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लालू यादव के वकील ने सेहत का हवाला देकर कम-से-कम सजा के लिए दाखिल की अर्जी

Ranchi : चारा घोटाला मामले में लालू यादव को सजा सुनाए जाने से पहले उनके वकील ने सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में एक पीटिशन दाखिल की है. पीटिशन में लालू यादव के सेहत का हवाला देते हुए कम-से-कम सजा की मांग की है. वकील ने कहा है कि खराब सेहत, सांस लेने में दिक्कत और डायबिटीज की शिकायत उनके मुवक्किल यानि लालू यादव को है. कहाः जेल की हालत ऐसी नहीं है कि ऐसी बीमारी वाले मरीज को वहां रखा जा सके. साथ ही ये भी कहा है कि इस मामले में लालू यादव एक साल से ज्यादा की सजा काट चुके हैं. लालू यादव के वकील ने ये भी कहा है कि इसी मामले में जगन्नाथ मिश्र को बरी कर दिया गया है. इन सभी बातों का हवाला देते हुए लालू यादव के वकील ने कोर्ट से पीटिशन के जरिए कहा है कि लालू यादव को कम-से-कम सजा दी जाए. हालांकि कानून के जानकारों का मानना है कि इस पीटिशन से लालू यादव के फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेंगा.

Ranchi : चारा घोटाला मामले में लालू यादव को सजा सुनाए जाने से पहले उनके वकील ने सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में एक पीटिशन दाखिल की है. पीटिशन में लालू यादव के सेहत का हवाला देते हुए कम-से-कम सजा की मांग की है. वकील ने कहा है कि खराब सेहत, सांस लेने में दिक्कत और डायबिटीज की शिकायत उनके मुवक्किल यानि लालू यादव को है. कहाः जेल की हालत ऐसी नहीं है कि ऐसी बीमारी वाले मरीज को वहां रखा जा सके. साथ ही ये भी कहा है कि इस मामले में लालू यादव एक साल से ज्यादा की सजा काट चुके हैं. लालू यादव के वकील ने ये भी कहा है कि इसी मामले में जगन्नाथ मिश्र को बरी कर दिया गया है. इन सभी बातों का हवाला देते हुए लालू यादव के वकील ने कोर्ट से पीटिशन के जरिए कहा है कि लालू यादव को कम-से-कम सजा दी जाए. हालांकि कानून के जानकारों का मानना है कि इस पीटिशन से लालू यादव के फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेंगा.

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प्वाइंट्स में जानें क्या है मामला

–    वर्ष 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की निकासी पशु चारे के नाम पर हुई थी.

–    निकासी के मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे.

–    मामले में सीबीआई ने 27 अक्तूबर 1997 को मुकदमा संख्या आरसी/64 ए/1996 दर्ज किया था.

–    सीबीआई ने लालू यादव, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद, पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश शर्मा एवं ध्रुव भगत, आर के राणा, तीन आईएएस अधिकारी फूलचंद सिंह, बेक जूलियस एवं महेश प्रसाद, कोषागार के अधिकारी एस के भट्टाचार्य, पशु चिकित्सक डा. के के प्रसाद तथा शेष अन्य चारा आपूर्तिकर्ता आरोपी बनाया था.

–    सभी 38 आरोपियों में से 11 की मौत हो चुकी है.

–    तीन सीबीआई के गवाह बन गये.

–    दो ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया था. जिसके बाद उन्हें 2006-7 में ही सजा सुना दी गयी थी.

–    बचे 22 आरोपी पर चल रहा था मुकदमा.

–    सीबीआई के विशेष अदालत के न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने फैसला 13 दिसंबर को सुरक्षित रख लिया था.

–    आरोपियों पर सीबीआई ने आपराधिक षड्यन्त्र, गबन, फर्जीवाड़ा, साक्ष्य छिपाने, पद के दुरुपयोग आदि से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120बी, 409, 418, 420, 467, 468, 471, 477 ए, 201, 511 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13:1:डीः एवं 13:2 के तहत मुकदमा दर्ज किया था.

–    गबन की धारा 409 में दस वर्ष तक की और धारा 467 के तहत तो आजीवन कारावास का प्रावधान है.

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