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रिम्स में अव्यवस्था का आलम, जमीन पर ही होता है मरीजों का इलाज (देखें वीडियो)

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Saurabh Shukla

Ranchi, 9 December :  सूबे में इन दिनों हाड़ कंपा देने वाली ठण्ड पड़ रही है.लोग अपने घरों में रजाई-कंबल और रूम हीटर के सहारे ठण्ड से बचने के लिए इस्तेमाल कर रहे है. लेकिन राजधानी रांची के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल  साइंस(रिम्स) में मरीजों की बेबसी और परेशानियों को सुनने वाला कोई नहीं है. अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग में दर्जनों की संख्या में असहाय मरीज मजबूरन बरामदे की जमीन पर इलाज कराने को विवश हैं. करोड़ों रुपये की लागत से बने रिम्स अस्पताल में बेड की भारी किल्लत है.जबकि प्रति वर्ष करोड़ों रूपया राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर आवंटित करती है. लिहाजा ये पैसा कहा जा रहा है, ये सवाल यहाँ आने वाले मरीज रिम्स प्रबंधन से जानना चाहती है.

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15 दिन से जमीन पर चल रहा है इलाज : शिवचंद्र यादव 

रिम्स न्यूरोसर्जरी में अपने परिजन का इलाज करवाने आए बोकारो निवासी शिवचंद्र यादव ने कहा कि पिछले 15 दिन से जमीन पर इलाज किया जा रहा है.ठण्ड में बरामदे में कनकनी से  मरीज का स्वास्थ्य गिरता जा रहा है. बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन का इस ओर ध्यान नहीं है. 

22 तारीख से जमीन पर पड़ा हुआ हूं : प्रशांत ठाकुर 

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इसी वार्ड में इलाजरत मरीज प्रशांत ठाकुर ने कहा कि बरामदे में जमीन पर ही लेटा दिया गया है. शुरुआत में कुछ दवाई दी गयी. लेकिन अभी कई दिनों से वह भी नहीं दी जा रही है. ठण्ड से पैर सुन्न हो गया है. किसी तरह घर से लाए कम्बल को ओढ़ ठण्ड से जूझने की कोशिश कर रहे हैं. 

पिता का हुआ था एक्सीडेंट, मरहम की जगह जख्म दे रहा है रिम्स: विक्रम  

बोकारो से अपने पिता के इलाज के लिए आये विक्रम ने कहा की एक्सीडेंट में पिता जख्मी हो गये थे. एक सप्ताह पूर्व रिम्स इलाज के लिए आया. लेकिन आज तक बेड की व्यवस्था नहीं की गयी है.दुर्घटना में उनके जबड़े की हड्डी टूट चुकी है.ठण्ड लगने से चेहरा और सूज जाता है. लेकिन कोई हमारी सुनाता ही नहीं है.  

 

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