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रिम्स में गलत फैक्टर देने के कारण हीमोफीलिया मरीज की हालत गंभीर (देखें वीडियो)

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Ranchi, 08 December : हीमोफीलिया के मरीजों के लिए पूरे विश्व पटल पर विशेष सुविधा का प्रवधान है. इसके लिए विभिन्न सगठनों के द्वारा रिम्स में फण्ड मुहैया कराया जाता है. लेकिन राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल में सुधार की गुंजाइश शायद ही दिखाइ देती है. रिम्स में इलाज करवाने आये हिमोफीलिया के मरीजों को जो इलाज मिलता है वो जान कर आप भी हैरान हो जाएंगे. हिमोफीलिया के मरीज रिम्स प्रबंधन के रवैये से नाराज़ चल रहे है. इस बीमारी से ग्रसित मरीज हर वक्त इमरजेंसी के हालत में रहते हैं. ऐसी हालत में भी किसी मरीज को 12 दिनों से दवा नहीं मिलती तो किसी मरीज को अस्पताल के चक्कर और कागजी प्रक्रिया में घंटों इंतजार करना पड़ता है. दवा देने के समय भी कोई आधिकारी मौजूद नहीं रहता. ऐसी परिस्थिति में मरीज के जान पर खतरा मंडराता रहता है. 

रिम्स प्रबंधन की लापरवाही के कारण हीमोफीलिया मरीज अश्लेष की हालत गंभीर 

मेडिसिन विभाग के आरके झा के यूनिट में भर्ती चतरा पिपरवार के बचरा निवासी 32 वर्षीय अश्लेष सिंह हीमोफीलिया से गर्सित हैं. इन्होंने बताया कि 12 दिन से रिम्स में भर्ती है और हिमोफीलिया का सही फैक्टर नहीं दे कर फैक्टर 8 दिया गया है. वेल्लौर से खून जांच करने के बाद मालुम हुआ कि हेमोफीलिया है. लेकिन अभी तक हिमोफिलिया का सही फैक्टर नहीं मिला है. जो दवाईयां दी जा रही थी उससे कोई फायदा नहीं हुआ है. पैर खराब हो रहा है. यदि ज्यादा बिमारी बढ़ गयी तो पैर कटना पड़ सकता है. रिम्स प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा मुझे भुगतना पड़ रहा है.

रिम्स की लचर व्यवस्था के कारण मरीजों को होती है समस्या 

हिमोफीलिया सोसाइटी के संतोष जायसवाल ने बताया कि 2014 से भारत में फैक्टर की शुरुवात हुई है. हमलोगों ने थर्ड जेनेरशन फैक्टर की मांग की थी, लेकिन टेंडर निकालने के बावजूद 50 साल पूर्व की पद्धति को बहाल किया गया. जिसमें इन्वेटर और हेपटाइटिस ब्लीडिंग डिसऑर्डर की समस्या ज्यादा होती है. अश्लेष सिंह के साथ भी ऐसा ही हुआ है. उन्हें ब्लड प्रोडक्ट लगाने के कारण इन्वेटर हो गया है. कारन उन्हें दिया जाने वाला फैक्टर काम नहीं कर रहा है. यदि सही फैक्टर देने में और विलंब हुआ तो उनका पैर काटना पड़ सकता है. रिम्स प्रसाशन कमिशन के चक्कर में हमलोगों को समय पर दावा उपलब्ध नहीं करा रही है. हम हर वक्त इमरजेंसी की स्थिति में रहते है.

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