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लड़ने वालों को जेल में डालकर तानाशाही हुकूमत चला रही सरकार (न्यूज विंग की खास बातचीत में सुनिये और क्या कहते हैं प्रदीप यादव)

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Pravin Kumar

News Wing Ranchi, 26 November: झारखंड विधानसभा में विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा माने जाते हैं प्रदीप यादव. झारखंड विकास मोर्चा विधायक दल के नेता प्रदीप यादव विधानसभा के सभी सत्र में सबसे ज्यादा मुखर और आक्रामक नजर आते हैं. उनके पास सरकार को घेरने के लिए सवालों और मुद्दों की कोई कमी नहीं है. विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी झामुमो ने बीते कई विधानसभा सत्रों में सदन का बहिष्कार कर दिया, उस वक्त प्रदीप यादव ही मोर्चा संभाले हुए थे. हर ज्वलंत मुद्दों पर उनके पास सरकार से पूछने के लिए सवाल थे. सदन के बाहर भी वो पूरी मजबूती के साथ सरकार के खिलाफ डटे रहते हैं. गोड्डा में अडाणी का पावर प्लांट लगाये जाने के विरोध में उन्होंने जोरदार आंदोलन किया था. इस आंदोलन के कारण वे 5 महीने जेल में भी रहे. हाल ही में जेल से बाहर आये हैं और एक बार फिर से मुखर होकर सरकार के खिलाफ जोरदार तरीके से आवाज उठा रहे हैं. झारखंड की राजनीतिक दशा और दिशा के साथ-साथ जनमुद्दों को लेकर प्रदीप यादव से हमारे वरीय संवाददाता प्रवीण कुमार ने खास बातचीत की है.

सवालः पीटीपीएस जमीन अधिग्रहण, घटिया मोबाइल फोन वितरण और मुख्यमंत्री के बेटे का सरकारी खर्च पर मुंबई जाने समेत भ्रष्टाचार के कई मामले हाल के दिनों में सामने आये हैं. झाविमो आखिर न मामलों पर चुप क्यों है.

जवाबः इस तरह के भ्रष्टाचार के मुद्दों का झाविमो हमेशा लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करती रही है. पीटीपीएस के जमीन अधिग्रहण के खिलाफ विधानसभा में आवाज उठाने वाला मैं पहला व्यक्ति हूं. उस वक्त इसपर सरकार के पास कोई जवाब नहीं था. इसे लेकर कई आंदोलन किये गये, लेकिन सरकार प्रतिपक्ष की आवाज को गैर कानूनी ढंग से कुचलने का काम कर रही है. रघुवर राज में यह सरकार पार्टी और स्वयं के हित में काम कर रही है. इनके तमाम गैर कानूनी काम जनता के सामने आयेंगे, जब ये हटाये जायेंगे. मोबाइल वितरण और खरीद में भी गड़बड़ी का मामला सामने आया है,  इसको लेकर जनता के बीच जाएंगे. जरूरत पड़ी तो लोकायुक्त के पास एफआईआर दर्ज कराएंगे, लेकिन राज्य की विडंबना यह है कि यहां लोकायुक्त के पर काट दिए गये हैं. अगर लोकायुक्त किसी मुद्दे पर जांच भी करें तो उनको सरकार से अनुमति लेनी होगी. जहां तक रघुवर दास के बेटे के सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा का सवाल है तो इसे शीतकालीन सत्र में उठाउंगा. भाजपा का पाखंड जनता के सामने आ जायेगा.

सवालः क्या लोकतंत्र में बहुमत की चलती है? क्योंकि ऐसा विधानसभा में देखने को मिल रहा है. विपक्ष जोरदार तरीके के जनता की आवाज उठा नहीं पा रहा है. विधानसभा में सिर्फ विधेयक पास हो रहे हैं और जनसरोकार के मुद्दे हाशिये पर चले जा रहे हैं.

जवाबः ऐसी बात नहीं विपक्ष विषय सक्रियता के साथ सरकार के कारगुजारियों का खिलाफ लड़ रहा है. सरकार को कई मद्दे पर विपक्ष और झारखंडी जनता के सामने झुकना पड़ा है. सीएनटी -एसपीटी एक्ट संशोधन के मुद्दे, सीसैट के मामला में सरकार को पीछे हटना पड़ा है. अडाणी को जमीन देने के मामले में संपूर्ण विपक्ष एक साथ खड़ा हुआ है. विपक्ष अपनी भूमिका का निर्वाह कर रही है आने वाले समय में झारखंड की राजनीति की नई रूपरेखा भी देखने को मिलेगी. झारखंड विकास मोर्चा हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ता रहा है. इसी कारण मुझे जेल में भी डाला गया. राज्य में लड़ने वालों को जेल में डालकर ये सरकार तानाशाही हुकूमत चलाना चाहती है.

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सवालः सीएनटी- एसपीटी एक्ट संशोधन के खिलाफ हुए आंदोलन में राजनीतिक दल पीछे रह गए और जनता आगे,  इस पर आपकी क्या राय है. 

जवाबः लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है. इस मुद्दे को राजनीतिक दलों ने भी उठाया और जनता ने भी साथ दिया. सारे विपक्षी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एक साथ खड़े हुए, जिसमें जनता का भी भरपूर सहयोग रहा और सरकार को झुकना पड़ा. प्रश्न यह उठता है कि सरकार मीडिया का प्रयोग करके जनता को दिग्भ्रमित करने का काम कर रही है. जनता को सही गलत का आकलन करने में थोड़ा समय लगता है, ऐसे में सरकार की नीतियों के खिलाफ थोड़ा विलंब से लोगगोलबंद होते हैं.

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सवाल : आदिवासी अंचल में लैंड बैंक का मामला जोर-शोर से उठा हुआ है. लैंड बैंक में वैसे जमीन को भी चिन्हित की गई है जो रास्ता हैं, मसना हैं. इसे आप किस तरह देखते हैं.
जवाबः इस मुद्दे  का हमलोग शुरू से ही विरोध कर रहे हैं. जिस पत्र के माध्यम से गैरमजरूआ खास जमीन को सरकार ने लैंड बैंक में डाला है. हमने उस पत्र को ही निरस्त करने की मांग की थी. पार्टी के हर एक कार्यक्रम में लैंड बैंक का मुद्दा खास होता है. सरकार गरीब भूमिहीन लोगों की जमीन पूंजीपतियों को देने का काम कर रही है इसके अनेक उदाहरण अब सामने आ रहे हैं लैंड बैंक के विरोध की लड़ाई को भी हम जीतेंगे.

सवाल: शहर में सड़कों का निर्माण हो रहा है, फिर तोड़ा जा रहा है और नलियां बनाए जा रहे हैं आखिर यह निर्माण किस तरह के विकास की ओर इशारा कर रहा है. इससे सरकार की क्या मंशा जाहिर होती है.

जवाब: कुछ दिन पूर्व यह बात गुजरात के विकास के मामले में सामने था कि गुजरात में विकास पागल हो गया है. जबकि झारखंड के संदर्भ में यह बात नहीं है, बल्कि झारखंड में तो विकास ही बेपटरी हो गई है. विकास में जनता की जरूरतों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है. सरकार की प्राथमिकता वैसे क्षेत्र हैं, जहां उसे मोटी कमीशन मिल सके. सड़कों के निर्माण, नालियों के निर्माण में मोटी कमीशन का खेल है. इसे हम इस तरीके से भी देख सकते हैं, जहां एक समय राज्य कुल बजट 22 सौ करोड़ रुपया था. आज सरकार धनबाद से रांची की सड़क इतनी लागत में बनवा रही है. बड़ी कंपनियों को ठेका देकर बड़ा-बड़ा कमीशन लिया जा रहा है. सरकार विकास का आवरण लेकर जनता को लूटने का काम कर रही है.

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सवाल: रांची से बोकारो तक जाने में 3 स्थानों पर टोल टैक्स वसूला जा रहा है, जबकि सड़क निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ इसे आप किस तरीके से देखते हैं. क्या यह संस्थागत लूट है.

जवाब : हां सरकार में बैठे लोग अपने ऐशोआराम के लिए जनता पर टैक्स का बोझ लगातार बढ़ा रहे हैं. आखिर कितनी बार सरकार आम जनों से टैक्स वसूलेगी. जीएसटी, होल्डिंग, रोड टैक्स और न जाने कितने टैक्स का भार जनता पर लदा जा रहा है. अब तो गांव के लोगों को भी टैक्स के दायरे में लाने की कवायद शुरू हो गई, दूसरी ओर भारत सरकार के मंत्री कहते हैं कि टोल टैक्स समाप्त किया जाएगा और झारखंड में लगातार यह बढ़ता जा रहा है. इन सारे कारगुजारियों के खिलाफ जनता के मन में काफी आक्रोश है जो कि आने वाले समय में स्पष्ट दिखाई देगा.

सवाल: अडाणी पावर प्लांट के खिलाफ आपने आंदोलन किया. कार्बन उत्सर्जन को लेकर अगर हम देखें तो यह कार्बन भारत के हिस्से में आएगा और बिजली बांग्लादेश को मिलेगी. इसे आप किस तरीके से देखते हैं.

जवाब : अडाणी पावर प्लांट के मामले में सरकार की सारी नीतियों को स्थिर कर दी गई है जो जगजाहिर है. इस कंपनी के मालिक के साथ देश के प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के काफी निकटवर्ती संबंध है ऐसे में उन्हें लाभ देने का काम केंद्र से लेकर राज्य स्तर पर किया जा रहा है. अडाणी पावर प्लांट में कुल 400 नौकरियां सृजित होंगी जिसमें  एक भी झारखंड के लोगों को नहीं मिल पाएगा. यह प्लांट व्यवसायिक रूप से भी लाभकारी नहीं है और ना ही रोजगार देने की दृष्टि से. इसलिये  इस प्लांट का हम विरोध कर रहे हैं. आने वाले समय में अपनी लड़ाई को और भी तेज करेंगे.

सवाल: 2019 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की क्या खास तैयारी होगी.

जवाबः 2019 के चुनाव को लेकर पार्टी अपनी रणनीति पर काम कर रही है. 15 जनवरी तक पार्टी अपनी संगठन का ढांचा पंचायत स्तर तक मजबूत करेगी. अप्रैल में बूथ स्तर तक हम अपने संगठन को दुरूस्त कर लेंगे. हम उन तमाम सीटों का पार्टी के स्तर पर आकलन कर रहे हैं, जिसपर हमारी उम्मीदवारी मजबूत है. हां यह सच है कि दूध का जला छाछ को भी फूंक-फूंक कर पीता है. इस बार हम वैसे कैंडिडेट को ही सामने लाएंगे जो पार्टी और जन सरोकार के मुद्दे पर समर्पित हो. उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया बारीकी के साथ की जाएगी और पूरे मजबूती के साथ आने वाले विधानसभा में पार्टी चुनाव लड़ेगी.

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