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राजोआना की फांसी पर रोक, फैसले का स्वागत

नई दिल्ली/चण्डीगढ़ | केंद्र सरकार ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्याकांड में दोषी बब्बर खालसा इंटरनेशनल के आतंकवादी बलवंत सिंह राजोआना की फांसी पर बुधवार को रोक लगा दी। राजोआना को शनिवार को फांसी दी जानी थी। वहीं, राजोआना की फांसी के विरोध में पंजाब के कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन हुए। सिख संगठनों द्वारा आहूत बंद से जनजीवन प्रभावित रहा। जम्मू एवं कश्मीर में भी सिख समुदाय ने फांसी के खिलाफ प्रदर्शन किया।

ज्ञात हो कि पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल एवं उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल बुधवार को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील से मिलकर उन्हें राजोआना की दया याचिका सौंपी। इसके बाद उन्होंने फांसी पर रोक लगाए जाने के बारे में जानकारी दी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) की ओर से बुधवार को पंजाब के गृह सचिव को जारी पत्र में कहा गया है कि राजोआना की फांसी पर तबतक रोक लगाई जाती है जबतक कि दया याचिका की अपील पर सर्वोच्च न्यायालय का आदेश प्राप्त नहीं हो जाता अथवा शिरमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से दायर राजोआना की दया याचिका पर राष्ट्रपति द्वारा फैसला नहीं हो जाता।”

एमएचए के संयुक्त सचिव (न्यायिक) जे.एल. चुग ने कहा, “फांसी की सजा मामलों में दया याचिकाओं के सम्बंधित प्रक्रिया के अनुसार बलवंत सिंह की फांसी की सजा पर तबतक रोक लगाई जाती है जबतक कि आपराधिक अपील नम्बर 2277/2011 एवं 1464/2011 के मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला नहीं आ जाता अथवा दया याचिका पर भारत के राष्ट्रपति की ओर से फैसला नहीं हो जाता।”

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बादल द्वय ने पत्रकारों को बताया कि उनके पास केंद्र सरकार का एक पत्र है जिसमें राजोआना की फांसी पर रोक लगाई गई है।

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मुख्यमंत्री बादल ने राजोआना की फांसी पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया।

उन्होंने कहा, “हम फैसले का स्वागत करते हैं। हम किसी भी कीमत पर शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। सिंह ने चण्डीगढ़ में कहा, “इस फैसले से राज्य में शांति कायम करने में मदद मिलेगी।”

वहीं, राजोआना को फांसी देने के खिलाफ पंजाब के कई शहरों में लोग सड़कों पर उतरे और राजोआना की फांसी टालने को लेकर विरोध-प्रदर्शन किए। अधिकांश स्थानों पर दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) कानून एवं व्यवस्था, एस.के. शर्मा ने कहा कि बंद के दौरान अपराह्न् तक किसी तरह की हिस्सा की खबर नहीं है।

चण्डीगढ़ की एक अदालत ने मंगलवार को निर्देश दिया कि राजोआना को 31 मार्च को फांसी दी जाए। अदालत के इस निर्देश के बाद राज्य में तनाव बढ़ गया।

विभिन्न सिख संगठनों द्वारा आहूत बंद के कारण राज्य में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। दुकानें और शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। राज्य परिवहन की तथा निजी बसें बहुत कम संख्या में सड़कों पर उतरीं।

अधिकांश राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय राजमार्गो पर यातायात सामान्य रहा। प्रदर्शनकारियों ने जालंधर, लुधियाना, भटिंडा, पटियाला और अमृतसर जैसे कुछ स्थानों में कुछ समय के लिए चक्काजाम किया।

पंजाब पुलिस के लगभग 60,000 जवानों को तथा अर्धसैनिक बलों की 15 कम्पनियों को सतर्क कर दिया गया है। सुरक्षा बलों ने कुछ शहरों और कस्बों में फ्लैग मार्च किया।

जेल परिसर की तरफ जाने वाले मार्गो पर अवरोधक खड़े किए गए हैं। और इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।

पटियाला जिला पुलिस अधीक्षक गुरप्रीत सिंह गिल ने कहा कि जेल परिसर के चारों ओर और पटियाला जिले में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

चंडीगढ़ में जिला प्रशासन ने किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन और रैली के खिलाफ बुधवार को निषेधाज्ञा लागू कर दी।

जम्मू एवं कश्मीर में भी सिख समुदाय के सदस्यों ने राजोआना के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में सिखों ने राजबाग में धरना दिया और जम्मू-पठानकोट मार्ग जाम कर दिया। श्रीनगर शहर के मध्य लाल चौक पर भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए।

राजबाग में एक प्रदर्शनकारी, सुखदेव सिंह ने मीडियाकर्मियों से कहा, “यह विरोध प्रदर्शन पंजाब के सिखों के साथ एकता जाहिर करने के लिए है, जो राजोआना की जान बचाने के लिए सड़कों पर उतरे हैं।”

ज्ञात हो कि 1992 व 1995 के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री रहे बेअंत सिंह की दिलावर सिंह नामक एक आत्मघाती हमलावर ने 31 अगस्त, 1995 को यहां उच्च सुरक्षा वाले पंजाब सचिवालय में हत्या कर दी थी। (आईएएनएस)

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