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रायपुर पत्थलगड़ी को सीएम ने बताया असंवैधानिक और षड़यंत्र, अरविंद नेताम ने कहा – कानून का पालन नहीं होने का नतीजा है पत्थलगड़ी

Raipur: बिरसा मुंडा की कर्मभूमी से ग्रामसभा के अधिकार के लिए शुरू की गई पत्थलगड़ी आंदोलन अब झारखंड की सीमा को लांघते हुए राज्य के बाहर के आदिवासी अंचलो में फैल गया है. पत्थलगड़ी को लेकर बीते सप्ताह छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में टकराव की स्थिती उत्पन्न हो गयी थी. वहीं छत्तीसगढ़ सरकार ने पत्थलगड़ी करने वाले लोगों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया है. जिसमें एक मुखिया समेत आठ लोगों की गिरफ्तारी अब तक हो चुकी है. वहीं मुख्यमंत्री ने इस आंदोलन के पीछे धर्मांतरण को बढ़ावा देने वालों का हाथ होने की बात कही है.

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छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल इलाका जशपुर जिले के बछरांव गांव में पिछले महीने की 22 तारीख को ओएनजीसी के पूर्व अधिकारी जोसेफ तिग्गा और उनके सहयोगी तथा भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी एच पी किंडो ने आदिवासियों को एकत्र कर पत्थलगड़ी कार्यक्रम का आयोजन किया था. आयोजन के बाद स्थानीय मीडिया में यह मामला सामने आया. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बगीचा क्षेत्र के गावों में ग्रामसभा का आयोजन किया गया और गांव के बाहर पत्थर गड़ाकर पांचवी अनुसूचित क्षेत्र के गांवों में बाहरी व्यक्ति के प्रवेश को बंद कर दिया गया. इसके बाद प्रशासन हरकत में आया. हालांकि बाद में क्षेत्र में महौल तब बिगड़ गया, जब 28 तारीख को आदिवासियों ने पुलिस का घेराव किया. इसके बाद पुलिस ने तिग्गा और किंडो समेत आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

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Sanjeevani

झारखंड से सटे इलाके में पत्थलगड़ी के बाद आठ लोग गिरफ्तार

जशपुर क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक क्षेत्र में पत्थलगड़ी के आयोजन के बाद नारायणपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत बुठुंगा गांव में दो समूहों में झड़प के बाद इलाके में तनाव फैल गया और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के अधिकारियों और पुलिस का घेराव किया था. इसके बाद पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

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क्या कहना है पत्थलगड़ी को लेकर स्थानीय पुलिस का

पुलिस के मुताबिक तिग्गा और जोसेफ पर आरोप है कि उन्होंने पत्थलगडी़ के नाम पर लोगों को प्रशासन के खिलाफ भड़काया था, जिससे क्षेत्र में तनाव फैला. जिले के गांवों में जब पत्थलगड़ी की गई तब गांवों के बाहर पत्थर लगाया गया, जिसमें सबसे ऊंचाई पर ग्राम सभा लिखा गया था. साथ  ही एक बोर्ड भी लगाया गया, जिसमें जनजातियों के रूढ़ी और प्रथा को विधि का बल प्राप्त होने और  विधानसभा या राज्यसभा द्वारा बनाया गया, कोई भी सामान्य कानूनों का अनुसूचित क्षेत्रों में लागू नहीं होने की जानकारी दी गई थी. साथ ही इसमें यह भी कहा गया था कि लोकसभा और विधानसभा से ऊंचा स्थान ग्राम सभा को प्राप्त है. बोर्ड में लिखा गया कि आदिवासी ही इस देश के असली मालिक हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गांवों में इसके माध्यम से तनाव नहीं फैले इसलिए यह कार्रवाई की गई है.

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क्या कहते हैं आदिवासी नेता अरविंद नेताम

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पत्थलगड़ी को लेकर सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक अरविंद नेताम कहते हैं कि गावों में खासकर अनुसूचित क्षेत्रों में पत्थलगड़ी का कार्यक्रम होता रहा है. देश में पंचायती राज व्यवस्था के लागू होने के बाद यह एक रिवाज के रूप में सामने आया. इसके माध्यम से गांव के बाहर एक छोटी सी दीवार की तरह बनाया जाता है या पत्थर लगाकर ग्राम सभा के अधिकारों के बारे में बताया जाता है. साथ ही नेताम कहते हैं कि देश में आदिवासियों के हितों में कई कानून बने, लेकिन इन कानूनों का पालन ठीक तरीके से नहीं हुआ. इससे आदिवासी समाज ठगा हुआ महसूस कर रहा है.

वह कहते हैं कि देश में पंचायत  एक्सटेंशन टू सेडूल एरिया एक्ट  पेसा कानून बनाया गया. लेकिन अभी तक इसका ठीक तरीके से पालन नहीं हो रहा है. आदिवासी क्षेत्रों की जमीनों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है. क्षेत्र में उद्योगों की भरमार हो गई है. ऐसे में आदिवासियों का अपने हक के लिए लड़ना स्वभाविक है. हालांकि पुलिस को बंधक बनाना या कानून को अपने हाथों में लेना उचित नहीं है. नेताम कहते हैं कि इन आंदालनों को राजनीतिक दल अपने नजरिये से देखते हैं और अपने हिसाब से इसकी व्याख्या करते हैं, जो ठीक नहीं है. राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के मुताबिक राज्य सरकार अनुसूचित क्षेत्रों में संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में असफल रही है. इसलिए इस तरह के आंदोलन हो रहे हैं.

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क्या कहते हैं पत्थलगड़ी के सवाल पर कांग्रेस नेता शैलेश नितिन त्रिवेदी

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छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री शैलेश नितिन त्रिवेदी कहते हैं कि आदिवासियों की मांग है कि उनके क्षेत्र के लिए बनाये गये संवैधानिक प्रावधानों को लागू किया जाए. लेकिन सरकार उनकी समस्याओं को समझ नहीं पा रही है. कांग्रेस ने इस मामले की जांच के लिए 17 सदस्यीय समिति का भी गठन किया है.

क्या कहते हैं मुख्यमंत्री रमन सिंह

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इधर मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस आंदोलन को ही असंवैधानिक करार दिया है. सिंह का कहना है कि यह देश में कैसे संभव है कि कोई भी व्यक्ति किसी गांव में प्रवेश नहीं कर सकता है. मुख्यमंत्री कहते हैं कि यह षड़यंत्र है. एक प्रकार की ताकत है, जो धर्मांतरण को बढ़ावा देना चाहती है. रमन सिंह कहते हैं कि इस आंदोलन का विरोध राज्य के सभी आदिवासी विधायक, सांसद, नेता और आम जनता कर रही है.

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