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विश्व बैंक की रिपोर्ट : भारत में GST है पेचीदा, दुनिया में दूसरा सबसे ऊंचा टैक्स रेट

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New Delhi : विश्व बैंक ने 14 मार्च को इंडिया डेवलपमेंट अपडेट की छमाही रिपोर्ट जारी की. इस रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी  की महत्वाकांक्षी कर सुधार प्रणाली (टैक्स रिफॉर्म सिस्टम) पर गंभीर सवाल उठाये गये हैं. साथ ही विश्व बैंक ने जीएसटी को भी काफी पेचीदा बताया है. वर्ल्ड बैंक क रिपोर्ट में कहा गय़ा है कि, 115 देशों के मुकाबले भारत में टैक्स रेट दूसरा सबसे ऊंचा है. जबकि लाइव मिंट के अनुसार कहा गया है कि , इस  रिपोर्ट में जितने भी देशों का शामिल किया गया है, वहां भी भारत की ही तरह  अप्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू है.

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पाकिस्तान और घाना की श्रेणी में भारत भी

विश्व बैंक के द्वारा जारी किये गये रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, मोदी सरकार ने देश में एक जुलाई, 2017 GST को शुरू किया और इसके ढांचे में पांच स्लैब (0, 5, 12, 18 और 28 फीसद) भी बनाया. हालांकि कुछ वस्तुओं और सेवाओं को छोड़कर सरकार ने सभी को इसी दायरे में रखा है. लेकिन कुछ वस्तुओं और सेवाओं पर काफी कम टैक्स भी लगाया गया है. जिनमें सोने पर 3 तो कीमती पत्थरों पर 0.25 फीसद की दर से कर लगाया गया है. जबकि  अल्कोहल, पेट्रोलियम उत्पाद, रियल एस्टेट पर लगने वाला स्टाम्प ड्यूटी से साथ ही बिजली बिल को GST के दायरे से बाहर रखा गया है.

यदि पाकिस्तान और घाना की बात करें तो भारत भी इसी श्रेणी में है. वहीं विश्व के 49 देशों में GST के तहत एक 28 देशों में टैक्स के दो स्लैब हैं. वहीं भारत को लेकर पांच देशों में GST के अंतर्गत पांच स्लैब बनाये गये हैं. जिसमें भारत के अलावा इटली, लक्जेम्बर्ग, पाकिस्तान और घाना जैसे देश शामिल हैं. उल्लेखनीय है कि इस चारों देशों की अर्थव्यवस्था बुत अच्छी नहीं है. ऐसे में भारत GST के तहत सबसे ज्यादा स्लैब वाला देश भी है. हालांकि  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तो वादा किया है कि 12 18 फीसद वाले स्लैब को वह कर देंगे. लेकिन टैक्स पेय करने में सुधार के अलावा राजस्व में बढ़ोत्तरी के बाद ही वृद्धि के बाद ही ऐसा कदम उठाया जायेगा. वहीं बीते साल नवंबर में GST काउंसिल की बैठक गुवाहाटी में हुई थी, जिसमें 28 फीसद के स्लैब पर महत्वपूर्ण फैसला लिया गया था. शुरूआत में इसके दायरे में 228 वस्तुओं एवं सेवाओं को रखा गया था, जिसे फिलहाल 50 तक सीमित कर दिया गया.

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टैक्स रिफंड की धीमी रफ्तार पर जतायी चिंता

इसके अलावा वर्ल्ड बैंक ने टैक्स रिफंड की रफ्तार की धीमी हो ने पर चिंता जाहिर की है. जिसका असर पूंजी की उपलब्धता पर पड़ने की बात भी कही गयी है. इसके अलावा जो रिपोर्ट दी गयी है, उसमें कर प्रणाली के प्रावधानों को उपयोग में लाने पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल खड़े किये गये हैं. विश्व बैंक ने साथ ही रिपोर्ट में टैक्स रेट की संख्या में कमी करने के अलावा कानूनी प्रावधान के साथ ही इसकी प्रक्रिया को भी आसान बनाने की वकालत की है.

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