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वो “ईमानदारी” से कर रहे थे विभाग का “कल्याण”, 2000 करोड़ के टेंडर में “उनकी” सुनी नहीं तो हो गया “साहब” का कल्याण !

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Akshay Kr. Jha

Ranchi, 05 November: हाल में हुए आईएएस के तबादलों का मामला ब्यूरोक्रेसी में चर्चा का विषय बना हुआ है. कुछ अधिकारियों को संटिंग से वापस लाकर बड़ी जिम्मेदारियां दी गयीं. तो वहीं कुछ अधिकारी जो थोड़े कायदे-कानून के हिसाब से चलने पर विश्वास करते हैं, उन्हें ऐसी जगह भेज दिया गया जहां वो चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते हैं. हाल में ही अपनी सीक्रेट नोट की वजह से चर्चा में आए एक आईएएस अधिकारी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है. ब्यूरोक्रेसी में चल रही चर्चा के मुताबिक उनके तजुर्बे और काम करने के तरीके को एक तरफ रख दिया जाए, तो उनके साथ ठीक नहीं हुआ है. जिस विभाग में वो थे वहां काफी दिल लगा कर काम कर रहे थे. 

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जब शराब वाला बच्चों को देगा पोषाहार….
दुनिया जानती है कि वो कौन है जो देश के सबसे बड़े प्रदेश में  शराब बेचकर अरबपति हो गया. वो भले ही दुनिया में अब ना हो. लेकिन, उसका कारोबार पूरे देश में खूब फल-फूल रहा है. प्रोफेशनल तरीके से सभी काम को अंजाम देने का नतीजा है कि उसका सिंडीकेट शराब के अलावा दूसरे कारोबार को कई राज्य में स्थापित कर चुका है. झारखंड में भी उसकी एक बड़ी डील होने वाली है. आने वाले महीने या कहें जनवरी आखिरी तक करीब 2000 हजार करोड़ का ठेका उसे मिलने वाला है. जिससे वो राज्य के गरीब नौनिहालों का पेट भरेगा. कंपनी के काम करने का तरीका शायद ही किसी से छिपा है. ऐसे में ईमानदारी से कल्याण करने वाले साहब को डील में रोड़ा बनने की क्या जरूरत थी. रोड़ा बनने का नतीजा तो संटिंग पोस्टिंग ही होता है. साहब ने भी हद ही की. उन्हें जब पता है कि सबसे बड़े/बड़ी साहब के हाथ में सारा कुछ है, तो उन्हें भी जरा कॉपरेट करना चाहिए था.

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एक विभाग में थी उनकी डिमांड लेकिन…

लगभग सभी काम में सरकार को डांट पिलाने वाले एक मंत्री ने कहाः ठीक है, अगर तुम्हें वो पसंद नहीं तो मेरे हवाले कर दो. लेकिन, उस विभाग में कुछ साल पहले बड़े/बड़ी साहब ने भी काम किया था. उनके आस-पास के सलाहकारों ने समझाया कि ऐसी गलती वो सपने में भी ना करें. ईमानदारी से कल्याण करने वाले साहब लिखा-पढ़ी में उस्ताद हैं. कहीं किसी पुरानी फाइल को उन्होंने खोदनी शुरू की तो बिना बात आराम करने के वक्त में कोर्ट कचहरी का चक्कर लग सकता है. अब, जब ऐसी बात हो तो कोई खुद अपने से पैर पर कुल्हाड़ी क्यों मारे.

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हमेशा सुर्खियों  में आ जाते है साहब 
ईमानदारी से कल्याण करने वाले साहब आदतन शांत स्वाभाव के हैं. लेकिन, कभी-कभी मामला बिगड़ जाता है. मीटिंग के दौरान भी वो अपने से छोटे अधिकारियों को हमेशा डांटते रहते थे. बात करने पर पाबंदी लगाने की कोशिश करते रहते थे. लेकिन, छोटे अधिकारियों की भी कोई गरिमा होती है. उन्हें भी किसी बात का बुरा लग सकता है. इस पूरे वाक्ये की वजह से वो कुछ दिनों तक सुर्खियों में रहे. एक और छोटे अधिकारी की तो उन्होंने बैंड बजाने की ठान ही ली थी. काम भी कर दिया था. उनकी सांस में सांस तबादले वाली खबर के बाद आयी है. उनका असली में कल्याण जाकर अब हुआ है. इस वाक्ये को लेकर ईमानदारी से काम करने वाले साहब सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहे.

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