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राज्य के तीन सरकारी और दो निजी मेडिकल कॉलेजों को नहीं मिली मान्यता, पलामू में उबाल

Daltonganj : केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2018-19 के एकेडमिक वर्ष के लिए पलामू समेत राज्य के तीनों नये सरकारी मेडिकल कॉलेजों के अलावा दो निजी मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने से इनकार कर दिया है. केन्द्र का यह निर्णय भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) के सुझावों पर आधारित है, जिनमें कहा गया था कि इन कॉलेजों में शिक्षकों समेत समुचित संसाधनों की कमी है. केन्द्र सरकार के इस निर्णय के बाद राज्य सरकार के उन दावों को झटका लगा है, जिसमें उसने इस वर्ष से इन मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कराने की बात की थी.

Daltonganj : केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2018-19 के एकेडमिक वर्ष के लिए पलामू समेत राज्य के तीनों नये सरकारी मेडिकल कॉलेजों के अलावा दो निजी मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने से इनकार कर दिया है. केन्द्र का यह निर्णय भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) के सुझावों पर आधारित है, जिनमें कहा गया था कि इन कॉलेजों में शिक्षकों समेत समुचित संसाधनों की कमी है. केन्द्र सरकार के इस निर्णय के बाद राज्य सरकार के उन दावों को झटका लगा है, जिसमें उसने इस वर्ष से इन मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कराने की बात की थी. सरकार के इस दावे के बाद पलामू जैसे अति पिछड़े क्षेत्र के वैसे युवाओं के सपनों को पंख लग गये थे, जो मेडिकल की पढ़ाई के इच्छुक थे. हालांकि अब केन्द्र के मौजूदा फैसले के बाद पलामूवासियों में निराशा है और उनका कहना है कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय की लापरवाही से हम कम से कम एक साल पीछे चले गये हैं. इस मामले पर पलामू के कई लोगों से बातचीत की.

प्रस्तुत है कुछ प्रमुख लोगों की प्रतिक्रियाएं- 

स्वास्थ्य विभाग ने नहीं की संसाधनों की व्यवस्था : राधाकृष्ण किशोर 

Sanjeevani

राधाकृष्ण किशोर

राज्य में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक और छत्तरपुर-पाटन विधानसभा क्षेत्र के विधायक राधाकृष्ण किशोर ने पलामू में मेडिकल कॉलेज की मान्यता का प्रस्ताव रद्द होने पर अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े किये हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास का प्रयास अच्छा रहा है, लेकिन राज्य का स्वास्थ्य महकमा समय पर समुचित संसाधनों की व्यवस्था नहीं कर सका, जिस कारण ऐसी नौबत पैदा हुई है. श्री किशोर ने व्यंग के लहजे में कहा कि पलामू में स्वास्थ्य व्यवस्था ही दुरुस्त नहीं हो पा रही है तो मेडिकल कॉलेज में संसाधन उपलब्ध कराना तो दूर की बात है. उन्होंने इसके लिए राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय को जिम्मेवार ठहराया. उन्होंने कहा कि तैयारी अगर अधूरी रहेगी तो हम विफल ही होंगे. श्री किशोर ने यह भी कहा कि हमें सस्ती लोकप्रियता से बचना चाहिए. 

इच्छाशक्ति का अभाव : इंदर सिंह नामधारी 

इंदर सिंह नामधारी

झारखंड विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने कहा कि पलामू जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना अच्छी पहल है, लेकिन लोगों को सब्जबाग दिखाना बिल्कुल गलत है. अगर सरकार के पास इच्छाशक्ति होती तो इसी एकेडमिक वर्ष से यहां मेडिकल की पढ़ाई शुरू हो सकती थी. श्री नामधारी ने कहा कि पलामू एक पिछड़ा जिला है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर यहां इसी वर्ष से मेडिकल की पढ़ाई शुरू कराने की पहल की करनी चाहिए. 

हड़बड़ी में भेजा गया प्रस्ताव : केएन त्रिपाठी

केएन त्रिपाठी

राज्य के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री केएन त्रिपाठी ने कहा कि समुचित संसाधन जुटाये बगैर मेडिकल कॉलेज की मान्यता के लिए प्रस्ताव भेजने का कोई मतलब नहीं था. उन्होंने इसे सरकार का प्री-मेच्योर निर्णय बताया. मेडिकल कॉलेज में इसी वर्ष से पढ़ाई कराने की घोषणा सरकार की चुनावी घोषणा जैसी थी. यह सरकार भी जानती थी कि आधी-अधूरी तैयारी पर मान्यता नहीं मिल सकती है, लेकिन उसने झूठी घोषणा कर पलामू की प्रतिभाओं को छलने का काम किया. श्री त्रिपाठी ने कहा कि सरकार का अफसरों पर लगाम नहीं है. यही कारण है कि समय पर काम पूरा नहीं हो पाता है और इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है. 

मेडिकल कॉलेज पर सरकार संकल्पित : मनोज सिंह

मनोज सिंह

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री मनोज सिंह ने कहा कि पलामू में मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई शुरू कराने के लिए सरकार दृढ़संकल्पित है. उन्होंने कहा कि बड़े कामों में कभी-कभी तकनीकी अड़चन आ जाती है, लेकिन इससे निराश होने की जरूरत नहीं है. पलामू में मेडिकल कॉलेज हो या पॉलीटेक्निक कॉलेज या फिर विकास के अन्य कार्य-सभी में सरकार संजीदा है. उन्होंने कहा कि यह मेडिकल कॉलेज पलामू के लिए मील का पत्थर साबित होगा. 

जल्द शुरू होगी पढ़ाई : आलोक चौरसिया  

आलोक चौरसिया  

डालटनगंज के विधायक और राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष आलोक चौरसिया ने कहा है कि मेडिकल कॉलेज की मान्यता का प्रस्ताव जिस वजह से खारिज हुआ है, उसकी समीक्षा की जा रही है. कमियों को दूर कर फिर से केन्द्र के पास प्रस्ताव भेजा जायेगा और पूरी उम्मीद है कि पलामू में जल्द ही मेडिकल की पढ़ाई शुरू हो जायेगी. राज्य सरकार इस दिशा में तेजी से पहल कर रही है. 

कथनी और करनी में अंतर : अभिमन्यु सिंह 

अभिमन्यु सिंह 

झारखंड नवनिर्माण मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रामचन्द्र चन्द्रवंशी के कारगुजारियों को पूरी तत्परता से उठाने वाले युवा नेता अभिमन्यु सिंह ने भी इस मसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के इस निर्णय से राज्य सरकार के दावों की पोल खुल गयी है. इससे यह भी साबित हो गया है कि सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है. एक बार फिर पलामू के युवाओं को मेडिकल की पढ़ाई के लिए बाहर जाना पड़ेगा. मतलब साफ है कि यहां की प्रतिभा के साथ-साथ राज्य के लगभग 100 करोड़ रुपये भी दूसरे राज्यों में जायेंगे. श्री सिंह ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में अभी भी कम से कम दो साल लगने की आशंका है. 

सरकार की लापरवाही : किशोर पांडेय 

अभिभावक संघ के अध्यक्ष अधिवक्ता किशोर कुमार पांडेय ने कहा कि केन्द्र से मेडिकल कॉलेज की मान्यता का प्रस्ताव खारिज होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह राज्य सरकार की लापरवाही का नतीजा है. श्री पांडेय ने कहा कि अगर हम पहले से सजग रहते तो ऐसी नौबत नहीं आती. यह पलामू के छात्रों के साथ धोखा है. 

सरकार पुनः भेजे प्रस्ताव : अविनाश वर्मा 

भाजपा नेता और प्राइ्र्रवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाश वर्मा ने कहा है कि यह सरकार पर हावी ब्यूरोक्रेट्स की लापरवाही का परिणाम है. उन्होंने कहा कि कमियों को दूर कर राज्य सरकार को पुनः यह प्रस्ताव भेजना चाहिए. श्री वर्मा ने कहा कि एक कवि ने कहा है विकास इतनी शालीनता से करो कि विकास शोर मचा दे.लेकिन यह घटनाक्रम काफी आहत करने वाला है. श्री वर्मा ने बेबाक कहा कि सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग को खुद स्वस्थ होने की जरूरत है. बीमार स्वास्थ्य विभाग से क्या उम्मीद कर सकता है पलामू का युवा वर्ग.

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