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रांची : रिम्स में हीमोफिलीया के मरीजों की जान संकट में, नहीं मिल रही दवा, टेंडर के बाद भी गंभीर नहीं प्रबंधन

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Ranchi : रिम्‍स की बड़ी लापरवाही के कारण ईलाजरत हीमोफिलीया के मरीजों की जान संकट में है. रिम्‍स प्रबंधन के उदासीन रवैये के कारण मरीजों ने हीमोफिलीया की दवाई उपलब्‍ध कराने के लिए स्वास्‍थ्‍य मंत्री से गुहार लगाई है.

टेंडर प्रक्रिया पूरी, फिर भी नहीं खरीद रहे दवाई

रिम्स प्रबंधन ने बीते मई महीने में ही ब्लड प्रोटीन फैक्टर आठ की खरीदरी के लिए टेंडर प्रक्रिया को पूरा कर दिया था. स्वास्थ्य विभाग के सचिव सुधीर त्रिपाठी के द्वारा उक्त टेंडर की खरीदारी के लिए दाम भी मंजूर कर दिया था. इसके बाद भी 7 महीनों से रिम्स में हीमोफिलीया के मरीजों की मौत थर्ड जनरेशन फैक्टर आठ के अभाव में हो रही है.

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रिम्स के न्यूरों विभाग में ब्रेन हैमरेज के इलाजरत मरीज बापी दास के लिए डॉ अनिल कुमार ने थर्ड जनरेशन फैक्टर आठ लिखा है, लेकिन मरीज को रिम्स प्रबंधन दवा उपलब्ध नहीं करा रहे हैं. स्‍पलीमेंट में वीडब्‍लूडी फैक्‍टर दिया जा रहा है. जिसे वापस कर दिया गया. और कहा गया कि जो जरूरत है वही चाहिए. इसकी वजह से मरीज की स्थिति लगातार खराब हो रही है.

फंड रहते हुए रिम्‍स नहीं खरीद रहा हीमोफिलिया की दवायें

रिम्स में इलाजरत हीमोफिलिया मरीज को थर्ड जनरेशन फैक्टर आठ देने के लिए रिम्स प्रबंधन दवा की खरीदारी बाजार से भी नहीं कर रहा है. जबकि रिम्स में इलाजरत हीमोफिलिया मरीजों को समय पर थर्ड जनरेशन फैक्टर आठ मिले इसके लिए सरकार द्वारा रिम्स प्रबंधन को अलग से फंड भी मुहैया कराया गया है. रिम्स में थर्ड जनरेशन फैक्टर आठ की कमी और इससे हो रही मरीजों की समस्या को लेकर हीमोफिलिया सोसाईटी ने अपना विरोध भी दर्ज कराया है.

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क्‍या कहता है रिम्‍स प्रबंधन

फैक्टर की कमी को लेकर रिम्स के प्रभारी निदेशक डॉ एसके श्रीवास्‍तव का कहना है कि हीमोफिलिया की दवाई खरीदकर एक मरीज को दिया जा रहा था. टेंडर प्रक्रिया की मुझे कोई जानकारी नहीं है. मैं इसे देख लूंगा. मंत्री तक किसी ने क्‍या और कब शिकायत की है यह हमें मालूम नहीं है.

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