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वाड्रा पर गरमाई राजनीति, डीएलएफ ने आरोपों को नकारा

नई दिल्ली | कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल व उनकी टीम के द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) व मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने आरोपों की जांच की मांग की है वहीं डीएलएफ ने उन आरोपों का खंडन किया है जिनमें कहा गया है कि उसने वाड्रा को फायदा पहुंचाया और इसके बदले कांग्रेसी राज्य सरकारों से फायदे लिए।

केजरीवाल उन आरोपों पर अभी भी अडिग हैं जो उन्होंने शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर लगाए थे। अरविंद का कहना है कि उन्होंने कुछ सच्चाई जनता के सामने रखी है, जिसका जवाब आना जरूरी है।

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इस बीच, डीएलएफ ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने वाड्ऱा को बगैर सुरक्षा राशि के कोई ऋण नहीं दिया और न ही सस्ते दर पर उन्हें कोई जमीन दी।

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डीएलएफ ने कहा, “हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि डीएलएफ ने वाड्रा को बगैर सुरक्षा राशि के वाड्रा को या उनकी किसी भी कम्पनी को कोई ऋण नहीं दिया।”

उसके मुताबिक, “किसी भी स्तर पर स्काइलाइट समूह को अन्य ग्राहकों को दी गई प्रस्तावित राशि के मुकाबले सस्ते दर पर कोई जमीन नहीं दी गई।”

केजरीवाल और उनके सहयोगी प्रशांत भूषण ने शुक्रवार को आरोप लगाए थे कि वाड्रा ने गुड़गांव और अन्य शहरों में बाजार भाव से कम कीमत पर जमीनें खरीदी और उन्हें बेचकर भारी मुनाफा कमाया।

केजरीवाल ने समाचार चैनल सीएनएन-आईबीएन से बातचीत में कहा, “हम कोई फैसला नहीं दे रहे हैं। हमने जनता के सामने कुछ सच्चाई रखी है। वह (वाड्रा) क्यों इनका जवाब नहीं देते।”

उन्होंने पूछा क्यों डीएलएफ ने 35 करोड़ रुपये की जमीन वाड्रा को सिर्फ पांच करोड़ रुपये में बेच दी।

वाड्रा के गांधी परिवार से जुड़े होने के कारण उन्हें निशाना बनाए जाने के बारे में पूछे जाने पर केजरीवाल ने कहा, “लोग इस बात पर सहमत नहीं होंगे कि गांधी परिवार से जुड़े होने के कारण हमने उन्हें निशाना बनाया।”

उन्होंने कहा कि हम तटस्थ है इसलिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया है कि वह उनके विरोधियों के एजेंट हैं।

उन्होंने कहा कि डीएलएफ और वाड्रा के संबंधों के बारे में इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर को उन्होंने पढ़ा नहीं है फिर भी एक ही मुद्दे को फिर से उछालने में कोई नुकसान नहीं है।

केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने वाड्रा पर लगे कथित आरोपों के मद्देनजर उनका अप्रत्यक्ष रूप से बचाव किया।

चिदम्बरम ने मुम्बई में कहा कि दो निजी लोगों के बीच हुई लेनदेन को भ्रष्टाचार के अस्पष्ट आरोपों के आधार पर सवालों के घेरे में नहीं रखा जा सकता।

चिदम्बरम ने कहा, “ये आरोप सही हैं या गलत, मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं है। दो निजी लोगों के बीच हुई लेनदेन को भ्रष्टाचार के अस्पष्ट आरोपों के आधार पर सवालों के घेरे में नहीं रखा जा सकता।”

चिदम्बरम ने यह बात तब कही जब उनसे पत्रकारों ने यह पूछा कि क्या सरकार वाड्रा पर लगे आरोपों की जांच कराएगी।

चिदम्बरम ने हालांकि यह भी कहा कि उन्हें जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक इस लेनदेन का आयकर व अन्य विवरणों में जिक्र है।

उधर, कांग्रेस ने शनिवार को विपक्ष की वह मांग खारिज कर दी जिसमें वाड्रा पर इंडिया अगेंस्ट करप्शन के अरविंद केजरीवाल और प्रशांत भूषण की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच की मांग की गई थी।

केजरीवाल और उनके सहयोगी प्रशांत भूषण ने शुक्रवार को आरोप लगाए थे कि वाड्रा ने गुड़गांव और अन्य शहरों में बाजार भाव से कम कीमत पर जमीनें खरीदी और उन्हें बेचकर भारी मुनाफा कमाया।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “किस चीज की जांच। दो निजी कंपनियों के बीच हुए व्यावसायिक लेनदेन, जिसे वैधानिक अधिकारियों ने वैध ठहराया है। क्या वह अपराध है।”

तिवारी ने आरोप लगाया कि आईएसी के कार्यकर्ता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘बी’ टीम है। ज्ञात हो कि भाजपा और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मामले की जांच की मांग की है। गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने न्यायिक जांच की मांग उठाई है।

केजरीवाल द्वारा वाड्रा को मानहानि का मुकदमा दायर करने की दी गई चुनौती के बारे में पूछे जाने पर तिवारी ने कहा कि कांग्रेस को ऐसे व्यक्ति की सलाह की जरूरत नहीं है जो अपनी आगे की राजनीति के लिए आरोपों का सहारा ले रहा है।

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