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राज्यसभा का मौजूदा गणित : 88 फीसदी करोड़पति सांसदों के हाथ में गरीब जनता का भाग्य

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“लोकसभा में जनप्रतिनिधियों को जनता स्वयं चुनकर भेजती है, परंतु राज्यसभा में वहीं चेहरे दाखिल होते हैं, जिन्हें राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने गणित के मुताबिक जीत दिलाकर भेजती है. मगर इसमें जोखिम ये भी रहता है कि जिन लोगों का जनता से कभी सीधा सरोकार नहीं रहा वैसे लोग भी राज्यसभा तक पहुंच जाते हैं. ऐसे में यहां एक प्रश्न समीचीन है कि क्या विभिन्न सियासी समीकरणों को साधकर राज्यसभा पहुंचने वाले सांसद देश की गरीब जनता की मजबूरियों, परिस्थितियों और उसकी आवश्यकताओं का आकलन कर सकते हैं? खास तौर पर तब, जब देश की गरीब जनता का भाग्य करोड़पति सांसदों के हाथ में हो.”  

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Murli Manohar Mishra

लोकसभा में जनप्रतिनिधियों को जनता स्वयं चुनकर भेजती है, परंतु राज्यसभा में वहीं चेहरे दाखिल होते हैं, जिन्हें राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने गणित के मुताबिक जीत दिलाकर भेजती है. मगर इसमें जोखिम ये भी रहता है कि जिन लोगों का जनता से कभी सीधा सरोकार नहीं रहा वैसे लोग भी राज्यसभा तक पहुंच जाते हैं. ऐसे में यहां एक प्रश्न समीचीन है कि क्या विभिन्न सियासी समीकरणों को साधकर राज्यसभा पहुंचने वाले सांसद देश की गरीब जनता की मजबूरियों, परिस्थितियों और उसकी आवश्यकताओं का आकलन कर सकते हैं? खास तौर पर तब, जब देश की गरीब जनता का भाग्य करोड़पति सांसदों के हाथ में हो.  

एसी कमरे में बैठकर गरीबी पर निबंध लिखना आसान होता है, मगर गर्मी में तपती जमीन पर चलने वाले गरीबों के पैरों के छाले देखकर गरीब जनता की परिस्थितियों का आकलन करना बेहद कठिन होता है. इस दार्शन का राजनीतिक गलियारों में तो जमकर इस्तेमाल होता है, एक खुद को गरीबों का हितैषी बताकर सियासत भी खूब चमकाई जाती है. देश में गणतंत्र है. सवा सौ करोड़ जनता की तकदीर देश के दो सदनों में गढ़ी जाती है. लोकसभा में जनहित के जो फैसले विधेयक के रुप में पारित होते हैं. उन्हें राज्यसभा में भी कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ता है, ताकि किसी चूक के कारण जनता को कष्ट न हो. तब जाकर किसी विधेयक को कानून की शक्ल देने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है. यही कारण है कि राज्यसभा को देश के सर्वोच्च सदन की गरिमा प्राप्त है. इस लिहाज से राज्यसभा की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. मगर राज्यसभा का मौजूदा स्वरूप एक विश्लेषण की भी मांग करता है, जिसकी तह में यह प्रश्न है कि धनकुबेरों के हाथ में अगर गरीब और अति सामान्य स्तर का जीवन जीने वाली जनता के भाग्य का नियंत्रण आ जाए, तो जनता का कितना भला हो पाएगा ?

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88 %  करोड़पतियों के हाथ में गरीब जनता का भविष्य

यह हैरानी की बात है कि देश के सर्वोच्च सदन यानि राज्यसभा में करीब 88 फीसदी सांसद करोड़पति हैं. 24 मार्च, 2018 को राज्यसभा सांसदों की वित्तीय, आपराधिक पृष्ठभूमि,  और शिक्षा सहित कई महत्तवपूर्ण पहलुओं को लेकर एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने जो विवेचनात्मक विवरण प्रस्तुत किया है, वो चौकाने वाला है. एडीआर ने 233 राज्यसभा सांसदों में से 229 सांसदों के शपथ पत्रों का विश्लेषण किया है. एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक 229 में से करोड़पति राज्यसभा सांसदों की संख्या 201 है. जबकि 20 लाख से कम की संपत्ति वाले सांसदों की संख्या महज 2 % है. कम शब्दों में ये भी कहा जा सकता है कि देश की गरीब या सामान्य जनता के भाग्य की डोर धनकुबेरों के हाथ में है. एडीआर की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े चौकाने वाले हैं.

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राज्यसभा सांसदों की वित्तीय पृष्ठभूमि

संपत्ति का मूल्य (रू.)    सांसद     प्रतिशतता

10 करोड़ से ऊपर           84        37%

5-10 करोड़ के बीच          34        15%

1-5 करोड़ के बीच           83        36%

20 लाख से 1 करोड़        23         10%

20 लाख से कम             5          2 %

भाजपा के सबसे अधिक राज्यसभा सांसद हैं करोड़पति ?

पार्टी                सांसद     कितने हैं करोड़पति

भाजपा               64          58 (91%)

कांग्रेस                50         46 (92%)

सपा                    14         13 (93%)

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राज्यवार कितने फीसदी राज्यसभा सांसद करोड़पति हैं ?

कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, हरियाणा, छत्तीसगढ़ हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मिजोरम, पुडुचेरी, मणिपुर, नागालैंड, गोवा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के सभी राज्यसभा सांसद करोड़पति हैं. जबकि उत्तर प्रदेश के 94%, गुजरात के 91%, मध्य प्रदेश के 91%, महाराष्ट्र और राजस्थान के 89%, बिहार के 87%, असम के 86%, तमिलनाडु के 83%, ओडिशा और झारखंड के 80%, जम्मू-कश्मीर के 75%, पश्चिम बंगाल के 69% और केरल के 50% राज्यसभा सांसदों ने अपने हलफनामे में खुद को करोड़पति बताया है. राज्यसभा के हर एक सदस्य की औसतन कुल संपत्ति 55 करोड़ रुपए है. मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन की पत्नी और सपा से नई निर्वाचित राज्यसभा सासंद जया बच्चन अमीरों की लिस्ट में दूसरे स्थान पर आती हैं. जबकि पहले स्थान पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के महेंद्र प्रसाद हैं. जेडीयू के महेंद्र प्रसाद की कुल संपत्ति 4,078.41 करोड़ रुपये है, जबकि जया बच्चन 1,001.64 करोड़ रुपये की घोषित संपत्ति की मालकिन हैं, जबकि भाजपा के रवींद्र किशोर सिन्हा 857.11 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

आपराधिक पृष्ठभूमि का विश्लेषण

राज्यसभा के 229 सांसदों में से करीब 22 फीसदी सांसदों के साथ आपराधिक रिकॉर्ड भी चिपका हुआ है. इनमें से 51 (22%) राज्यसभा सांसदों ने स्वयं के खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की है. जबकि 20 यानि (9%) राज्यसभा सांसदों ने गंभीर आपराधिक मामलों की घोषणा की है.

पार्टी के अनुसार राज्यसभा सांसदों पर आपराधिक मामले

– भाजपा के 64 राज्यसभा सांसदों में से 14 (22%)

– कांग्रेस के 50 राज्यसभा सांसदों में से 8 (16%)

– सपा के 14 राज्यसभा सांसदों में से 3 (21%)

– एआईएडीएमके के 13 राज्यसभा सांसदों में से 4 (31%)

– एआईटीसी के 13 राज्यसभा सांसदों में से 1 (8%)

इसके अलावा बीजेपी के 4, कांग्रेस के 5, सपा के 1, बीजेडी के 1 और आरजेडी के 2

राज्यसभा सांसदों ने अपने हलफनामों में खुद के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं.

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कितनी पूरी होगी गरीबों की उम्मीद ?

राज्यसभा के मौजूदा आंकड़ों की अगर गहराई से मीमांसा की जाय, तो उसका सारांश इस रूप में ही निकलता है कि लोगों को छाया देने के लिए वृक्ष तो लगाए गए, लेकिन वे सभी वृक्ष या तो खजूर के हैं, या फिर बेर के. अर्थात छाया उम्मीद सिर्फ कल्पनाओं में की जा सकती है. जिस सर्वोच्च सदन में 88 फीसदी करोड़पति और 22 फीसदी क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले सांसद हों, वहां गरीबों के लिए कितना चिंतन हो पाएगा और दिन बहुरने की आस लगाए जनता की उम्मीदों को पूरा करने वाली कितनी योजनाएं ईमानदारी पूर्वक बन पाएंगी, इस प्रश्न को लेकर एक बार तो गरीब जनता का माथा जरूर ठनकेगा. क्योंकि गरीबी के कीचड़ में ही अमीरी का कमल खिलता है. कमल अपने वजूद को बचाने के लिए प्राणतत्व तो कीचड़ से ही लेता है, परंतु उसका एहसान कभी नहीं मानता. फिर भी उम्मीद पर दुनिया कायम है. शायद लोगों का कुछ भला हो जाय.

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