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लातेहार: बूढ़ा पहाड़ के उन इलाकों में सरकार बनवाने जा रही है सड़क, जहां कुछ माह बाद भर जायेगा पानी

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Manoj Dutt Dev

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Latehar, 30 November: झारखण्ड और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित बूढ़ा पहाड़ को नक्सल मुक्त बनाने के लिए सरकार ने अभियान चला रखा है. लेकिन इस अभियान के अलावा सरकार बूढ़ा पहाड़ के इलाके में सड़क निर्माण करवाने जा रही है और इस निर्माण के जरिए खरबों रूपये  भी बर्बाद होने जा रहा है. दरअसल बूढ़ा पहाड़ के इलाके में पथ निर्माण विभाग ने लातेहार में तीन और गढ़वा पथ निर्माण विभाग को एक अनुपयोगी सड़क निर्माण का जिम्मा दिया है और अब इसका सर्वे का काम भी शुरू हो चुका है. लेकिन इस निर्माण पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.

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सरकार और पुलिस की संयुक्त बैठक में हुआ है पथ निर्माण का निर्णय

वहीं मुख्य अभियंता केंद्रीय निरूपण संघटन पथ निर्माण विभाग झारखण्ड रांची के पत्राचार के०नी०सं 04 डीपीआर 01/20111-1445 दिंनाक 17/11/2017 के अनुसार, कार्यपालक अभियंता अग्रिम योजना क्षेत्र पथ निर्माण विभाग रांची को निर्देश दिया गया है कि, पुलिस महानिदेशक झारखण्ड रांची के साथ बैठक के दौरान बूढ़ा पहाड़ इलाके में पथ निर्माण का सूत्रण हेतु निर्णय लिया गया है. जिसकी जिम्मेवारी लातेहार और गढ़वा पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता को दिया गया है.

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इन पथों का होना है निर्माण

वहीं मुख्य अभियंता केंद्रीय निरूपण संघटन पथ निर्माण विभाग झारखण्ड रांची के पत्राचार में जिन पथों  के निर्माण का जिक्र है. वो हैं – लातेहार जिला अन्तर्गत बरवाडीह से मंडल भाया मोरवाई, बरवाडीह करमडीह भाया लाटू, भाया तिसिया और लाभार लाटू भाया मोरवाई. वही गढ़वा जिला के अन्तर्गत भंडरिया तुमोर भाया बर्कुला तुरेर पथ है, जिसका सर्वे कार्य भी प्रारम्भ हो चुका है. वहीं दोनों जिलों के पथ निर्माण विभाग के अभियंता अब सड़क निर्माण का नक्श भी लगभग पूरा करने वाले ही हैं. इसके अलावा  विभाग आदेश आने के बाद से दिन -रात पथ निर्माण के लिए कार्य भी कर रहे हैं.

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सवाल – क्या पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र के जानवर करेंगे पथ का इस्तेमाल ?

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सरकार के इस निर्माण को लेकर कई तरह के सवालिया निशान भी उठ रहे हैं. पहला सवाल यह है कि   झारखंड सरकार बूढ़ा पहाड़ के इलाके में जिन पथों का निर्माण करना चाहती है. उन सड़कों की उपयोगिता क्या होगी. यह सवाल इसलिए क्योंकि वन विभाग उस इलाके से ग्रामीणों को पुनर्वासित कर दूसरे जगह बसा रही है तो ऐसे में क्या उस पथ पर पलामू टाइगर रिजर्व के जानवर चलेंगे.

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बूढ़ा पहाड़ के नजदीकी गांव के ग्रामीण पुनर्वास को लेकर दे चुके हैं सहमति

वहीं इसके अलावा यहां दूसरा सबसे अहम सवाल यह भी है, सरकार का मानना है कि बूढ़ा पहाड़ नक्सल मुक्त तभी हो पायेगा, जब उस इलाके में पथों का निर्माण होगा. लेकिन क्या इससे खरबों रुपयों से बनने वाली सड़कें और पुल मंडल डैम कि बलि चढ़ेगी क्योंकि सूबे की सरकार पथ निर्माण विभाग से बूढ़ा पहाड़ के जिन इलाको में सड़कों को बनाना चाहती है, वो पूरा क्षेत्र पलामू टाइगर रिजर्व के साथ-साथ कुटकु मंडल डैम का डूब क्षेत्र भी है. इसके अलावा डैम निर्माण के लिए पलामू टाइगर रिजर्व ने अपनी ज़मीन मंडल डैम के लिए छोड़ भी दी है और मंडल डैम का निर्माण कार्य साल 2018 से शुरू होने वाला है और डैम के निर्माण के वक्त जैसे ही गेट लगेगा तो पूरा इलाका जलमग्न हो जायेगा. जिसका नतीजा यह होगा कि विभाग खरबों की लागत से जिन सड़कों का निर्माण वहां करने वाली है, वह डूब जायेंगीं और पुल से ऊपर सा भी पानी बहेगा.

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मंडल डैम के निर्माण से डूबने वाले गांव   

कुजरुम, लाटू, चेमो, सानिया, मेराल, मंडल, तिसिया, करमडीह, लात, वनखेत, सेरेंदाग, पुन्दाग, नवरनभु सहित दर्जनों ऐसे गांव हैं जो बूढ़ा पहाड़ वाले इलाके के आस-पास हैं और ये सभी जलमग्न हो जायेंगे.  

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