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राज्य खाद्य आयोग के सदस्य रामकरण जी को ‘रोटी दो’ का नारा आखिर क्यों पसंद नहीं…??

Ranchi: 8 दिसंबर 2017 को मनिका में राशन पर आयोजित जनसुनवाई के अंत में  कार्डधारियों द्वारा लगाये गये नारों से राज्य खाद्य आयोग के सदस्य नाराजगी जाहिर किये हैं. पत्र में लिखे हैं कि भविष्य में राशन पर आयोजित जनसुनवाई में इस तरह के नारे  सरकारी पदाधिकारियों के सामने न लगाये जायें.

आपत्ति जायज है. नारे के बदले जय-जयकार करना चाहिये था. रामकरण सर जिंदाबाद. अमर रहे अमर रहे...

..और ये जो आयोग के लेटरहेड में झारखंड सरकार का लोगो कौन एथि से लगाए हैं, जे है से कि आयोग कौनो सरकार थोड़े है, ऊ तो इंडीपेंडेंट बॉडी है.

कोई RTI डाल कर खाद्य आयोग से पूछ ले जे लोगो लगावे का पावर कौन कानून से मिला है.

खाद्य आयोग को खाद्य आपूर्ति विभाग की चपरासी संस्था दिखाने वाला लेटरहेड भी हास्यास्पद है. आयोग उस विभाग के मातहत

Letterhead of Commission with logo of Jharkhand questioning autonomy

नहीं बल्कि उस विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के काम पर निगरानी रखकर खाद्य सुरक्षा कानून का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित कराने वाली स्वतंत्र और सुप्रीम बॉडी है.

आयोग मुझे समुचित कंसल्टेंसी फीस दे तो उनका स्तर उन्नत करने की उचित सलाह दे सकता हूं. राज्य खाद्य आयोग के सदस्य भूल रहे हैं कि उन्हें जिस कानून के द्वारा ये पद मिला है वह जनसंघर्षों का ही परिणाम है और जन संघर्षों को मजबूत बनाने में नारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.

ये आपत्तिजनक नारे क्या थे अगर श्रीमान रामकरण जी बता देते तो शायद और आसानी होती और भविष्य की जनसुनवाईयों में खाद्य आयोग और उसके सदस्यों के जिंदाबाद के नारे भी लगा देते. राज्य में भूख से हो रही मौतों पे खाद्य आयोग की जबान सील गयी लेकिन नारों पे नोटिस भेज दी.

खाद्य आयोग के सदस्यों की नाराजगी आपत्तिजनक है. जो सत्ता में हैं उनको नारों से डर लगता है. खाद्य आयोग के सदस्यों ने नाराजगी जता कर जाहिर कर दिया कि उनका सरोकार जनता के हक़ और हितों से नहीं बल्कि सत्ता के हितों से है.

झारखंड में भूख से मरने वाले भी एकदम ढीठ हैं. खाद्य आयोग के सरकार बहादुरों की जय-जयकार नहीं करते. रोटी दो के नारे लगाते हैं.

आयोग तेरा यह अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान. खाद्य सुरक्षा कमीशन के रामकरण जी को “रोटी दो” का नारा पसंद नहीं है सर जी, क्योंकि राजकरण जी सत्ता की रोटी खा रहे हैं.

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