. लेकिन झारखंड की बात करें तो यहां के 24 जिलों में से 19 जिले ऐसे हैं जिन्हें पिछड़े जिलों की फेहरिस्त में रखा गया है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि शराब की वजह से इन जिलों में पिछड़ापन नहीं है बल्कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण कारणों से है.

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