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राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर दी श्रद्धांजलि

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New Delhi : दिग्गज समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें नमन किया. राष्ट्रपति कोविंद ने जहां डा. लोहिया आज भी प्रेरणा स्रोत बताया, वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें जमीनी स्तर की राजनीति के लिये अनुकरणीय बताया. 

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क्या कहा राष्ट्रपति ने

राष्ट्रपति ने अपने ट्वीट में कहा कि डा. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि. उन्होंने कहा कि डा. लोहिया ने एक न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और समतामूलक समाज की स्थापना के लिये अपना जीवन अर्पित कर दिया. कोविंद ने कहा कि जन कल्याण की खातिर संवेदनशील शासन के लिये डा. लोहिया आज भी प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं.

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क्या कहा प्रधानमंत्री ने

प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा कि डा. राम मनोहर लोहिया 20वीं सदी के भारत की सबसे उत्कृष्ठ शख्सियतों में एक थे. उन्होंने शैक्षणिक उत्कृष्ठता को जमीनी स्तर की राजनीति से जोड़ा जो अनुकरणीय है. उन्होंने कहा कि उनके समृद्ध विचार सामाजिक राजनीतिक परिचर्चा को आकार देना जारी रखेंगे . मैं डा. लोहिया को उनके जन्मदिवस पर नमन करता हूं.

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1918 में पहली बार कांग्रेस अधिवेशन में शामिल हुए थे राम मनोहर लोहिया

गौरतलब है कि दिग्गज समाजवादी नेता एवं चिंतक डा. राम मनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को अकबरपुर में हुआ था. उनके पिताजी हीरालाल पेशे से अध्यापक व हृदय से सच्चे राष्ट्रभक्त थे. उनके पिताजी गांधीजी के अनुयायी थे. जब वे गांधीजी से मिलने जाते तो राम मनोहर को भी अपने साथ ले जाया करते थे. इसके कारण गांधीजी के विराट व्यक्तित्व का उन पर गहरा असर हुआ. पिताजी के साथ 1918 में अहमदाबाद कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार शामिल हुए. बनारस से इंटरमीडिएट और कोलकता से स्नातक तक की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने उच्‍च शिक्षा के लिए लंदन के स्‍थान पर बर्लिन का चुनाव किया था. वहीं जाकर उन्होंने मात्र तीन माह में जर्मन भाषा पर अपनी मजबूत पकड़ बनाकर अपने प्रोफेसर जोम्‍बार्ट को चकित कर दिया. उन्होंने अर्थशास्‍त्र में डॉक्‍टरेट की उपाधि केवल दो वर्षों में ही प्राप्‍त कर ली.

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1935 में लोहिया को कांग्रेस का महासचिव नियुक्‍त किया गया

जर्मनी में चार साल व्‍यतीत करके, डॉ. लोहिया स्‍वदेश वापस लौटे और किसी सुविधापूर्ण जीवन के स्‍थान पर जंग ए आजादी के लिए अपनी जिंदगी समर्पित कर दी. 1933 में मद्रास पहुंचने पर लोहिया गांधीजी के साथ मिलकर देश को आजाद कराने की लड़ाई में शामिल हो गए. इसमें उन्होंने विधिवत रूप से समाजवादी आंदोलन की भावी रूपरेखा पेश की. सन् 1935 में उस समय कांग्रेस के अध्‍यक्ष रहे पंडित नेहरू ने लोहिया को कांग्रेस का महासचिव नियुक्‍त किया. बाद में अगस्‍त 1942 को महात्‍मा गांधी ने भारत छोडो आंदोलन का ऐलान किया, जिसमें उन्होंने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और संघर्ष के नए शिखरों को छूआ. 

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