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वैवाहिक रिश्ते को मजबूत करेगा झारखंड अनिवार्य विवाह निबंधन विधेयक 2017

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Ranchi: झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान राज्य सरकार ने कई विधेयक पास किए हैं. उनमें से एक महत्वपूर्ण विधेयक है झारखंड अनिवार्य विवाह निबंधन विधेयक. ये वैवाहिक रिश्ते को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है. राज्य में विवाह निबंधन के लिए स्पेशल मैरिज एक्ट 1954, हिंदू विवाह अधिनियम 1955, भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम 1972, काजी अधिनियम 1980, आनंद विवाह अधिनियम 1909 आदि लागू है, लेकिन इनमें से किसी भी अधिनियम के अंतर्गत विवाह का निबंधन अनिवार्य नहीं है. वर्तमान में विवाह का निबंधन पक्षकारों की इच्छा पर निर्भर करता है, लेकिन झारखंड अनिवार्य विवाह निबंधन विधेयक लागू होने के बाद राज्य के समस्त नागरिकों के लिए विवाह का निबंधन कराना अनिवार्य होगा.

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दूर होगी बाल विवाह जैसी कुरीतियां

विवाह का निबंधन अनिवार्य नहीं होने के कारण बाल विवाह और बहु विवाह जैसी कुरीतियां पूर्णतः समाप्त नहीं हुई है, साथ ही पत्नी एवं विधवा के रूप में नारी के अधिकारों को पूर्ण सुरक्षा भी संभव नहीं हो पाई है. अनिवार्य विवाह निबंधन अधिनियम न केवल बाल विवाह, बहु विवाह आदि को रोकेंगे बल्कि पत्नी एवं विधवा के रूप में नारी की सामाजिक और वैधानिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा. इस संबंध में भारत सरकार के विधि आयोग द्वारा अनिवार्य विवाह निबंधन अधिनियम बनाने की अनुशंसा की गई है.

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विशेष विवाह अधिनियम

विवाह निबंधन के लिए पक्षकारों को निबंधन कार्यालय जाना होता है, जो अधिकांशतः जिला मुख्यालय, अनुमंडल मुख्यालय में होते हैं, लेकिन इस अधिनियम के तहत ग्रामीण क्षेत्र एवं शहरी क्षेत्र में विवाह अनिवार्य निबंधन उन्हीं कार्यालय में होगा जहां जन्म और मृत्यु का निबंधन होता है. अर्थात ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत सेवक द्वारा एवं शहरी क्षेत्र में नगर निकाय के पदाधिकारियों द्वारा यह निबंधन कार्य किया जाएगा. इसके कारण पक्षकारों को विवाह निबंधन हेतु दुरुस्त कार्यालय जाना नहीं पड़ेगा.

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ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन का भी प्रस्ताव

जन सुविधा के लिए इस अधिनियम के तहत विवाह निबंधन के लिए ऑनलाइन आवेदन के अतिरिक्त विहित प्रपत्र में ऑफलाइन आवेदन देने का भी प्रस्ताव किया गया है. विवाह संपन्न होने के 1 वर्ष के अंदर विवाह का निबंधन कराना अनिवार्य होगा, तथा विवाह निबंधन हेतु शुल्क मात्र 50 रुपये निर्धारित किया गया है. गरीबी रेखा से नीचे के व्यक्तियों के लिए विवाह निबंधन शुल्क देय नहीं है.

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अधिकतम 100 रुपया विलंब शुल्क निबंधन के समय लिया जायेगा

बिना उचित कारण के विवाह का अनिवार्य निबंधन ना कराने की स्थिति में 5 रुपये प्रत्येक माह के दर से अधिकतम 100 रुपया विलंब शुल्क निबंधन के समय लिया जाएगा, लेकिन गरीबी रेखा के नीचे के व्यक्तियों के लिए विलंब शुल्क देय नहीं है. विवाह निबंधक अपना काम मुख्य निबंधक विवाह सह उपायुक्त के नियंत्रण एवं निर्देश के अनुसार करेंगे और विवाह निबंधक के आदेश के खिलाफ मुख्य विवाह निबंधक सह उपायुक्त के समक्ष अपील की जा सकेगी.

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