न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

वकीलों के जोर से बोलने पर नाराज हुए SC जज, बोले- ये बर्दाश्त के बाहर

55

New Delhi: एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार उच्चतम न्यायालय के एक और न्यायाधीश ने वकीलों के एक दूसरे पर जोर से बोलने के प्रयास पर अपना संयम खोया और मामले की सुनवाई से यह कहते हुये इंकार कर दिया कि न्यायालय को अब ऐसे वकीलों से सख्ती से पेश आने की जरूरत है.

महिला वकील ने काफी ऊंची आवाज में हस्तक्षेप किया

न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने संकटग्रस्त पर्ल्स एग्रोटेक कार्पोरेशन लि. से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करने से इंकार करते हुए इसे फरवरी के दूसरे सप्ताह के लिये सूचीबद्ध कर दिया. न्यायालय में यह सब उस समय शुरू हुआ जब पीठ याचिकाकर्ता पर्ल्स एग्रोटेक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिंघवी की दलीलें सुन रही थी और तभी प्रतिवादियों की ओर से एक महिला वकील ने कथित रूप से काफी ऊंची आवाज में हस्तक्षेप किया.

यह भी पढ़ें: आहत वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने लिया सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस छोड़ने का फैसला

न्यायालयों में अनुशासन और न्यायालय की कार्यवाही की मर्यादा बनाये रखें

इस पर पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति सीकरी ने कहा, ‘‘जब एक वरिष्ठ अधिवक्ता बोल रहे हैं तो दूसरे वकील का जोर से बोलने का कोई तुक नहीं है. मैं वैसे बहुत ही शांत स्वभाव का व्यक्ति हूं परंतु मुझे इस तरह की बहस से चिढ़ है. हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह उचित समय है कि न्यायालयों को अनुशासन और न्यायालय की कार्यवाही की मर्यादा बनाये रखने के लिये जोर से बोलने वालों के खिलाफ सख्ती करनी होगी. अदालतों में जोर से बोलने वाले वकीलों के खिलाफ सख्ती बरतने की आवश्यकता है.’’ इसके साथ ही पीठ ने इस मामले की सुनवाई फरवरी के दूसरे सप्ताह के लिये स्थगित कर दी और कहा कि यदि अगली बार  इस तरह से बहस की जायेगी तो वह मामले को नहीं सुनेगी.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा भी दे चुके हैं वकीलों को चेतावनी

सिंघवी ने कहा कि पर्ल्स एग्रोटेक को इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए जब उसकी कोई गलती नहीं है परंतु पीठ ने अपने आदेश से डिगने से इंकार करते हुये कहा कि इस पर फरवरी में सुनवाई होगी. दिसंबर सात को प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने भी ऊंची आवाज में बोलने वाले वकीलों को चेतावनी देते हुये कहा था कि, ‘‘वह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.’’ उन्होंने यह भी कहा था कि ऊंची आवाज में बोलना अयोग्यता और अक्षमता को दर्शाता है.

पीठ वकीलों के ऊंची आवाज में बोलने से खिन्न थी

यह घटना उस समय हुयी जब प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ इस सवाल पर विचार कर रही थी कि क्या दूसरे धर्म के व्यक्ति से शादी करने के बाद पारसी महिला अपनी धार्मिक पहचान गंवा देती है. पीठ राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद मालिकाना हक प्रकरण और दिल्ली-केन्द्र विवाद पर सुनवाई के दौरान वकीलों के ऊंची आवाज में बोलने से खिन्न थी.

 

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: