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लखवी की रिहाई के आदेश पर भारत का कड़ा रुख

नई दिल्ली/इस्लामाबाद : भारत ने शुक्रवार को 26/11 हमले के मुख्य साजिशकर्ता जकीउर रहमान लखवी को जेल से रिहा करने के आदेश जारी होने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और पाकिस्तानी उच्चायुक्त को तलब कर विरोध जताया।

यह मुद्दा राज्यसभा में भी उठाया गया और सदन में सदस्यों ने रिहाई पर विरोध जताया।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि भारत ने पाकिस्तानी अधिकारियों से बात कर लखवी को रिहा न करने की बात कही।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया गया और इस्लामाबाद उच्च न्यायालय की ओर से लखवी को रिहा करने के दिए गए आदेश पर कड़ा विरोध जताया गया।

बासित ने हालांकि, बैठक से बाहर आने के बाद मीडिया से कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

रिजिजू ने यहां संवाददाताओं से कहा, “पाकिस्तान की अदालतों में मुंबई हमले में उसके शामिल रहने से संबंधित सभी दस्तावेज पेश नहीं किए गए हैं। इसीलिए न्यायालय ने उसकी रिहाई के आदेश जारी किए हैं।”

मंत्री का बयान इस्लामाबाद उच्च न्यायालय की तरफ से शुक्रवार को लखवी की हिरासत को अवैध करार देते हुए तत्काल उसे रिहा करने का आदेश देने के बाद आया है।

रिजिजू ने कहा, “हम चाहते हैं कि पाकिस्तान सरकार इस मामले को गंभीरता से ले और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए कि उसकी जेल से रिहाई न हो।”

इधर, राज्यसभा में इस मुद्दे पर थोड़ी देर हंगामा हुआ। शून्यकाल में मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस सदस्य के प्रमोद तिवारी ने कहा, “मुंबई हमला भारत में हुआ था। अगर देश के अंदर आपराधिक घटनाएं होती हैं, देश की सीमा के अंदर कानूनी मामला दर्ज किया जाना चाहिए। लखवी पाकिस्तान की जेल में है और अब उसे रिहा किया जा रहा है।”

हालांकि, उप सभापति पी.जे.कुरियन ने तिवारी को इस मुद्दे को उठाने की इजाजत नहीं दी, क्योंकि इस पर कोई नोटिस नहीं दिया गया था। उन्होंने तिवारी को इसे अगले दिन उठाने के लिए कहा। लेकिन तिवारी ने उप सभापति से मुद्दे को उठाने देने की अनुमति की मांग करते हुए कहा, “यह राष्ट्र हित का मामला है।”

वहीं, कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा, “यदि जमानत आज दी गई, तो हम बाद में मुद्दा कैसे उठा सकते हैं।”

कुरियन ने कहा कि सदन को इसकी जानकारी पहले से ही है।

लखवी सहित छह अन्य संदिग्धों को फरवरी 2009 से हिरासत में रखा गया है। उस पर नवंबर 2008 में मुंबई हमले की साजिश रचने का आरोप है, जिसमें 166 लोगों की जान चली गई थी।

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