न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

रांची में ठेकेदारों द्वारा मजदूरों का बढ़ता जा रहा शोषण, आर्थिक-मानसिक प्रताड़ना का होना पड़ता है शिकार

19

Manish Kumar
Ranchi, 08 December
: राजधानी रांची में दिन-प्रतिदिन ठेकेदारों द्वारा मजदूरों (रेजा, कुली, मिस्त्री) पर शोषण बढ़ता ही जा रहा है. खासकर चौक-चौराहों पर काम की तलाश में प्रतिदिन खड़ा रहने वाले मजदूरों को आर्थिक व मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है. सुदूरवर्ती इलाके से आनेवाले मजदूरों को सप्ताह में दो से तीन दिन काम नहीं मिलने की वजह से खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है. केंद्र से लेकर राज्य सरकार के दावारा मजदूरों के लिए रोजाना की मजदूरी दर 350 रुपया निर्धारित की गयी है. लेकिन इसके बावजूद ठेकेदारों और बिजौलियों के द्वारा इस बात की अवहेलना की जाती है. और प्रशासन के द्वारा उनपर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. सरकार की नरेगा से मनरेगा तक की स्कीम सिर्फ कागज तक सीमित ह. ना तो श्रम मंत्रालय में पंजीयन किया गया है, ना किसी प्रकार का जॉब कार्ड दिया जाता है और ना ही सही दैनिक भत्ता ही मिल पाता है मजदूरों को. 60 से 70 प्रतिशत मजदुर वर्ग इन सभी सुविधाओं से वंचित हैं.

क्या कहना है मजदूरों का

मांडर निवासी ललिका कुजूर का कहना है कि आर्थिक स्थिति सही नहीं होने की वजह से पढ़ाई के साथ-साथ मजदूरी भी करनी पड़ती है. अगर मजदूरी नहीं करेंगे तो पढ़ाई के लिए पैसे नहीं हो पाएंगे और पढ़ाई अधूरी रह जाएगी. सप्ताह में दो से तीन दिन काम मिल जाता है तो काम निकल जाता है. लेकिन जब ठेकेदार के अंदर काम करना पड़ता है तो पैसे के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है.

पंचम महली लोहरदगा निवासी ने बताया कि बहुत बार दूर से आने के बाद भी काम नहीं मिल पाता है. 30 रुपये रोजाना आने-जाने के भाड़े के रूप में खर्च हो जाता है. अगर किसी के घर में भवन निर्माण सम्बंधित कार्य मिलता है तो उचित मेहनताना शाम तक मिल जाती है. जब किसी ठेकेदार और बिचौलिये के द्वारा काम मिलता है तो पहले यह बोलकर ये जाया जाता है कि 350 रुपये मिलेंगे लेकिन शाम में काम के बाद मात्र 250 रुपये दिया जाता है. और अगर पूरा पैसा मांगते है तो उनके द्वारा गाली-गलौज की जाती है. सरकार के द्वारा नरेगा से लेकर मनरेगा तक का लाभ एक बार भी नहीं मिला है. ये सब सुनने में अच्छा लगता है कि सरकार मजदूरों के लिए स्कीम चला रही है. लेकिन गरीबों और मजदूरों के लिए इस योजना के फायदे को अगर देखा जाए तो शून्य दिखेगा.

देखें वीडियो

 
कतरीना देवी बताती है कि हमलोग गुमला से आकर काम करने को मजबूर है. ना जॉब कार्ड, ना किसी तरह की सरकारी मदद, ना सही दैनिक भत्ता और ना ही किसी सरकारी योजना के तहत एक भी दिन काम मिला है. बहुत बार को काम का पैसा आज-कल मिलने के चक्कर में अटका रह जाता है.

देखें वीडियो

 

गरीब मजदूरों का किया जाता है शोषण: अजय सिंह 

मजदूर को जिस दिन काम नहीं मिलता उस दिन उसे पेट भर खाना नसीब नहीं हो पाता है. बहुत से ठेकेदारों के द्वारा मजदूरों को देर से पैसा देकर या फिर सही मेहनताना नहीं देकर उनकी मजबूरी का गलत फायदा भी उठाया जाता है. हर रोज काम नहीं मिलने की वजह से मजदूर ठेकेदारों के यहां नियमित काम मिलने की लालच में कम मेहनताना में काम करने को तैयार हो जाते है. और यही वजह है कि उन्हें आर्थिक और मानसिक रुप से शोषित होना पड़ता है. सरकार ने न्यूनतम मजदूरी का कानून तो बना दिया है. लेकिन इसका लाभ असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को नहीं मिल पा रहा है.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: