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रिम्स की जमीन पर अतिक्रमण, लोग कर रहे हैं अवैध कब्जा

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Saurav Shukla

Ranchi, 30 November: सूबे का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल रिम्स कई एकड़ में फैला है. 15 अगस्त 2002 में राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल(आरएमसीएच) का नाम बदलकर राजेंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स)कर दिया गया. लेकिन कागज़ी प्रक्रिया और दस्तावेज के चक्कर में उलझ जाने से रिम्स की जमीन पर दलालों की पैनी नजर टिकी हुई है. जमीन पर अवैध कब्जा करने के साथ-साथ जमीन को बेचने का भी काम किया जा रहा है.

रिम्स द्वारा आवंटित क्वार्टर में शिफ्ट होने के बाद शुरू होता है अतिक्रमण

रिम्स की जमीन में बनाए गए क्वार्टर में पहले कर्मचारी सर्विस के दौरान शिफ्ट होते हैं. वहीं रिटायरमेंट के बाद भी क्वार्टर पर कर्मचारियों का कब्जा रहता है. परिवार बढ़ने पर क्वार्टर के आसपास कच्चा मकान भी बनाया गया है. रिम्स के गेट नंबर दो स्थित बरियातू-बूटी रोड के पास की जमीन पर भी चारदीवारी का निर्माण किया गया है. जबकि रिम्स के आसपास दलालों की सक्रियता के कारण रिम्स के क्वार्टर भी किराये पर दिया जाता है. रिम्स के ही एक क्वाटर में रह रहे परिवार के सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 3500 रुपया किराया देकर इस घर में रह रहे हैं. यहां मकान लेने वाले की संख्या काफी अधिक है. रिम्स के कई ऐसे रिटायर्ड कर्मचारी हैं जिनका 3 से 4 क्वार्टर पर कब्जा है. इतना ही नहीं रिम्स के जमीन पर मंदिर भी बनाया गया है. जबकि कॉलोनी के पीछे की दीवार को बस्ती वालों ने तोड़कर कई मकान बना लिया है.

कोर्ट के दस्तावेज देखने के बाद पता चला कि रिम्स को नहीं बनाया पार्टी: डॉ.आरके श्रीवास्तव

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रिम्स निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने कहा कि रिम्स से पहले यह आरएमसीएच था और पीडब्ल्यूडी जमीन का देख भाल करता था. उन्होंने कहा कि जहां तक क्वार्टर नंबर 1 के पास की जमीन पर अतिक्रमण हुआ है तो वह कोर्ट का आदेश से हुआ है. कोर्ट के दस्तावेज देखने के बाद पता चला है कि रिम्स को पार्टी न बनाकर पीडब्ल्यूडी को पार्टी बना दिया गया. मुझे जब जमीन कब्जा होने की सूचना मिली तब हमलोगों ने कानूनी सलाह लेने का निर्णय लिया. रिम्स के वकील से संपर्क करने के बाद भू अर्जन पदाधिकारी के द्वारा नक्शा निकलवाया. अब उस पर हम लोग दावा करेंगे कि यह जमीन हमारी थी और इस निर्णय पर रिव्यू किया जाए ताकि कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्यवाही की जा सके.

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