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रांची में हो रहा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 का उल्लंघन, रोजाना चार टन कचरा होता है खुले में डंप (देखें वीडियो)

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Md. Asghar Khan/ Saurav Shukla

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News Wing Ranchi, 04 December: “स्वच्छ भारत का इरादा, इरादा कर लिया हमने देश से अपने वादा, ये वादा कर लिया हमने स्वच्छ भारत का इरादा…” गीतकार कैलाश खेर के मधुर स्वर संग हर रोज सुबह नगर निगम रांची के सौजन्य से इस इरादे का वादा अवाम से कराया जाता है, लेकिन शायद निगम ही इसे अभी तक अमली जमा नहीं पहना पाया है. शहर के कचरों को जिस गांव में डंप किया जाता है, वहां स्वस्छता दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता है. नगर निगम प्रतिदिन शहर से चार टन से भी अधिक कचरा रिंग स्थित झिरी गांव में खुले में फेंकता है. शहरवासियों को कानून का पाठ पढ़ाने वाला निगम स्वम ही इसका उलंघन कर रहा है.

शहर को साफ कर गांव को गंदा कर रहा निगम

केंद्र सरकार के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 के तहत नगर निगम को शहर संबंधी समूहों, जनगणना वाले कस्बों, अधिसूचित औद्धोगिक टाउनशिप, रेल, हवाई अड्डों, एयरबेस, बंदरगाह आदि से कुड़े-कचरे को इकठ्ठा करना होता है. नियमानुसार कचरे को बिजली या खाद में बदलना होता है, लेकिन रांची नगर निगम की ओर से ऐसा कुछ भी नहीं किया जाता है, बल्कि उस कचरे को शहर से 13 किलोमीटर दूर झीरी गांव में फेंक दिया जाता है. नतीजा शहर तो साफ-सुथरा हो जाता है, पर पास के गांव आनंद और हनुमान नगर के लोगों का जीना मुहाल हो गया है.

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परिवार, रिश्तेदार तक अब नहीं आते हैं

पिछले एक दशक से रांची शहर का कचरा झिरी गांव में फेंका जा रहा है, जो पहाड़नुमा बन चुका है. पांच सौ मीटर तक पसरे इस कचरे ने पतरातू जाने वाली फोरलेन सड़क को भी अपनी चपेट ले लिया है. आस-पास के लोग मुंह पर हाथ रख ही सड़क पार करते हैं. कूड़े के अंबार से सटी बस्ती, आनंद और हनुमान नगर के लोग कहते हैं कि उनके यहां अब परिवार और रिश्तेदार तक नहीं आते हैं. न्यूज़विंग से बातचीत करते हुए आशा देवी, विभा देवी, चिंता देवी बताती हैं कि सड़क, पानी, बिजली सब ठीक है, पर पास के दुर्गंध ने जीना मुहाल कर दिया है. शादी-विवाह करना यहां पर मुश्किल है. बरसात और गर्मी में खाना नहीं खाया जाता. मच्छर, मख्खी के कारण 24 घंटे मच्छरदानी लगानी पड़ती है. वो कहती हैं कि गंदगी के कारण हरेक घर बिमारी से ग्रासित है.

बीमारी की वजह कूड़े का अंबार, हंगामे पर होता है दवा का छिड़काव

“दस साल से यहां यही हाल है, पहले घर के पास से कचरा ढोने वाली गड़ियां जाया करती थीं, बदबू से परेशान हो जाते हैं”  अपनी समास्या बताते हुए विनीता पांडे सरकार से खुले में हो रहे कचरे के डंप का स्थायी बंदोबस्त चाहती हैं. उधर रिंकू देवी और सरोज देवी टायफाइड-मलेरिया के कारण साल में तीन-चार बार बच्चों को अस्पताल ले जाने की बात कहती हैं. बताती हैं कि डंपिंग यार्ड की वजह से ही अक्सर बच्चें बीमार रहते हैं. पहले निगम की तरफ से दवा का छिड़काव होता भी था, लेकिन अब हंगामा करने पर कभी-कभार होता है.

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निगम ने अबतक नहीं बनायी बाउंड्री

फुटकल टोली पंचायत के वार्ड सदस्य इंद्रदेव कुमार शर्मा कहते हैं कि रांची नगर निगम ने डंपिंग यार्ड को बाउंड्री कर घेरवाने की बात कही थी, लेकिन अबतक नहीं की गई है. नौ-दस साल से यहां निगम कचरा फेंक रहा है. गंदगी की वजह से इस इलाके का विकास नहीं हो पा रहा है. अंजली देवी कहती हैं कि कम से कम बाउंड्री कर दिया जायेगा तो कचरा उड़कर घर तक नहीं आयेगा.

क्या कहते हैं प्रतिनिधि और पदाधिकारी

वर्तमान में शहर की साफ-सफाई रांची नगर निगम और एसएल इंफ्रा कंपनी के द्वारा किया जा रहा है. 33 वार्ड में कंपनी और शेष में निगम के सफाईकर्मी करते हैं. निगम की हेल्थ ऑफिसर डॉ किरण कुमारी का कहना है कि फिलहाल झिरी में डंपिग यार्ड है, जहां शहर कचरा इकट्ठा होता है. खुले में कचरे को डंप किए जाने के सवाल कहती हैं कि वहां वेस्ट टू इनर्जी प्लांट की प्रक्रिया जारी है. वहीं शहर के डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय का कहना है कि कंपनी एसएल इंफ्रा से सरकार ने कचरे को बिजली में बदलने के लिए एनर्जी प्लांट लगाने का एमओयू किया है. कंपनी को इस बाबत निगम से डेडलाइन भी दी जा चुकी है. फिलहाल उसे तीन माह के अंदर वहां झिरी स्थित डंपिंग यार्ड को बाउंड्री कर घेरने को कहा गया है.

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कहां जमा होता है कचरा

शहर के 55 वार्ड के घरों, गली मुहल्ले, सड़क और अन्य जगहों से निगम की गाड़ियां कूड़ा-कचरा उठाकर मीनी ट्रांसफर स्टेशन(एमटीएस) में जमा करती है. इसके लिए मोराहबादी, कांटाटोली, खादगढ़ा, हरमू, कर्बला चौक और खेलगांव में एमटीएस बनाए गए हैं. यहां शहर की 170 छोटी गाड़ी कचरा इकठ्ठा करती है. फिर यहां से 240 ट्रैक्टर, दस बड़ी गाड़ी रोजाना चार टन से अधिक कचरा झिरी में डंप करती है.

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