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लातेहार में झामुमो ने फूंका सीएम का पुतला, कहा दोषी अफसरों के प्रति क्यों नहीं कम हो रहा सरकार का मोह

Latehar :  मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) लातेहार जिला कमेटी ने जुलूस निकाला और समाहरणालय परिसर के समीप सीएम का पुतला दहन किया. पुतला दहन किये जाने के बाद जिलाध्यक्ष लाल मोतीनाथ शाहदेव ने कहा कि सरकार दोषी अफसरों को संरक्षण देने का काम कर रही हैं. सरकार ऐसा करके जनता के अधिकारों का शोषण कर रही है. अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो राज्य का भला नहीं हो सकता है.

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सरकार का दोषी अफसरों के प्रति मोह का कम नहीं होना राज्य के लिये चिंता का विषय

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, डीजीपी डीके पांडेय और एडीजी की करनी जनता के सामने आ चुकी है. लेकिन फिर भी इन दोषी अफसरों के प्रति सरकार का मोह कम होने का नाम नहीं ले रहा है. जो कि पूरे राज्य के लिये चिंता का विषय है. शाहदेव ने सीएम के कार्यकाल पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि सीएम ने जनता को कई वादे किये लेकिन उसे पूरा नहीं किया गया. क्षेत्र में बेरोजगारी, शिक्षा, कृषि व स्वास्थय मामले को लेकर भी उन्होंने सरकार पर जमकर भड़ास निकाली. वहीं इस मौके पर शमसेर खान, शीतमोहन मुंडा, रवि गंझू, अरूण दूबे, इंद्रदेव उराव, सेलेस्टीन कूजूर, गोपाल सिंह, अशोक पाण्डेय, दीपू सिन्हा, प्रतिमा सिंह, बेलासी टोपनो, निर्मला देवी व संदीप राम समेत कई लोग मौजूद थे.

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नेता और विधायक भी लगातार कर रहे हैं इसका विरोध

गौरतलब है कि बजट सत्र के तीनों दिन विधानसभा के बाहर विपक्ष के विधायकों ने जोरदार हंगामा किया. प्रदर्शन के दौरान नारे लगाये गये  कि मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, डीजीपी डीके पांडेय और एडीजी को अविलंब पदमुक्त किया जाए. वहीं बुधवार की रात एनडीए विधायकों की एक मीटिंग हो रही थी. जिसमें चारा घोटाले में राजबाला का नाम आने के बाद उन पर फैसला किया जाना था. टेलीग्राफ के अनुसार उस बैठक में मौजूद तीन विधयाकों ने सरयू और रघुवर के बीच हुए तनावपूर्ण बहस की पुष्टि की है. रघुवर दास ने राजबाला का बचाव करते हुए माना था कि सीएस अच्छा काम कर रही हैं. इसलिए उन्हें हटाने की कोई जरुरत नहीं. इस पर सरयू राय गरम हो गए और सीएस के खिलाफ कई गड़बड़ियों का उदाहरण देने लगे. राय ने कहा कि राजबाला जब रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट में सचिव थीं तो रांची-रामगढ़ (वाया पतरातु) सड़क में उन्होंने 300 करोड़ के बजाये 400 करोड़ रुपये खर्च किये थे. उस प्रोजेक्ट के एक्स्ट्रा 100 करोड़ के खर्च को कैबिनेट में एप्रूव किया था. उस वक्त भी मैंने इसका विरोध किया था. विकास आयुक्त अमित खरे को मामले को देखने की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी, मगर उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया था कि वह अपने ही बॉस के खिलाफ जांच करने में असमर्थ हैं.

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सरयू राय ने सीएस के खिलाफ दिए कई उदाहरण

इसके अलावे सरयू राय ने सीएस के खिलाफ कई और उदाहरण भी दिये. उन्होंने कहा कि राशन और आधार कार्ड को लिंक करने और राशन रोकने का निर्णय और आदेश राजबाला वर्मा ने ही दिया था. खाद्य आपूर्ती मंत्री ने मुख्यमंत्री से यह भी कहा कि साहेबगंज-गोविंदपुर हाईवे का निर्माण अब तक सुनिश्चित नहीं किया जा सका है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद उस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था. यह सीएस कार्य असक्षमता को दिखाता है. द टेलीग्राफ ने उक्त रिपोर्ट में लिखा है कि मुख्यमंत्री से जब इस बारे में पूछा गया तो वे बस मुस्कुरा के आगे चल दिये. सरयू राय ने भी दोनों नेताओं के बीच हुए बहस के बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया. हालांकि उस मीटिंग में मौजूद तीन विधायकों ने सरयू राय और रघुवर दास के बीच हुए तनावपूर्ण बहस की पुष्टि की.

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