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राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद बदले संत के सुर, रद्द की नर्मदा घोटाला रथ यात्रा

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Indore : मध्यप्रदेश में चुनावी साल में जिन पांच लोगों को नर्मदा नदी की रक्षा के लिये राज्यमंत्री के दर्जे से नवाजा गया है, उनमें शामिल एक संत समेत दो लोगों ने सूबे की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रस्तावित ‘‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’’ रद्द कर दी है. इन लोगों ने राज्य सरकार पर सीधे सवाल उठाते हुए एक अप्रैल से “नर्मदा घोटाला रथ यात्रा” निकालने की घोषणा की थी, लेकिन राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद दोनों ने यह यात्रा रद्द कर दी है. वहीं जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से इन धार्मिक नेताओं को राज्यमंत्री का दर्जा देने के फैसले को लेकर सवाल पूछा गया तो वह कुछ भी कहने से बचते दिखे. उन्होंने मीडिया के इस सवाल कोई जवाब नहीं दिया.

Indore : मध्यप्रदेश में चुनावी साल में जिन पांच लोगों को नर्मदा नदी की रक्षा के लिये राज्यमंत्री के दर्जे से नवाजा गया है, उनमें शामिल एक संत समेत दो लोगों ने सूबे की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रस्तावित ‘‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’’ रद्द कर दी है. इन लोगों ने राज्य सरकार पर सीधे सवाल उठाते हुए एक अप्रैल से “नर्मदा घोटाला रथ यात्रा” निकालने की घोषणा की थी, लेकिन राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद दोनों ने यह यात्रा रद्द कर दी है. वहीं जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से इन धार्मिक नेताओं को राज्यमंत्री का दर्जा देने के फैसले को लेकर सवाल पूछा गया तो वह कुछ भी कहने से बचते दिखे. उन्होंने मीडिया के इस सवाल कोई जवाब नहीं दिया.

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इन संतो को दिया गया राज्यमंत्री का दर्जा

राज्य सरकार के तीन अप्रैल को जारी आदेश के अनुसार प्रदेश के विभिन्न चिन्हित क्षेत्रों में खासकर नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण तथा स्वच्छता के विषयों पर जन जागरूकता का अभियान लगातार चलाने के लिये 31 मार्च को विशेष समिति गठित की गई थी. इस समिति के पांच विशेष सदस्यों-नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, भैयू महाराज, कम्प्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत को राज्यमंत्री स्तर का दर्जा प्रदान किया गया है.

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तय की गयी थी नदी की बदहाली का मुद्दा उठाने की रूप-रेखा

बहरहाल, समिति में शामिल इंदौर के कम्प्यूटर बाबा की अगुवाई में एक अप्रैल से 15 मई तक प्रदेश के प्रत्येक जिले में “नर्मदा घोटाला रथ यात्रा” निकालकर इस नदी की बदहाली का मुद्दा उठाने की रूप-रेखा तय की गयी थी. इस मुहिम की प्रचार सामग्री सोशल मीडिया पर वायरल है. जिससे पता चलता है कि यह यात्रा नर्मदा नदी में जारी “अवैध रेत खनन पर अंकुश लगवाने” और “इसके तटों पर किये गये पौधारोपण के घोटाले” की जांच की प्रमुख मांगों के साथ निकाली जानी थी.

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आखिर क्यों निरस्त हुई यात्रा

राज्यमंत्री का दर्जा हासिल करने के बाद कम्प्यूटर बाबा ने कहा कि हम लोगों ने यह यात्रा निरस्त कर दी है, क्योंकि प्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी के संरक्षण के लिये साधु-संतों की समिति बनाने की हमारी मांग पूरी कर दी है. अब भला हम यह यात्रा क्यों निकालेंगे. यह पूछे जाने पर कि क्या एक संन्यासी के रूप में उनका राज्यमंत्री स्तर की सरकारी सुविधाएं स्वीकारना उचित होगा, उन्होंने जवाब दिया कि अगर हमें पद और दूसरी सरकारी सुविधाएं ​नहीं मिलेंगी, तो हम नर्मदा नदी के संरक्षण का काम कैसे कर पायेंगे. हमें समिति के सदस्य के रूप में नर्मदा नदी को बचाने के लिये जिलाधिकारियों से बात करनी होगी और दूसरे जरूरी इंतजाम करने होंगे. इसके लिये सरकारी दर्जा जरूरी है.” जिन योगेंद्र महंत को कम्प्यूटर बाबा के साथ विशेष समिति में शामिल कर राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है, वह “नर्मदा घोटाला रथ यात्रा” के संयोजक थे.

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कांग्रेस ने कम्प्यूटर बाबा और महंत की मंशा पर उठाये सवाल

बहरहाल, राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद महंत ने भी कहा कि नर्मदा नदी को बचाने के लिये समिति बनाये जाने की मांग प्रदेश सरकार द्वारा पूरी किये जाने के कारण यह यात्रा निरस्त कर दी गयी है. इस बीच, कांग्रेस ने कम्प्यूटर बाबा और महंत की मंशा पर सवाल उठाये हैं. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा कि इन दोनों को स्पष्ट करना चाहिये कि उन्होंने प्रदेश की भाजपा सरकार के साथ कौन-सी डील के तहत नर्मदा घोटाला रथ यात्रा रद्द कर दी है. क्या इन्होंने राज्यमंत्री का दर्जा हासिल करने के लिये ही इस यात्रा का ऐलान किया था.”

धार्मिक बाबाओं को मंत्री का दर्जा देना चौहान सरकार की कमजोरी दिखाता है : राज बब्बर

कांग्रेस नेता राज बब्बर ने मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार पर इस साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव से पहले पांच हिन्दू महात्मा और धार्मिक नेताओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिये जाने के निर्णय को लेकर हमला बोला. उत्तर प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष राज बब्बर ने कहा कि इससे चौहान की ‘कमजोरी’ पता चलती है क्योंकि उन्हें विधानसभा चुनाव में जीत के लिए धार्मिक नेताओं पर भरोसा करना पड़ रहा है. उन्होंने संसद के बाहर एक टीवी समाचार चैनल से कहा, ‘‘इससे चौहान की (चुनाव से पहले) कमजोरी पता चलती है..वह सोचते हैं कि भगवा वस्त्रों वाले धार्मिक नेताओं पर भरोसा कर वे चुनाव जीत सकेंगे जो अब असंभव प्रतीत हो रहा है.’’

इस कदम का सत्तारूढ़ भाजपा को कोई फायदा नहीं मिलेगा : राज बब्बर

बहरहाल, राज बब्बर ने कहा कि इस कदम का सत्तारूढ़ भाजपा को कोई फायदा नहीं मिलेगा क्योंकि चुनाव के नतीजे जनता की लहर से तय होते हैं तथा धार्मिक बाबाओं द्वारा नहीं. धार्मिक बाबाओं को निशाने पर लेते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्हें भिक्षुओं की तरह अपनी भूमिका एवं आश्रमों को त्याग कर गृहस्थ जीवन में वापस लौट जाना चाहिए. मध्य प्रदेश सरकार ने नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, कम्प्यूटर बाबा, भैयाजू महाराज एवं पंडित योगेन्द्र महंत को राज्य मंत्री स्तर का दर्जा दिया है.

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